शनि अमावस्या 2018: 14 साल बाद बना शुभ योग, शनि प्रकोप से बचने के लिए करें ये काम

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शनि अमावस्या 2018: 14 साल बाद बना यह शुभ योग, शनि प्रकोप से बचने के लिए करें ये काम
लखनऊ। शनि अमावस्या 17 मार्च यानि शनिवार को है यह शनि देव को प्रसन्न करने का सबसे उत्तम दिन है। 14 साल बाद शनिश्चरी अमावस्या पर शुभ योग बना है शनिश्चरी अमावस्या को मोक्षदायिनी अमावस्या भी कहा जाता है। इससे पहले 20 मार्च 2004 में चैत्र मास में शनिश्चरी अमावस्या आई थी जोकि 2018 के बाद अब 2025 में ये योग पुन: बनेगा यानि आज से 7 साल बाद। इस शुभ योग में शनिदेव को प्रसन्न करना काफी आसान हो…

लखनऊ। शनि अमावस्या 17 मार्च यानि शनिवार को है यह शनि देव को प्रसन्न करने का सबसे उत्तम दिन है। 14 साल बाद शनिश्चरी अमावस्या पर शुभ योग बना है शनिश्चरी अमावस्या को मोक्षदायिनी अमावस्या भी कहा जाता है। इससे पहले 20 मार्च 2004 में चैत्र मास में शनिश्चरी अमावस्या आई थी जोकि 2018 के बाद अब 2025 में ये योग पुन: बनेगा यानि आज से 7 साल बाद। इस शुभ योग में शनिदेव को प्रसन्न करना काफी आसान हो जाता है। किसी भी तरह के शनि दोष, शनि की साढ़े साती और शनि की ढईया के प्रकोप से मुक्त होने के लिए इस शुभ योग में करें ये काम—

  • शनि अमावस्या पर काले रंग के वस्त्र धारण करें
  • तुलसी के 108 पत्ते लेकर उन पर श्री राम लिखें और पत्तों को एक सूत्र में पिरो कर माला बना कर श्री हरि विष्णु के गले में डालें।
  • अगर आप अमाव्या का व्रत नहीं कर रहे तो भी शनि देव का पूजन और तैलाभिषेक कर शनि की साढेसाती, ढैय्या और महादशा जनित संकट और आपदाओं से मुक्ति पा सकते हैं।
  • शनि देव की कृपा से मनुष्य को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।

इन चीजों का करें दान

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  • काले जूते या चप्पल
  • सवा किलो काले साबुत उड़द
  • सवा किलो काले तिल
  • सवा लीटर सरसों का तेल
  • एक चाकू
  • 8 काले गुलाब जामुनकाले या नीले फूल

शनि अमावस्या का शुभ मुहूर्त

17 मार्च 2018 को पड़ रही शनि अमावस्या के दिन शाम 6:13 बजे से शुरू होकर 7:13 तक शुभ मुहूर्त है। इस समय आप शनि पूजन कर शनि प्रकोप से मुक्त हो सकते हैं।

इन मंत्रो का करें जाप

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  • कोणस्थ: पिंगलो बभ्रु: कृष्णौ रौद्रोंतको यम:। सौरी: शनिश्चरो मंद:पिप्पलादेन संस्तुत:
  • नीलान्जन समाभासम् – रविपुत्रम यमाग्रजम। छाया मार्तण्ड सम्भूतम- तम नमामि शनैश्चरम
  • ॐ शं शनैश्चराय नम:
  • ॐ प्रां प्रीं प्रौं शं शनैश्चराय नम:

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