शीला दीक्षित का पार्थिव शरीर पहुंचा उनके घर, जानिए उनके बारे में कुछ रोचक बातें

sheila dixit
शीला दीक्षित का पार्थिव शरीर पहुंचा उनके घर, जानिए उनके बारे में कुछ रोचक बातें

नई दिल्ली। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित का शनिवार दोपहर निधन हो गया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता शीला दीक्षित का निधन हो गया है। शनिवार की सुबह अचानक उन्हे उल्टियां होने लगी तो परिजनों ने उन्हे एस्कॉर्ट्स अस्पताल में भर्ती कराया था। उनके इलाज में लगे डॉक्टर अशोक सेठ के मुताबिक, दोपहर 3.15 बजे शीला दीक्षित को दिल का दौरा पड़ा। उन्हे तुरन्त वेंटीलेटर पर रखा गया और थोड़ी ही देर बाद उनकी मौत हो गई।

Sheila Dikshits Body Has Reached Her Home Know Some Interesting Things About Her :

बता दें कि शनिवार शाम 6 बजे से निजामुद्दीन स्थित घर पर पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन शुरु हुए और कल दोपहर ढाई बजे निगम बोध घाट पर उनका अंतिम संस्कार होगा। शीला दीक्षित कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेता थीं और 1998 से 2013 तक दिल्ली की मुख्यमंत्री थीं। वो लगातार तीन बाद मुख्यमंत्री रहने वाली देश की पहली महिला थी।

शीला दीक्षित का जन्म 31 मार्च, 1938 को पंजाब के कपूरथला में हुआ था। जिसके बाद उनकी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के जीसस एंड मेरी कॉन्वेंट स्कूल में हुई। जिसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस से इतिहास में मास्टर डिग्री हासिल की थी। बता दें कि उनका विवाह उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के रहने वाले आईएएस ​अधिकारी विनोद दीक्षित से हुआ था। विनोद कांग्रेस के बड़े नेता और बंगाल के पूर्व राज्यपाल स्वर्गीय उमाशंकर दीक्षित के बेटे थे। उनके दो बेटे हैं।

पंद्रह वर्ष की उम्र में अकेले पहुंची थी प्रधानमंत्री आवास

बताया जाता है कि शीला दीक्षित जब मात्र पंद्रह साल की थीं, तो उन्होने एक दिन प्रधानमंत्री से मिलने के बारे में सोंचा। तब प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से मिलने उनके ‘तीनमूर्ति’ वाले निवास के लिए निकल पड़ी। वो ‘डूप्ले लेन’ के अपने घर से निकलीं और पैदल ही चलते हुए ‘तीनमूर्ति भवन’ पहुंच गईं। जहां खड़े सुरक्षाकर्मी ने उनसे पूछा कि किससे मिलने जा रही थी, इस पर उन्होने जवाब दिया कि पंडित जी से। सुरक्षाकर्मी ने उन्हे अंदर जाने दिया। उसी समय जवाहरलाल नेहरू अपनी सफेद ‘एंबेसडर’ कार पर सवार हो कर अपने निवास के गेट से बाहर निकल रहे थे। शीला ने जैसे ही उन्हे देखा तो हाथ हिलाया, इस पर उन्होंने भी हाथ हिला कर उनका जवाब दिया।

झगड़ा सुलझाने के दौरान ही मिला था जीवनसा​थी

शीला दीक्षित दिल्ली यूनिवर्सिटी से प्राचीन इतिहास की पढ़ाई कर रही थी। तभी उनकी मुलाकात विनोद दीक्षित से हुई जो उस समय कांग्रेस के बड़े नेता उमाशंकर दीक्षित के इकलौते बेटे थे। शीला दीक्षित अक्सर कहा करती थीं कि “हम इतिहास की ‘एमए’ क्लास में साथ साथ थे। मुझे वो कुछ ज्यादा अच्छे नहीं लगे, क्योकि उनके अंदर थोड़ा अक्खड़पन था। उन्होंने बताया, “एक बार हमारे कॉमन दोस्तों में आपस में गलतफहमी हो गई और मामले को सुलझाने के लिए हम एक-दूसरे के नजदीक जरूर आ गए।”

नई दिल्ली। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित का शनिवार दोपहर निधन हो गया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता शीला दीक्षित का निधन हो गया है। शनिवार की सुबह अचानक उन्हे उल्टियां होने लगी तो परिजनों ने उन्हे एस्कॉर्ट्स अस्पताल में भर्ती कराया था। उनके इलाज में लगे डॉक्टर अशोक सेठ के मुताबिक, दोपहर 3.15 बजे शीला दीक्षित को दिल का दौरा पड़ा। उन्हे तुरन्त वेंटीलेटर पर रखा गया और थोड़ी ही देर बाद उनकी मौत हो गई। बता दें कि शनिवार शाम 6 बजे से निजामुद्दीन स्थित घर पर पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन शुरु हुए और कल दोपहर ढाई बजे निगम बोध घाट पर उनका अंतिम संस्कार होगा। शीला दीक्षित कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेता थीं और 1998 से 2013 तक दिल्ली की मुख्यमंत्री थीं। वो लगातार तीन बाद मुख्यमंत्री रहने वाली देश की पहली महिला थी। शीला दीक्षित का जन्म 31 मार्च, 1938 को पंजाब के कपूरथला में हुआ था। जिसके बाद उनकी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के जीसस एंड मेरी कॉन्वेंट स्कूल में हुई। जिसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस से इतिहास में मास्टर डिग्री हासिल की थी। बता दें कि उनका विवाह उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के रहने वाले आईएएस ​अधिकारी विनोद दीक्षित से हुआ था। विनोद कांग्रेस के बड़े नेता और बंगाल के पूर्व राज्यपाल स्वर्गीय उमाशंकर दीक्षित के बेटे थे। उनके दो बेटे हैं।

पंद्रह वर्ष की उम्र में अकेले पहुंची थी प्रधानमंत्री आवास

बताया जाता है कि शीला दीक्षित जब मात्र पंद्रह साल की थीं, तो उन्होने एक दिन प्रधानमंत्री से मिलने के बारे में सोंचा। तब प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से मिलने उनके 'तीनमूर्ति' वाले निवास के लिए निकल पड़ी। वो 'डूप्ले लेन' के अपने घर से निकलीं और पैदल ही चलते हुए 'तीनमूर्ति भवन' पहुंच गईं। जहां खड़े सुरक्षाकर्मी ने उनसे पूछा कि किससे मिलने जा रही थी, इस पर उन्होने जवाब दिया कि पंडित जी से। सुरक्षाकर्मी ने उन्हे अंदर जाने दिया। उसी समय जवाहरलाल नेहरू अपनी सफेद 'एंबेसडर' कार पर सवार हो कर अपने निवास के गेट से बाहर निकल रहे थे। शीला ने जैसे ही उन्हे देखा तो हाथ हिलाया, इस पर उन्होंने भी हाथ हिला कर उनका जवाब दिया।

झगड़ा सुलझाने के दौरान ही मिला था जीवनसा​थी

शीला दीक्षित दिल्ली यूनिवर्सिटी से प्राचीन इतिहास की पढ़ाई कर रही थी। तभी उनकी मुलाकात विनोद दीक्षित से हुई जो उस समय कांग्रेस के बड़े नेता उमाशंकर दीक्षित के इकलौते बेटे थे। शीला दीक्षित अक्सर कहा करती थीं कि "हम इतिहास की 'एमए' क्लास में साथ साथ थे। मुझे वो कुछ ज्यादा अच्छे नहीं लगे, क्योकि उनके अंदर थोड़ा अक्खड़पन था। उन्होंने बताया, "एक बार हमारे कॉमन दोस्तों में आपस में गलतफहमी हो गई और मामले को सुलझाने के लिए हम एक-दूसरे के नजदीक जरूर आ गए।''