पटना में नीतीश कुमार को चुनौती देने से पहले दिल्ली में शरद यादव का शक्ति प्रदर्शन

पटना में नीतीश कुमार को चुनौती देने से पहले दिल्ली में शरद यादव का शक्ति प्रदर्शन

नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद और जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव द्वारा बुलाए गए ‘सांझी विरासत बचाओं’ सम्मेलन में गुरुवार को विपक्ष के करीब दर्जन भर राजनीतिक दलों के नेताओं ने मंच सांझा करने का दावा किया जा रहा है। इस सम्मेलन की शुरुआत में कांग्रेस की ओर से गुलाम नवी आजाद, नेश्नल कांफ्रेंस के नेता फारुख अब्दुल्ला, बाम दलों के नेता के रूप में सीताराम येचुरी और डी राजा ने शिरकत की, जबकि समाजवादी पार्टी की ओर रामगोपाल यादव भी सम्मेलन का हिस्सा बने।

इस मौके पर बोल रहे शरद यादव ने कहा कि आज देश में बेचैनी का माहौल है। दलित और किसान अत्याचार से परेशान है। उन्होंने अपने सम्मेलन में किसी को नहीं बुलाया। फिर भी लोग हजारों की संख्या में उनके साथ जुड़ रहे हैं। यह सम्मेलन देश की सवा सौ करोड़ जनता की चिंता को दर्शाता है। ऐसे सम्मेलन देश भर में किए जाएंगे।

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सम्मेलन में पहुंचे गुलाम नवी आजाद ने अपना पक्ष रखते हुए शरद यादव की मनोदशा को जुबान देने का काम किया। उन्होंने कहा कि शरद यादव के साथ खड़ी जेडीयू ही असली जेडीयू है। नीतीश कुमार की जेडीयू बीजेपी की जेडीयू है। नीतीश का दावा ठीक नहीं है। आज देश में अंग्रेज भले ही नहीं हैं लेकिन उनके समर्थक जरूर हैं जिन्होंने अग्रेजों भारत छोड़ो आन्दोलन में हिस्सा नहीं लिया था। जो समय चल रहा है वह इमरजेंसी का बाप है। आज लोग सड़क पर बात करने से डर रहे हैं। उनके टॉयलेट में माइक्रोफोन लगा दिया गया है। ऐसे समय में शरद यादव जैसे नेता ने मंत्री पद ठुकरा दिया जिसके लिए वह बधाई के पात्र हैं।

फारुख अब्दुल्ला ने कश्मीर समस्या पर किया कटाक्ष—

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नेश्नल कांफ्रेंस के नेता फारुख अब्दुल्ला ने इस मंच से केन्द्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि पहले हमारी लड़ाई अंग्रेजों से थी लेकिन अब अपनों से है। खुद को हिन्दुस्तानी मुसलमान कहते हुए उन्हें फक्र होता है। लेकिन जो लोग जोड़ने की बात करते हैं वे बांटने में लगे हैं। पहले एक पाकिस्तान बना चुके हैं अब पाकिस्तानी बनाने में लगे हैं। हम से कहा जाता है कि हम बफादार नहीं हैं लेकिन हम कहते हैं कि आप दिलदार नहीं हैं। हम लोगों के पास 1947 में पाकिस्तान जाने का विकल्प था। लेकिन आज हमें पकिस्तानी कहा जा रहा है। हम पाकिस्तानी या अंग्रेजी मुसलमान नहीं हैं एक हिन्दुस्तानी मुसलमान हैं।

सांझी विरासत बचाओ सम्मेलन के जरिए शरद यादव अपनी मंशा पूरी करते नजर आ रहे हैं। कुछ बड़े नेताओं ने उनके मंच पर आकर नीतीश कुमार के खिलाफ उनकी लड़ाई में कुछ जान फूंक दी है। वह बिहार की सियासत में भले ही नीतीश कुमार के सामने न टिकते हों लेकिन उन्होंने स्वयं को पार्टी का राष्ट्रीय चेहरा साबित कर अपने समर्थकों का विश्वास जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। स्पष्ट शब्दों में कहा जाए तो वह 19 अगस्त को पटना में होने वाली जदयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी से पहले अपना शक्ति प्रदर्शन् करने में सफल रहे हैं। जिसके बाद 19 अगस्त को पटना में नीतीश की बैठक के विरोध में अपना गुस्सा दर्ज करवाने में सफल हो सकते हैं।

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