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शारदीय नवरात्र:माँ बनैलिया के दरबार से कोई भक्त नही लौटता खाली हाथ

By टीम पर्दाफाश 
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नौतनवां: भारतीय शास्त्रों व परंपराओं के अनुसार नवरात्र साल में दो बार आते हैं। चैत्र महीने में आने वाले नवरात्र वासंतिक नवरात्र कहलाते हैं। जबकि आश्विन मास शुक्ल प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्र शुरू होते हैं। नौ दिनों तक चलने वाले शारदीय नवरात्र में शक्ति या माता रानी की उपासना की जाती है। दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है।

शारदीय नवरात्र के मौके पर बुुधवार को माता बनैलिया मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। व्रतियों ने मां कूष्माण्डा का पूजा अर्चना किया । माँ बनैलिया समय माता भारत ही नही बल्कि नेपाल में भी बिख्यात है । मान्यता है कि इनके दर से कोई निराश नही लौटता है ।

बतादे की भोर से ही माँ बनैलिया के दरबार मे भक्तजनो को उनके दर्शन के लिए लम्बी तीन-तीन कतारे लगी रही  । महिला पुरुष सभी अपने कतार में लग कर जयकारे लगते रहे माता का दर्शन और माथा टेकने के लिए उत्सुक रहे । मन्दिर प्रंगण श्रद्धालुओं से भरा रहा हर तरफ मंत्र उचारण के शब्द गुज रहे थे । हवन कुंडा के घुप कपूर से उठ रहे धुंए बातावरण स्वच्छ बना रहे थे ।

माँ बनैलिया देवी मन्दिर का परिचय
पूर्वी उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमा को जोड़ने वाला नगर नौतनवा में वन देवी अर्थात मां बनैलिया के नाम से विख्यात मंदिर स्थित है। मंदिर के इतिहास के सम्बंध में बताया जाता है कि अज्ञातवास के दौरान राजा विराट के भवन से लौटते समय पाण्डवों ने मां वन शक्ति की यहां पर अराधना किया था। जिससे प्रसन्न होकर मां ने पिण्डी स्वरूप में पाण्डवों को दर्शन दिया। कालांतर में मां की पिण्डी खेतों के बीच समाहित हो गई। एक दिन खेत जोत रहे किसान केदार मिश्र को स्वप्न में मां ने कहा कि यहां पर मेरी पिण्डी खोजकर मेरे मंदिर का निर्माण करो। इसके बाद केदार मिश्र ने सन 1888 में यहां पर एक छोटे से मंदिर का निर्माण कराया। जो आज विशालकाय मंदिर के रूप में स्थापित हो चुका है। जिसकी स्थापना 20 जनवरी 1991 को विधि पूर्वक हुई। प्रतिवर्ष इस दिन को वार्षिकोत्सव के रूप में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। यहां पर आने वाले हर भक्त की इच्छा मां पूरा करती है। चूंकि मां को हाथी बहुत पसंद है, इसलिए इच्छा पूरी होने पर श्रद्धालु यहां पर हाथी की मूर्ति चढ़ाते हैं।

मंदिर का वास्तु
मंदिर का निर्माण वृताकार अरघा नुमा संरचना है, जिसके अंदर मां के नौ स्वरूपों को स्थापित किया गया है। केन्द्र में मां बनैलिया की भव्य प्रतिमा शोभायमान है। मंदिर वर्ताकार होने के कारण मां का परिक्रमा मंदिर के अंदर ही जाती है।

कैसे पहुंचे माँ के दरवार
माँ के मंदिर पहुंचने के लिए रेल एवं सड़क दोनो मार्गों से साधन उपलब्ध है। गोरखपुर से चलकर नौतनवा आने पर रिक्शा एवं आटो की मदद से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित मंदिर पर आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां पर देश के कोने-कोने यात्री आते है वही 5 किलो मीटर दूर पर स्तिथ मित्र राष्ट्र नेपाल से भी भारी संख्या में श्रद्धालु आते रहते हैं। मंदिर परिसर में तीर्थ यात्रियों के रात्रि भोजन,निवास की व्यवस्था भी है ।

संवाददाता-विजय चौरसिया

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