शहीद जवान के परिवार को आर्थिक सहायता के लिए मिला चेक बाउंस

नई दिल्ली। देश की सेवा में दिन-रात समर्पित रहने वाले जवान जब सीमा पर आतंकियों की गोली का निशाना बन जाते हैं, तो उनके प्रति संवेदना हर किसी के जहन में देखने को मिलती है लेकिन देश के लिये शहीद होने के बाद आखिर कौन सी सहूलियत उनके परिवार को सरकार देती है, ये सबसे बड़ा मुद्दा है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां शहीद के परिवार को मिला चेक ही बाउंस हो गया, पूरा परिवार मदद की आस में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। मामला गाजीपुर जिले का है।

ये है मामला–

बीते साल 22 नवम्बर 2016 को कश्मीर के माछिल सेक्टर में नियंत्रण रेखा पर यूपी के गाजीपुर जिले के रहने वाले मनोज कुशवाहा शहीद हो गए थे। शहीद जवान के परिवार को सरकार ने आर्थिक मदद का आश्वासन दिया था उसके बावजूद आज उनका परिवार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है। प्रदेश सरकार की तरफ से जवान के परिवार को आर्थिक सहायता तो मिल गयी लेकिन केंद्र सरकार और सेना की तरफ से इस परिवार को कोई मदद नहीं मिली है।




जहां एक तरफ शहीद जवान की पत्नी अपने बच्चों और परिवार के भरण पोषण के लिए सरकारी दफ्तरों में गुहार लगा रही है वहीं शहीद के पिता और भाई आर्थिक सहायता के लिए मिले चेक को बैंक में बाउंस होने की वजह से सरकारी दफ्तरों से लेकर बैंक के चक्कर लगा रहे हैं।




गाजीपुर जिले से तकरीबन 25 किलोमीटर दूर बद्धोपुर जहां शहीद मनोज का परिवार आज मुसीबत के समय में अकेला महसूस कर रहा है। शहीद के भाई ब्रजमोहन और अरूण यह बता रहे हैं कि सेना की तरफ से मदद में मिले तीन चेक में से दो चेक जो छोटी रकम के थे वो तों मिल गए लेकिन जो 1 लाख 88 हजार 520 का चेक था वो आज तक नहीं मिला।

शहीद मनोज की पत्नी मंजू का कहना है कि परिवार के भरण पोषण में बहुत समस्या आ रही है। हम चाहते है कि जो सरकार अपने वादे को पूरा करे और हमारी मदद करे। दूसरी तरफ शहीद के पिता हरिलाल का कहना है कि प्रदेश सरकार ने तो अपना वादा निभा दिया लेकिन भारत सरकार ने गांव में गेट सड़क और परिवार के लिए गैंस एजेंसी का वादा किया था वो भी नहीं किया और जो सेना के द्वारा चेक मिला था उसका पैसा भी अभी तक नहीं मिल पाया है।

इस पूरी घटना के लिए ग्रामीणों का कहना है कि अगर इसी तरह अधिकारियों द्वारा शहीद के परिवारों की मदद करने की बजाय उन्हें अनदेखा किया जाएगा तो इससे युवाओं का मनोबल टूटेगा।