पूर्व केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता प्रिय रंजन दासमुंसी का निधन

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल कांग्रेस के दिग्गज नेता, पांच बार के सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रिय रंजन दासमुंसी का सोमवार को निधन हो गया। वह 2008 में लकवे का शिकार होने के बाद से बिस्तर पर थे। पश्चिम बंगाल की हावडा लोकसभा सीट से तीन बार सांसद रहने के बाद प्रिय रंजन दासमुंसी साल 2004 में अंतिम बार रॉयगंज सीट से लोकसभा पहुंचे थे। इस बार उन्हें मनमोहन सिंह सरकार में संसदीय कार्य और सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनाया गया था। कांग्रेस पार्टी ने दासमुंसी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए पार्टी के केन्द्रीय कार्यालय में शोकसभा रखी है, जहां उनके शव को अंतिम विदाई के लिए रखा जाएगा।

13 नवंबर 1945 को जन्मे प्रिय रंजन दासमुंसी ने अपने राजनीति जीवन की शुरूआत यूथ कांग्रेस के नेता के रूप में की थी। वह 1970 में पश्चिम बंगाल यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष बनने के बाद 1971 में हावडा से पहली बार सांसद चुने गए। अपने राजनीतिक जीवन में दासमुंसी केन्द्र की राजनीति में पश्चिम बंगाल का लंबे समय तक प्रतिनिधित्व किया।

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केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री के रूप में दासमुंसी ने सोनी टीवी के चैनल AXN और Fashion TV को अश्लील कार्यक्रमों के प्रसारण के लिए तीन माह तक बैन रखा था। जिसके बाद से अंडरवॉटर हॉवर्स सिस्टम लागू किया गया। इसके साथ ही भारतीय क्रिकेट मुकाबलों के दूरदर्शन पर प्रसारण को अनिवार्य करने का श्रेय भी दासमुंसी को ही जाता है। उन्होने क्रिकेट संघ से भारतीय क्रिकेट मुकाबलों का कॉपीराइट लेने वाली कंपनी निंबस कम्युनिकेशन को सरकारी टीवी चैनल दूरदर्शन पर दिखाने के लिए वाध्य कर दिया था। उन्होंने सूचना प्रसारण मंत्री के रूप में कई ऐसे एतिहासिक फैसले लिए जिनके लिए उन्हेें सराहना मिली।

इसके अलावा दासमुंशी ने लंबे समय तक भारतीय फुटबाल संघ के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया। वह लगातार 20 सालों तक भारतीय फुटबॉल संघ के अध्यक्ष रहे।

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12 अक्टूबर 2008 का दिन उनके जीवन का सबसे बुरा दिन साबित हुआ। जब उन्हें हार्ट अटैक के साथ लकवे ने अपना शिकार बना लिया। एम्स जैसे अस्पताल में लंबे इलाज के बाद अपोलो और फिर विदेश में कई चिकित्सा विशेषज्ञों के प्रयास के बाद भी दासमुंसी बिस्तर से दोबार नहीं उठ सके। जिसके बाद उनकी सियासी विरासत को पत्नी दीपा दासमुंसी ने संभाला और वह 2009 में रॉयगंज सीट से लोकसभा की सदस्य चुनीं गईं। राजनीति में आने से पहले दीपा दासमुंसी कोलकाता की जानी मानी समाजसेविका के रूप में पहचानी जातीं थीं।

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