बेशर्मी: कोर्ट में मुस्कराती रहीं इंस्पेक्टर लक्ष्मी चौहान, बोली- जल्दी मुझे जेल भेजो

sho laxmi chauhan
बेशर्मी: कोर्ट में मुस्कराती रहीं इंस्पेक्टर लक्ष्मी चौहान, बोली- जल्दी मुझे जेल भेजो

मेरठ। बेगुनाहों को कानून का खौफ दिखाने वाली यूपी पुलिस ने भृष्टाचार की आरोपित इस्पेक्टर लक्ष्मी सिंह चौहान को 44 दिनों तक पूरी छूट दी। गिरफ्तार करने के बजाय गाजियाबाद पुलिस कागजों पर दबिश देती रही। कहीं से राहत न मिलने पर आखिरकार महिला इंस्पेक्टर को गुरुवार को अदालत में आत्मसमर्पण करना पड़ा। हालांकि इस दौरान इंस्पेक्टर कचहरी में मुस्कराती रहीं और बार-बार बोलती रहीं कि जल्दी करो, मुझे जेल भेजो। आरोप लगाने वाली पुलिस को अब कोर्ट में जवाब देंगे। सिपाही धीरज भारद्वाज को ढांढस बंधाती रहीं कि डरो मत, इंसाफ मिलेगा।

Shameless Inspector Lakshmi Chauhan Smiling In Court Said Send Me To Jail Soon :

जानकारी के मुताबिक इंस्पेक्टर लक्ष्मी सिंह समेत सभी आरोपी पुलिसकर्मियों ने सरेंडर अर्जी लगाई थी। लेकिन लक्ष्मी सिंह व सिपाही धीरज भारद्वाज ने ही आत्मसमर्पण किया। एडीजीसी सिराजुद्दीन अलवी ने बताया कि न्यायालय एडीजे/स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम इरफान कमर ने अन्य पुलिसकर्मियों की सरेंडर अर्जी को खारिज कर दिया है।

भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पुलिस की भी किरकिरी हुई। गाजियाबाद पुलिस आरोपी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार करने के लिए दबिश देने के दावे करती रही। इस बीच इंस्पेक्टर ने मेरठ से लेकर हाईकोर्ट तक अग्रिम जमानत याचिका लेने की कोशिश की। लेकिन गंभीर आरोपों को देखते हुए न्यायालय ने कोई राहत नहीं दी और याचिका खारिज कर दी। एसएसपी गाजियाबाद ने फरार इंस्पेक्टर समेत पुलिसकर्मियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम कर उनके घर पर कुर्की वारंट चस्पा भी कराए। उसके अगले ही दिन गुरुवार को इंस्पेक्टर लक्ष्मी सिंह और सिपाही धीरज भारद्वाज ने आत्मसमर्पण कर दिया।

संरक्षण देने वालों पर होगी कार्रवाई
पुलिस के रडार पर फरार पुलिसकर्मियों के अलावा अब वे लोग भी हैं, जिन्होंने आरोपियों को संरक्षण दिया। एसएसपी गाजियाबाद सुधीर कुमार सिंह का कहना है कि फरार पुलिसकर्मियों को संरक्षण देने वाले लोग चिह्नित कर लिए गए हैं। जल्द ही मुकदमा दर्ज कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

यह है पूरा मामला
दरअसल साहिबाबाद साइट-4 औद्योगिक क्षेत्र स्थित सीएमएस इंफो सिस्टम कंपनी एटीएम में कैश लोड करने का काम करती है। कंपनी ने 22 अप्रैल को गाजियाबाद के लिंक रोड थाने में कंपनी के कैश कस्टोडियन एजेंट राजीव सचान के खिलाफ करीब 72.50 लाख रुपये गबन का मामला दर्ज कराया था, जो जांच में 3.50 करोड़ रुपये का निकला। गाजियाबाद के लिंक रोड थाने की तत्कालीन इंस्पेक्टर लक्ष्मी सिंह चौहान ने पुलिस टीम के साथ 24 सितंबर को राजीव सचान को साथी आमिर के साथ गिरफ्तार कर उनसे 1.15 करोड़ रुपये बरामद किए। जबकि थाने की बरामदगी फर्द में महज 45 लाख 81 हजार 500 रुपये की बरामदगी ही दिखाई। इस मामले में आईजी रेंज आलोक सिंह के निर्देश पर 25 सितंबर को इंस्पेक्टर लक्ष्मी सिंह चौहान, दरोगा नवीन कुमार और बच्चू सिंह, फराज खान, धीरज भारद्वाज, सौरभ शर्मा, सचिन कुमार सहित सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ 60-70 लाख रुपये गबन करने का मुकदमा दर्ज हुआ था।

मेरठ। बेगुनाहों को कानून का खौफ दिखाने वाली यूपी पुलिस ने भृष्टाचार की आरोपित इस्पेक्टर लक्ष्मी सिंह चौहान को 44 दिनों तक पूरी छूट दी। गिरफ्तार करने के बजाय गाजियाबाद पुलिस कागजों पर दबिश देती रही। कहीं से राहत न मिलने पर आखिरकार महिला इंस्पेक्टर को गुरुवार को अदालत में आत्मसमर्पण करना पड़ा। हालांकि इस दौरान इंस्पेक्टर कचहरी में मुस्कराती रहीं और बार-बार बोलती रहीं कि जल्दी करो, मुझे जेल भेजो। आरोप लगाने वाली पुलिस को अब कोर्ट में जवाब देंगे। सिपाही धीरज भारद्वाज को ढांढस बंधाती रहीं कि डरो मत, इंसाफ मिलेगा। जानकारी के मुताबिक इंस्पेक्टर लक्ष्मी सिंह समेत सभी आरोपी पुलिसकर्मियों ने सरेंडर अर्जी लगाई थी। लेकिन लक्ष्मी सिंह व सिपाही धीरज भारद्वाज ने ही आत्मसमर्पण किया। एडीजीसी सिराजुद्दीन अलवी ने बताया कि न्यायालय एडीजे/स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम इरफान कमर ने अन्य पुलिसकर्मियों की सरेंडर अर्जी को खारिज कर दिया है। भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पुलिस की भी किरकिरी हुई। गाजियाबाद पुलिस आरोपी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार करने के लिए दबिश देने के दावे करती रही। इस बीच इंस्पेक्टर ने मेरठ से लेकर हाईकोर्ट तक अग्रिम जमानत याचिका लेने की कोशिश की। लेकिन गंभीर आरोपों को देखते हुए न्यायालय ने कोई राहत नहीं दी और याचिका खारिज कर दी। एसएसपी गाजियाबाद ने फरार इंस्पेक्टर समेत पुलिसकर्मियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम कर उनके घर पर कुर्की वारंट चस्पा भी कराए। उसके अगले ही दिन गुरुवार को इंस्पेक्टर लक्ष्मी सिंह और सिपाही धीरज भारद्वाज ने आत्मसमर्पण कर दिया। संरक्षण देने वालों पर होगी कार्रवाई पुलिस के रडार पर फरार पुलिसकर्मियों के अलावा अब वे लोग भी हैं, जिन्होंने आरोपियों को संरक्षण दिया। एसएसपी गाजियाबाद सुधीर कुमार सिंह का कहना है कि फरार पुलिसकर्मियों को संरक्षण देने वाले लोग चिह्नित कर लिए गए हैं। जल्द ही मुकदमा दर्ज कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह है पूरा मामला दरअसल साहिबाबाद साइट-4 औद्योगिक क्षेत्र स्थित सीएमएस इंफो सिस्टम कंपनी एटीएम में कैश लोड करने का काम करती है। कंपनी ने 22 अप्रैल को गाजियाबाद के लिंक रोड थाने में कंपनी के कैश कस्टोडियन एजेंट राजीव सचान के खिलाफ करीब 72.50 लाख रुपये गबन का मामला दर्ज कराया था, जो जांच में 3.50 करोड़ रुपये का निकला। गाजियाबाद के लिंक रोड थाने की तत्कालीन इंस्पेक्टर लक्ष्मी सिंह चौहान ने पुलिस टीम के साथ 24 सितंबर को राजीव सचान को साथी आमिर के साथ गिरफ्तार कर उनसे 1.15 करोड़ रुपये बरामद किए। जबकि थाने की बरामदगी फर्द में महज 45 लाख 81 हजार 500 रुपये की बरामदगी ही दिखाई। इस मामले में आईजी रेंज आलोक सिंह के निर्देश पर 25 सितंबर को इंस्पेक्टर लक्ष्मी सिंह चौहान, दरोगा नवीन कुमार और बच्चू सिंह, फराज खान, धीरज भारद्वाज, सौरभ शर्मा, सचिन कुमार सहित सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ 60-70 लाख रुपये गबन करने का मुकदमा दर्ज हुआ था।