किस्सों के साथ शुरू हुआ, शान-ए-अवध इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का दूसरा दिन

Second Day Of Shan E Awadh International Film Festival Starts With Tales

लखनऊ । शान-ए-अवध इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन की शुरुआत मुंबई के क्षितिज की फिल्म “डायलमा” से हुयी। जिसके बाद गुदगुदाते हुए स्पेन की फिल्म “टाइटन” से और फिर वर्ल्ड वार—2 के प्रष्ठभूमि पर बनी नोकेबो, दिल्ली के मयंक सिंह की आइरनी का जलवा रहा जो कुछ समाजिक अह्सास और सवाल ज़हन में छोड़ गयी।




इन फिल्मों के बीच आकर्षण में रही सुमित मिश्रा की “अमृता और मैं”, जिसमें अमृता और साहिर के किस्से, अमृता और इमरोज़ की मोहब्बत के किस्से और रिश्तों की मिठास को पहली बार परदे पर पेश किया गया। इंदौर के सुधान्शु शर्मा की “कालिचाट” किसानो की व्यथा बयां करती हुयी, और फिल्म “स्याही” एक पिता और पुत्र के बीच के रिश्तों को बड़ी खूबसूरती से दर्शकों के बीच पेश किया। फिल्मों के अलावा कई म्यूजिक वीडियोज का प्रदर्शन भी हुआ।




फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन निर्णायक मंडल में बतौर सदस्य वरिष्ठ फिल्मकार कुंदन शाह (जाने भी दो यारों, क्या कह्ना), फिल्म एडिटर असीम सिन्हा (ज़ुबेदा, चलो दिल्ली, मोहल्ला अस्सी), के साथ सीनियर फिल्म आलोचक अजय ब्रह्मात्मज ने फेस्टिवल में शिरकत की। फेस्टिवल निदेशक अश्वनी सिंह द्वारा सभी को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।




इस मौके पर कुंदन शाह, असीम सिन्हा और अजय ब्रह्मात्मज ने लखनऊ जैसे नॉन-मेट्रो शहर में हो रहे इस तरह के आयोजन को शहर एवं प्रदेश के लिए बेहद ज़रुरी बताया। उन्होंने प्रदेश सरकार से इस तरह के आयोजनों को प्रोत्साहित कर इन्हे और बड़ा करने की वकालत की। फिल्म फेस्टिवल डायरेक्टर अश्वनी सिंह ने आयोजन में शामिल हुये वरिष्ठ फ़िल्मकार कुंदन शाह और असीम सिन्हा और अजय ब्रह्मातमज को धन्यवाद दिया।

लखनऊ । शान-ए-अवध इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन की शुरुआत मुंबई के क्षितिज की फिल्म “डायलमा” से हुयी। जिसके बाद गुदगुदाते हुए स्पेन की फिल्म “टाइटन” से और फिर वर्ल्ड वार—2 के प्रष्ठभूमि पर बनी नोकेबो, दिल्ली के मयंक सिंह की आइरनी का जलवा रहा जो कुछ समाजिक अह्सास और सवाल ज़हन में छोड़ गयी। इन फिल्मों के बीच आकर्षण में रही सुमित मिश्रा की “अमृता और मैं”, जिसमें अमृता और साहिर के किस्से, अमृता और इमरोज़ की मोहब्बत…