शीला दीक्षित ने इस एक्टर की फिल्म को 20 बार देख डाला, जाने क्यों

sheila dixit and shahrukh khan
शीला दीक्षित ने इस एक्टर की फिल्म को 20 बार देख डाला, जाने क्यों

मुंबई। कांग्रेस की पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित ने बीते शनिवार को अपनी आंखरी सांसे ली। राजनीति में सक्रिय रहने वाली शीला दीक्षित को सिर्फ राजनीतिक में ही नहीं बल्कि संगीत और फिल्मों में भी खूब रूचि रहती थी। शुरुआत से ही उन्हें पश्चिमी संगीत का बेहद शौक था। कई बार तो वह रेडियो पर अपने पसंदीदा गानों के प्रसारण होने का इंतेजार करती थीं। इसके अलावा उन्हें फिल्में देखना भी खूब शौक था। राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त रहने के बावजूद उन्होंने बॉलीवुड के एक अभिनेता की फिल्म को करीब 20 बार देखा था।

Sheila Dikshit Has Seen This Actors Film 20 Times Why Not Go :

पिछली साल प्रकाशित हुई अपनी आत्मकथा ‘सिटीजन दिल्ली: माई टाइम्स, माइ लाइफ’ में शीला दीक्षित ने इस बात का उल्लेख करते हुए बताया कि ‘उन्होंने अपनी जिंदगी में शाहरुख खान और काजोल की फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ को करीब 20 बार देखा था। अपनी जिंदगी और रूचियों के बारे में बताते हुए उन्होंने लिखा था, “कोई टेलीविजन नहीं था और रेडियो भी कुछ ही घंटों के लिए मिल पाता था। ऐसे में जीवन स्कूल किताबों को पढ़ने, कभी-कभार फिल्में देखने और गाने सुनने के इर्द-गिर्द ही घूमती रहती थी। शीला दीक्षित की आत्मकथा के मुताबिक उन्हें लेविस कैरोल की एलिस वंडरलैंड, थ्रू द लुकिंग ग्लास और शर्लोक होम्स की सीरीज काफी पसंद थी।

शीला दीक्षित के निजी ज़िंदगी की बात करें तो उनका जन्म 31 मार्च, 1938 को पंजाब के कपूरथला में हुआ था। उनका विवाह उन्नाव (यूपी) के आईएएस अधिकारी स्वर्गीय विनोद दीक्षित से हुआ था। विनोद कांग्रेस के बड़े नेता और बंगाल के पूर्व राज्यपाल स्वर्गीय उमाशंकर दीक्षित के बेटे थे। शीला दीक्षित का एक बेटे और एक बेटी है। उनके बेटे संदीप दीक्षित भी दिल्ली के सांसद रह चुके हैं। दरअसल, राजनीति में उनकी रुचि पढ़ाई के दौरान रुचि बनी थी। इसलिए उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस से इतिहास में मास्टर की डिग्री हासिल की थी।

मुंबई। कांग्रेस की पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित ने बीते शनिवार को अपनी आंखरी सांसे ली। राजनीति में सक्रिय रहने वाली शीला दीक्षित को सिर्फ राजनीतिक में ही नहीं बल्कि संगीत और फिल्मों में भी खूब रूचि रहती थी। शुरुआत से ही उन्हें पश्चिमी संगीत का बेहद शौक था। कई बार तो वह रेडियो पर अपने पसंदीदा गानों के प्रसारण होने का इंतेजार करती थीं। इसके अलावा उन्हें फिल्में देखना भी खूब शौक था। राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त रहने के बावजूद उन्होंने बॉलीवुड के एक अभिनेता की फिल्म को करीब 20 बार देखा था। पिछली साल प्रकाशित हुई अपनी आत्मकथा 'सिटीजन दिल्ली: माई टाइम्स, माइ लाइफ' में शीला दीक्षित ने इस बात का उल्लेख करते हुए बताया कि 'उन्होंने अपनी जिंदगी में शाहरुख खान और काजोल की फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' को करीब 20 बार देखा था। अपनी जिंदगी और रूचियों के बारे में बताते हुए उन्होंने लिखा था, "कोई टेलीविजन नहीं था और रेडियो भी कुछ ही घंटों के लिए मिल पाता था। ऐसे में जीवन स्कूल किताबों को पढ़ने, कभी-कभार फिल्में देखने और गाने सुनने के इर्द-गिर्द ही घूमती रहती थी। शीला दीक्षित की आत्मकथा के मुताबिक उन्हें लेविस कैरोल की एलिस वंडरलैंड, थ्रू द लुकिंग ग्लास और शर्लोक होम्स की सीरीज काफी पसंद थी। शीला दीक्षित के निजी ज़िंदगी की बात करें तो उनका जन्म 31 मार्च, 1938 को पंजाब के कपूरथला में हुआ था। उनका विवाह उन्नाव (यूपी) के आईएएस अधिकारी स्वर्गीय विनोद दीक्षित से हुआ था। विनोद कांग्रेस के बड़े नेता और बंगाल के पूर्व राज्यपाल स्वर्गीय उमाशंकर दीक्षित के बेटे थे। शीला दीक्षित का एक बेटे और एक बेटी है। उनके बेटे संदीप दीक्षित भी दिल्ली के सांसद रह चुके हैं। दरअसल, राजनीति में उनकी रुचि पढ़ाई के दौरान रुचि बनी थी। इसलिए उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस से इतिहास में मास्टर की डिग्री हासिल की थी।