इलाहाबाद के बाद अब पहाड़ों की रानी ‘शिमला’ का नाम बदलने की तैयारी, ये होगा नाम

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इलाहाबाद के बाद अब पहाड़ों की रानी 'शिमला' का नाम बदलने की तैयारी, ये होगा नाम

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर का नाम बदलकर प्रयागराज करने के बाद अब पूरे देश में शहरों के नाम बदलने की कवायद काफी तेज हो गयी है। इस कड़ी में अब नया नाम पहाड़ों की रानी शिमला भी शामिल हो गया है। राज्य में शिमला का नाम बदलकर ‘श्यामला’ करने को लेकर बाकायदा अभियान शुरू हो गया है। खबर है कि हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य की राजधानी शिमला का नाम बदलने पर विचार भी कर रही है।

Shimla Could Be Renamed As Shyamala Himachal Govt Is Planning To Replace :

भाजपा नेता एवं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों के पौराणिक आधार पर नाम थे, उन नामों को फिर रखने में कोई बुराई नहीं है। शिमला का नाम श्यामला करने को लेकर जारी बहस के बारे में उन्होंने कहा कि इसके बारे में अगर लोगों की राय बनती है, तब इस पर विचार करने में कोई बुराई नहीं है।

बताते चलें कि विश्व हिंदू परिषद काफी लंबे समय से शिमला का नाम बदलवाने की जुगत में है। साल 2016 में उसकी मांग को तत्कालीन वीरभद्र सिंह की सरकार ने ये कहकर खारिज कर दिया था कि शिमला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना जाने वाला टूरिस्ट डेस्टिनेशन है। विश्व हिंदू परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अमन पुरी ने कहा कि गुलामी शारीरिक, मानसिक या सांस्कृतिक हो सकती है। शोषकों द्वारा दिए गए नामों को ढोहना मानसिक गुलामी का प्रतीक है। आजादी के बाद देश में कई ब्रिटिश पहचान को खत्म किया गया, लेकिन हिमाचल में कई नाम उसी वक्त से चले आ रहे हैं।

इसके अलावा शिमला में कई जगहों के नाम भी बदलवाने की बात कही गई है। यहां के टूरिज्म डिपार्टमेंट की ओर से चलाए जाने वाले होटल पीटरहॉफ का नाम वाल्मीकि के नाम पर, डलहौजी का नाम सुभाष चंद्र बोस के नाम पर, नूरपुर का नाम 1857 के स्वतंत्रता सेनानी राम सिंह पटनिया के नाम पर रखने की मांग की जाती रही है।

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर का नाम बदलकर प्रयागराज करने के बाद अब पूरे देश में शहरों के नाम बदलने की कवायद काफी तेज हो गयी है। इस कड़ी में अब नया नाम पहाड़ों की रानी शिमला भी शामिल हो गया है। राज्य में शिमला का नाम बदलकर ‘श्यामला' करने को लेकर बाकायदा अभियान शुरू हो गया है। खबर है कि हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य की राजधानी शिमला का नाम बदलने पर विचार भी कर रही है। भाजपा नेता एवं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों के पौराणिक आधार पर नाम थे, उन नामों को फिर रखने में कोई बुराई नहीं है। शिमला का नाम श्यामला करने को लेकर जारी बहस के बारे में उन्होंने कहा कि इसके बारे में अगर लोगों की राय बनती है, तब इस पर विचार करने में कोई बुराई नहीं है। बताते चलें कि विश्व हिंदू परिषद काफी लंबे समय से शिमला का नाम बदलवाने की जुगत में है। साल 2016 में उसकी मांग को तत्कालीन वीरभद्र सिंह की सरकार ने ये कहकर खारिज कर दिया था कि शिमला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना जाने वाला टूरिस्ट डेस्टिनेशन है। विश्व हिंदू परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अमन पुरी ने कहा कि गुलामी शारीरिक, मानसिक या सांस्कृतिक हो सकती है। शोषकों द्वारा दिए गए नामों को ढोहना मानसिक गुलामी का प्रतीक है। आजादी के बाद देश में कई ब्रिटिश पहचान को खत्म किया गया, लेकिन हिमाचल में कई नाम उसी वक्त से चले आ रहे हैं। इसके अलावा शिमला में कई जगहों के नाम भी बदलवाने की बात कही गई है। यहां के टूरिज्म डिपार्टमेंट की ओर से चलाए जाने वाले होटल पीटरहॉफ का नाम वाल्मीकि के नाम पर, डलहौजी का नाम सुभाष चंद्र बोस के नाम पर, नूरपुर का नाम 1857 के स्वतंत्रता सेनानी राम सिंह पटनिया के नाम पर रखने की मांग की जाती रही है।