इस देश में सरकार ने लोगों से की ज्यादा बच्चें पैदा करने की अपील

इस देश में सरकार ने लोगों से की ज्यादा बच्चें पैदा करने की अपील
इस देश में सरकार ने लोगों से की ज्यादा बच्चें पैदा करने की अपील

नई दिल्ली। भारत और चीन जैसे देश जहां जनसंख्या विस्फोट की समस्या से जूझ रहे हैं, वहीं यूरोप का सर्बिया देश जनसंख्या नहीं बढ़ने से परेशान है। सर्बिया की सरकार अपने देश के दंपत्तियों से अपील कर रही है, ‘बच्चे पैदा करो, देरी मत करो’। बच्चों की कम आबादी की समस्या को दूर करने के लिए सर्बिया में इस संबंध में लगाए जा रहे नारों में से एक और है – ‘चलो बच्चों की किलकारियां सुनें।’ वहीं, दूसरी ओर देश की महिलाओं का कहना है कि उन्हें आबादी बढ़ाने के लिए बेहतर सहयोग चाहिए न कि महज प्रेरणादायक शब्द।

Serbia Govt Appeals To People To Have More Babies :

साल 2050 तक 15 प्रतिशत तक कम होगी आबादी

यूनाइटेड नेशंस (यूएन) की ओर से अंदेशा जताया गया है कि साल 2050 तक सर्बिया की आबादी में 15 प्रतिशत तक की और गिरावट आ जाएगी। सर्बिया सरकार ने जन्‍मदर को बढ़ाने के लिए कई तरह के स्‍लोगन भी लॉन्‍च किए हैं जैसे- ‘बच्‍चे पैदा करें, देर मत करें।’ इसके अलावा एक और स्‍लोगन सरकार की ओर से दिया गया है, ‘बच्‍चे की रोने की आवाज को गूंजने दीजिए।’ सर्बिया की सरकार कई तरह की अपील के बाद भी जन्‍मदर को बढ़ाने में नाकामयाब रही है। यहां पर महिलाओं का कहना है कि उन्‍हें देश की आबादी बढ़ाने के लिए सिर्फ शब्‍दों से प्रोत्‍साहन नहीं चाहिए बल्कि उन्‍हें बेहतर सुविधाएं चाहिए।

बच्चे पैदा करने के लिए कई प्रस्ताव

देश के कपल्स में कम बच्चे पैदा करने की प्रवृत्ति को दूर करने के लिए सर्बियाई अधिकारियों ने कई तरह के प्रस्ताव दिए हैं।इसमें जून में घोषित एक योजना भी शामिल है। महिलाओं के लिए कई तरह की योजनाएं शुरू की जाएंगी। एक नई योजना के अनुसार उन इलाकों में कम मंजिलों वाले मकान बनेंगे जहां बच्चों की जन्म दर कम है। सर्बिया के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर वुकिक ने इस बात की घोषणा की है कि इस बात पर विचार किया जा रहा है कि अधिक बच्चे पैदा करने वाले दमपतियों को करों में छूट दी जाए।इसके अलावा महिलाओं को बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित करने के लिए कई लुभावनी योजनाओं की शुरुआत की गई है।

राष्ट्रपति एलेक्जेंडर वुकिक ने कहा कि यह एक अध्ययन पर आधारित है जिसमें पता चला है कि दो से चार मंजिला घरों में रहने वाले दंपतियों में बच्चे पैदा करने की दर दोगुना ज्यादा है। इसके अलावा महिलाओं को और बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित करने के वास्ते नए मातृत्व देखभाल कानून पारित किए गए हैं।

नई दिल्ली। भारत और चीन जैसे देश जहां जनसंख्या विस्फोट की समस्या से जूझ रहे हैं, वहीं यूरोप का सर्बिया देश जनसंख्या नहीं बढ़ने से परेशान है। सर्बिया की सरकार अपने देश के दंपत्तियों से अपील कर रही है, 'बच्चे पैदा करो, देरी मत करो'। बच्चों की कम आबादी की समस्या को दूर करने के लिए सर्बिया में इस संबंध में लगाए जा रहे नारों में से एक और है - ‘चलो बच्चों की किलकारियां सुनें।' वहीं, दूसरी ओर देश की महिलाओं का कहना है कि उन्हें आबादी बढ़ाने के लिए बेहतर सहयोग चाहिए न कि महज प्रेरणादायक शब्द।

साल 2050 तक 15 प्रतिशत तक कम होगी आबादी

यूनाइटेड नेशंस (यूएन) की ओर से अंदेशा जताया गया है कि साल 2050 तक सर्बिया की आबादी में 15 प्रतिशत तक की और गिरावट आ जाएगी। सर्बिया सरकार ने जन्‍मदर को बढ़ाने के लिए कई तरह के स्‍लोगन भी लॉन्‍च किए हैं जैसे- 'बच्‍चे पैदा करें, देर मत करें।' इसके अलावा एक और स्‍लोगन सरकार की ओर से दिया गया है, 'बच्‍चे की रोने की आवाज को गूंजने दीजिए।' सर्बिया की सरकार कई तरह की अपील के बाद भी जन्‍मदर को बढ़ाने में नाकामयाब रही है। यहां पर महिलाओं का कहना है कि उन्‍हें देश की आबादी बढ़ाने के लिए सिर्फ शब्‍दों से प्रोत्‍साहन नहीं चाहिए बल्कि उन्‍हें बेहतर सुविधाएं चाहिए।

बच्चे पैदा करने के लिए कई प्रस्ताव

देश के कपल्स में कम बच्चे पैदा करने की प्रवृत्ति को दूर करने के लिए सर्बियाई अधिकारियों ने कई तरह के प्रस्ताव दिए हैं।इसमें जून में घोषित एक योजना भी शामिल है। महिलाओं के लिए कई तरह की योजनाएं शुरू की जाएंगी। एक नई योजना के अनुसार उन इलाकों में कम मंजिलों वाले मकान बनेंगे जहां बच्चों की जन्म दर कम है। सर्बिया के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर वुकिक ने इस बात की घोषणा की है कि इस बात पर विचार किया जा रहा है कि अधिक बच्चे पैदा करने वाले दमपतियों को करों में छूट दी जाए।इसके अलावा महिलाओं को बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित करने के लिए कई लुभावनी योजनाओं की शुरुआत की गई है। राष्ट्रपति एलेक्जेंडर वुकिक ने कहा कि यह एक अध्ययन पर आधारित है जिसमें पता चला है कि दो से चार मंजिला घरों में रहने वाले दंपतियों में बच्चे पैदा करने की दर दोगुना ज्यादा है। इसके अलावा महिलाओं को और बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित करने के वास्ते नए मातृत्व देखभाल कानून पारित किए गए हैं।