शशि थरूर बोले-सीएए के खिलाफ प्रस्ताव राजनीतिक कदम है, राज्यों की बमुश्किल ही कोई भूमिका

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शशि थरूर बोले-सीएए के खिलाफ प्रस्ताव राजनीतिक कदम है, राज्यों की बमुश्किल ही कोई भूमिका

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने का राज्यों का कदम राजनीति से प्रेरित है। नागरिकता देने में राज्यों की बमुश्किल ही कोई भूमिका है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और प्रस्तावित एनआरसी में राज्यों की अहम भूमिका होगी क्योंकि केंद्र के पास मानव संसाधन का अभाव है। ऐसे में उनके अधिकारी ही इस काम को पूरा करेंगे।

Shashi Tharoor Said Proposal Against Caa Is Political Move States Hardly Play Any Role :

शशि थरूर ने कहा कि यह एक राजनीतिक कदम अधिक है। नागरिकता संघीय सरकार ही देती है, कोई राज्य नागरिकता नहीं दे सकता। इसलिए इसे लागू करने या नहीं करने से उनका कोई संबंध नहीं है।शशि थरूर ने कहा कि राज्य प्रस्ताव पारित कर सकते हैं या अदालत जा सकते हैं लेकिन व्यावहारिक रूप से वे कुछ नहीं कर सकते हैं। राज्य सरकारें यह नहीं कह सकतीं कि वे सीएए को लागू नहीं करेंगी, वे यह कह सकती हैं कि वे एनपीआर-एनआरसी को लागू नहीं करेंगी क्योंकि इसमें उनकी अहम भूमिका होगी।

शशि थरूर के पार्टी सहयोगी कपिल सिब्बल ने पिछले सप्ताह यह कह कर बवाल मचा दिया था कि सीएए के क्रियान्वयन से कोई राज्य इनकार नहीं कर सकता क्योंकि संसद ने इसे पहले ही पारित कर दिया है। बाद में, उन्होंने इसे असंवैधानिक करार दिया और स्पष्ट किया कि उनके रुख में कोई बदलाव नहीं है। शशि थरूर ने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा सीएए पर रोक लगाने का आदेश नहीं देने से इसके खिलाफ प्रदर्शन कतई कमजोर नहीं हुए हैं। उन्होंने पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ गठित करने के शीर्ष अदालत के फैसले का स्वागत किया।

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने का राज्यों का कदम राजनीति से प्रेरित है। नागरिकता देने में राज्यों की बमुश्किल ही कोई भूमिका है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और प्रस्तावित एनआरसी में राज्यों की अहम भूमिका होगी क्योंकि केंद्र के पास मानव संसाधन का अभाव है। ऐसे में उनके अधिकारी ही इस काम को पूरा करेंगे। शशि थरूर ने कहा कि यह एक राजनीतिक कदम अधिक है। नागरिकता संघीय सरकार ही देती है, कोई राज्य नागरिकता नहीं दे सकता। इसलिए इसे लागू करने या नहीं करने से उनका कोई संबंध नहीं है।शशि थरूर ने कहा कि राज्य प्रस्ताव पारित कर सकते हैं या अदालत जा सकते हैं लेकिन व्यावहारिक रूप से वे कुछ नहीं कर सकते हैं। राज्य सरकारें यह नहीं कह सकतीं कि वे सीएए को लागू नहीं करेंगी, वे यह कह सकती हैं कि वे एनपीआर-एनआरसी को लागू नहीं करेंगी क्योंकि इसमें उनकी अहम भूमिका होगी। शशि थरूर के पार्टी सहयोगी कपिल सिब्बल ने पिछले सप्ताह यह कह कर बवाल मचा दिया था कि सीएए के क्रियान्वयन से कोई राज्य इनकार नहीं कर सकता क्योंकि संसद ने इसे पहले ही पारित कर दिया है। बाद में, उन्होंने इसे असंवैधानिक करार दिया और स्पष्ट किया कि उनके रुख में कोई बदलाव नहीं है। शशि थरूर ने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा सीएए पर रोक लगाने का आदेश नहीं देने से इसके खिलाफ प्रदर्शन कतई कमजोर नहीं हुए हैं। उन्होंने पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ गठित करने के शीर्ष अदालत के फैसले का स्वागत किया।