कल है शरद पूर्णिमा, जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि बारे में…

कल है शरद पूर्णिमा, जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि बारे में...
कल है शरद पूर्णिमा, जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि बारे में...

लखनऊ। हिन्दू धर्म में शरद पूर्णिमा का बेहद खास महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और इस दिन चंद्रमा धरती पर अमृत की वर्षा करता है। शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा, माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा के महत्व और पूजन विधि के बारे में…

Sharad Purnima 2019 Know The Significance Vidhi Date And Shubh Muhurt :

शरद पूर्णिमा का महत्व

मान्यता है कि जो विवाहित स्त्रियां इस दिन व्रत रखती हैं उन्हेंत संतान की प्राप्ति होती है। जो माताएं इस व्रत को करती हैं उनके बच्चे दीर्घायु होते हैं। अगर कुंवारी लड़कियां ये व्रत रखें तो उन्हें मनचाहा पति मिलता है।

कब है शरद पूर्णिमा?

अश्विन मास के शुक्ला पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है, इस बार यह 13 अक्टूबर, रविवार को है।

शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 13 अक्टू बर 2019 की रात 12 बजकर 36 मिनट से
पूर्णिमा तिथि समाप्तभ: 14 अक्टूूबर की रात 02 बजकर 38 मिनट तक
चंद्रोदय का समय: 13 अक्टूकबर 2019 की शाम 05 बजकर 26 मिनट

शरद पूर्णिमा व्रत विधि

  • पूर्णिमा के दिन सुबह में इष्ट देव का पूजन करना चाहिए।
  • इन्द्र और महालक्ष्मी जी का पूजन करके घी के दीपक जलाकर उसकी गन्ध पुष्प आदि से पूजा करनी चाहिए।
  • ब्राह्माणों को खीर का भोजन कराना चाहिए और उन्हें दान दक्षिणा प्रदान करनी चाहिए।
  • लक्ष्मी प्राप्ति के लिए इस व्रत को विशेष रुप से किया जाता है। इस दिन जागरण करने वालों की धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।
  • रात को चन्द्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही भोजन करना चाहिए।
  • मंदिर में खीर आदि दान करने का विधि-विधान है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चांद की चांदनी से अमृत बरसता है।
  • रात 12 बजे के बाद अपने परिजनों में खीर का प्रसाद बांटें।
लखनऊ। हिन्दू धर्म में शरद पूर्णिमा का बेहद खास महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और इस दिन चंद्रमा धरती पर अमृत की वर्षा करता है। शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा, माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा के महत्व और पूजन विधि के बारे में... शरद पूर्णिमा का महत्व मान्यता है कि जो विवाहित स्त्रियां इस दिन व्रत रखती हैं उन्हेंत संतान की प्राप्ति होती है। जो माताएं इस व्रत को करती हैं उनके बच्चे दीर्घायु होते हैं। अगर कुंवारी लड़कियां ये व्रत रखें तो उन्हें मनचाहा पति मिलता है। कब है शरद पूर्णिमा? अश्विन मास के शुक्ला पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है, इस बार यह 13 अक्टूबर, रविवार को है। शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 13 अक्टू बर 2019 की रात 12 बजकर 36 मिनट से पूर्णिमा तिथि समाप्तभ: 14 अक्टूूबर की रात 02 बजकर 38 मिनट तक चंद्रोदय का समय: 13 अक्टूकबर 2019 की शाम 05 बजकर 26 मिनट शरद पूर्णिमा व्रत विधि
  • पूर्णिमा के दिन सुबह में इष्ट देव का पूजन करना चाहिए।
  • इन्द्र और महालक्ष्मी जी का पूजन करके घी के दीपक जलाकर उसकी गन्ध पुष्प आदि से पूजा करनी चाहिए।
  • ब्राह्माणों को खीर का भोजन कराना चाहिए और उन्हें दान दक्षिणा प्रदान करनी चाहिए।
  • लक्ष्मी प्राप्ति के लिए इस व्रत को विशेष रुप से किया जाता है। इस दिन जागरण करने वालों की धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।
  • रात को चन्द्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही भोजन करना चाहिए।
  • मंदिर में खीर आदि दान करने का विधि-विधान है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चांद की चांदनी से अमृत बरसता है।
  • रात 12 बजे के बाद अपने परिजनों में खीर का प्रसाद बांटें।