सेल्फी आपको कूल नहीं बीमार बना रही है

कहते हैं कि अति किसी बात की अच्छी नहीं होती है, क्योंकि एक सीमा के बाद कोई चीज अपने दुष्प्रभाव समाज पर छोड़ने लगती है। ऐसा ही कुछ स्मार्टफोन्स को लेकर होने लगा है। हाथों में बड़ा सा स्मार्टफोन पकड़कर चलना, खुद को कूल दिखाना, अपने दिन भर के कारनामों को सेल्फीज के रूप में सोशल साइट्स के माध्यम से दोस्तों के बीच शेयर करना हर आयुवर्ग के लोगों का शगर बन चुका है।

दिनभर में बार बार सेल्फी लेने की आदत और फिर उन्हें सोशल मीडिया साइट्स पर अपलोड करके दूसरों की प्रतिक्रिया पाना अब कूल नहीं रहा है, क्योंकि सेल्फी लेने की प्रवृत्ति को एक बीमारी के रूप में देखा जाने लगा है। जिसे मनोवैज्ञानिकों ने सेल्फाइटिस का नाम दिया है। संभवतय यह बीमारी जल्द ही अंग्रेजी शब्दकोष का हिस्सा बन जाएगा।

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शोधकर्ता मनोचिकित्सकों की माने तो सेल्फी लेने की आदत एक विशेष प्रकार की मा​नसिक स्थिति के कारण पैदा होती है। बार बार शीशे में स्वयं को निहारने की बीमारी के बारे में आपने पहले सुना और पढ़ा होगा जिसे सेल्फी ने अगले स्तर तक पहुंचाने का काम किया है। जिस तरह शीशे में खुद को बार बार देखने वाले लोग खुद को ज्यादा आकर्षक और अन्य लोगों से बेहतर मानते हैं, उसी तरह का व्यवहार सेल्फी खींचने वालों पर हुए अध्ययन में भी सामने आया है।

ऐसे लोग अपनी दिनचर्या के मुताबिक समय समय पर सेल्फी लेते रहते हैं। वर्किंग महिलाओं में आॅफिस के लिए घर छोड़ने से पहले और आॅफिस पहुंचने के बाद सबसे पहला काम सेल्फी लेना होता है। जिसका उद्देश्य अपने लुक की जांच करना होता है। सेल्फी अच्छी आने पर वह सोशल साइट्स पर पहुंच ही जाती है।

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सेल्फाइटिस के भी कई अलग अलग स्तर हैं जो व्यक्तिगत स्वभाव के मुताबिक ही बदलते रहते हैं। जैसे स्वयं को अपने साथियों से ज्यादा साहसी साबित करने की कोशिश या खुद को दूसरों से ज्यादा सुंदर या कामयाब साबित करने की आदत। जिसके चलते लोग सेल्फाइटिस का शिकार हो रहे हैं।

आपने भी देखा होगा कि कुछ लोग अपने पैसे और सफलता का प्रदर्शन करने के लिए भी सेल्फी का प्रयोग करते हैं। रेस्टोरेंट में लंच, डिनर या शॉपिंग के समय की सेल्फी से लेकर एयरपोर्ट्स और फाइव स्टार होटल्स में ली गई अपनी तस्वीरों को शेयर करना ऐसे लोगों की आदत का हिस्सा होता है। शोध के मुताबिक सेल्फाइटिस से ग्रस्त लोगों दिखावा करने और स्वयं को अन्य से बेहतर या बड़ा साबित करने के आदी होते हैं।

जैसे ही उन्हें महसूस होता है कि वे कुछ ऐसा और अलग कर रहे हैं, जिसे दिखकर उनके आस पास के लोगों में उनकी इज्जत बढ़ेगी वे सेल्फी लेना प्राथमिकता मानते हैं। फिर चाहें आस पास का माहौल कैसा भी क्यों न हो। आपने सोशल साइट्स पर खुद से बनाए ऐसे कई खतरनाक वीडियो भी देखे होंगे जिन्हें देखकर आपको डर का अहसास होने लगता है। जैसे किसी ऊंची इमारत पर लगे टॉवर पर चढ़कर जान को जोखिम डालकर करतब करना और लटकना आदि।

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इन वीडियोज को बनाने वाले लोग खुद को बेहतर और खुद को अन्य लोगों से ज्यादा रोमांच प्रेमी दिखाने के लिए ऐसी हरकतें करना शुरू कर देते हैं। जो कई बार ऐसे लोगों की जिन्दगी के लिए खतरनाक साबित हो जातीं हैं। लेकिन मनोचिकित्सा ने इसे एक मानसिक दशा यानी मानसिक समस्या के रूप में परिभाषित किया है।

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