कल है शनि अमावस्या, इन मंत्रों के जाप से चमकेगी किस्मत

शनि अमावस्या ,shanidev
कल है शनि अमावस्या, इन मंत्रों के जाप से चमकेगी किस्मत

नई दिल्ली। कल यानि 11 अगस्त को इसबार शनि अमावस्या पड़ रही है और शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता हैं। यही वजह है कि भगवान शिव ने शनि देव को नवग्रहों में न्यायधीश का काम सौंपा है इसलिए अपनी दशा महादशा में और गोचर जिसे साढ़ेसाती और ढैय्या कहते हैं। ऐसे में व्यक्तियों को उनके कर्मों का फल मिलता हैं। कल शनि अमावस्या के साथ ही साल का आखिरी सूर्य ग्रहण भी पड़ रहा है इसलिए यह दिन और भी खास है। यह 10 साल बाद हो रहा है कि शनि अमावस्या शनिवार के दिन पड़ रही है। आज हम आपको कुछ शक्तिशाली मंत्र बताएंगे जिससे शनिदेव आपकी हर मनोकामना पूरी करेंगे।

Shanishachari Amavasya In Sawan :

पितृ दोष से मुक्ति का मंत्र

मान्यता है कि आप इस दिन शनि के बीज मंत्र ‘ओम प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:’ का जप करें और इसके बाद उड़द दाल की खिचड़ी दान करें हैं तो शनि और पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है

शनिदेव की कृपा के लिए मंत्र

ग्रहण के समय आप शनिदेव के वैदिक मंत्र ‘ओम शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शंयोरभि स्रवन्तु न:।।’ का जप करें। इस मंत्र के बाद तिल के तेल से बने पकवान का दान करें। इससे शनिदेव की आप पर कृपा बनी रहेगी।

शनिदोष से मुक्ति का मंत्र

ज्योतिषशास्त्र में शनि की दशा को कम करने के लिए शनि पत्नी के नाम की स्तुति जपना भी उपाय माना गया है। उनकी इस स्तुति के बाद आप शमी के पेड़ की भी पूजा कर सकते हैं। शनि के दोषों से मुक्ति मिलती है।

शनि पत्नी स्तुति

ध्वजिनी धामिनी चैव कंकाली कलहिप्रिया।
कण्टकी कलही चाथ तरंगी महिषी अजा।।

मनोकामना पूरी करने का मंत्र

शनैश्चरी अमावस्या के दिन शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए पौराणिक शनि मंत्र: ‘ओम ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।’ का जप करें। इससे शनिदेव महाराज आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी करेंगे।

साढ़ेसाती का प्रभाव कम करने का मंत्र

आप कुंडली में मौजूद साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम करने के लिए तांत्रिक शनि मंत्र: ‘ओम प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।’ का जप करें। साथ ही तेल, काला छाता, जूते-चप्पल, कंबल आदि दान करें। इससे ना सिर्फ साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होगा। बल्कि जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं होगी।

मंत्र के साथ करें यंत्र की पूजा

ग्रहण के समय आप ओम भूर्भुव: स्व: शन्नोदेवीरभि टये विद्महे नीलांजनाय धीमहि तन्नो शनि: प्रचोदयात्। मंत्र का जप करें और शनिदेव की कृपा के प्रात्र बनें। साथ ही मंदिर जाकर पूजा अर्चना करना संभव न हो तो घर में शनि यंत्र की स्थापना करें और पूजन करें।

नई दिल्ली। कल यानि 11 अगस्त को इसबार शनि अमावस्या पड़ रही है और शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता हैं। यही वजह है कि भगवान शिव ने शनि देव को नवग्रहों में न्यायधीश का काम सौंपा है इसलिए अपनी दशा महादशा में और गोचर जिसे साढ़ेसाती और ढैय्या कहते हैं। ऐसे में व्यक्तियों को उनके कर्मों का फल मिलता हैं। कल शनि अमावस्या के साथ ही साल का आखिरी सूर्य ग्रहण भी पड़ रहा है इसलिए यह दिन और भी खास है। यह 10 साल बाद हो रहा है कि शनि अमावस्या शनिवार के दिन पड़ रही है। आज हम आपको कुछ शक्तिशाली मंत्र बताएंगे जिससे शनिदेव आपकी हर मनोकामना पूरी करेंगे।पितृ दोष से मुक्ति का मंत्र मान्यता है कि आप इस दिन शनि के बीज मंत्र ‘ओम प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:’ का जप करें और इसके बाद उड़द दाल की खिचड़ी दान करें हैं तो शनि और पितृ दोषों से मुक्ति मिलती हैशनिदेव की कृपा के लिए मंत्रग्रहण के समय आप शनिदेव के वैदिक मंत्र ‘ओम शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शंयोरभि स्रवन्तु न:।।’ का जप करें। इस मंत्र के बाद तिल के तेल से बने पकवान का दान करें। इससे शनिदेव की आप पर कृपा बनी रहेगी।शनिदोष से मुक्ति का मंत्रज्योतिषशास्त्र में शनि की दशा को कम करने के लिए शनि पत्नी के नाम की स्तुति जपना भी उपाय माना गया है। उनकी इस स्तुति के बाद आप शमी के पेड़ की भी पूजा कर सकते हैं। शनि के दोषों से मुक्ति मिलती है।शनि पत्नी स्तुतिध्वजिनी धामिनी चैव कंकाली कलहिप्रिया। कण्टकी कलही चाथ तरंगी महिषी अजा।।मनोकामना पूरी करने का मंत्रशनैश्चरी अमावस्या के दिन शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए पौराणिक शनि मंत्र: ‘ओम ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।’ का जप करें। इससे शनिदेव महाराज आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी करेंगे।साढ़ेसाती का प्रभाव कम करने का मंत्रआप कुंडली में मौजूद साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम करने के लिए तांत्रिक शनि मंत्र: ‘ओम प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।’ का जप करें। साथ ही तेल, काला छाता, जूते-चप्पल, कंबल आदि दान करें। इससे ना सिर्फ साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होगा। बल्कि जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं होगी।मंत्र के साथ करें यंत्र की पूजाग्रहण के समय आप ओम भूर्भुव: स्व: शन्नोदेवीरभि टये विद्महे नीलांजनाय धीमहि तन्नो शनि: प्रचोदयात्। मंत्र का जप करें और शनिदेव की कृपा के प्रात्र बनें। साथ ही मंदिर जाकर पूजा अर्चना करना संभव न हो तो घर में शनि यंत्र की स्थापना करें और पूजन करें।