शिवसेना का दावा-दिसम्बर के पहले हफ्ते में बनायेंगे सरकार, NCP, कांग्रेस ने फिर साधी चुप्पी

NCP, Congress again remain silent
शिवसेना का दावा-दिसम्बर के पहले हफ्ते में बनायेंगे सरकार, NCP, कांग्रेस ने फिर साधी चुप्पी

मुम्बई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के आये नतीजों के बाद से सरकार बनाने को लेकर खींचातानी अभी भी जारी है। तय समय तक जब कोई पार्टी बहुमत नही साबित कर पायी तो महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। शिवसेना ने राष्ट्रपति शासन लगने से पहले ही कांग्रेस व एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा किया था लेकिन राष्ट्रपति शासन लगने के इतने दिनो बाद भी अभी तक तीनो पार्टियों के बीच बातचीत चल रही है। जहां संजय राउत का दावा है कि दिसम्बर के पहले हफ्ते तक वो सरकार बना लेंगे वहीं अब एनसीपी और कांग्रेस की तरफ से गोलमोल बयान आ रहे हैं।

Shiv Sena Claims Will Form Government In First Week Of December Ncp Congress Again Remain Silent :

 

कल एनसीपी प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस की अध्यक्षा सोनिया गांधी के बीच एक बैठक होनी थी, बैठक के पहले ये अनुमान लगाया गया था कि बैठक के बाद सरकार गठन को लेकर कोई फैसला लिया जा सकता है। लेकिन बैठक के तुरन्त बाद जब शरद पवार ने ये बयान दिया कि 50 मिनट की बैठक में सरकार गठन को लेकर कोई बातचीत ही नही हुई तो शिवसेना भी सकते में आ गया। शरद पवार ने यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव में उनका अन्य पार्टियों के साथ भी समझौता हुआ था इसलिए अभी उन पार्टियों से भी बात करना है।

शरद पवार के बयान के बाद शिवसेना के साथ साथ भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ता भी भ्रम में आ गये कि आखिर सरकार बनाने के दावे के बाद ऐसे बयान क्यों दिये जा रहे हैं। शिवसेना के एक विधायक ने भी एक न्यूज एजेन्सी से कहा ​है कि एनसीपी के साथ जाने से पहले शिवसेना को 10 बार विचार करना चाहिए। वहीं आज इसी मामले में एनसीपी और कांग्रेस के नेताओं की बैठक होनी थी लेकिन वो बैठक भी टाल दी गया। कहीं न कहीं शुरूवात से कांग्रेस अपना खेल परदे के पीछे से खेल रही है, उसने शिवसेना से कोई भी बात खुद से नही की, हर बार एनसीपी को ही आगे लाकर अपना रूख जाहिर किया।

एनसीपी और कांग्रेस के रूख के बाद अब यह भी अटकले लगाई जा रही हैं कि बीजेपी और शिवसेना अगर एकबार बातचीत कर ले तो दोनो की ​एक बार फिर से गठबन्धन की सरकार बन सकती है। शिवसेना प्रवक्‍ता संजय राउत ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा, ‘अगर जिंदगी में कुछ पाना हो तो तरीके बदलो इरादे नहीं… जय महाराष्‍ट्र।’ उनके ट्वीट से ये बात साफ जाहिर हो रही है कि शिवसेना सरकार बनाने के लिए हर तरह के विकल्‍प पर कदम बढ़ाने को तैयार है। इससे पहले भी संजय राउत बोल चुके हैं कि ‘सरकार बनाने की जिम्मेदारी शिवसेना की नहीं थी। यह जिनकी जिम्मेदारी थी, वे भाग निकले हैं। लेकिन मुझे भरोसा है कि हम जल्दी ही सरकार बना लेंगे।’

बैठक के बाद शरद पवार ने ट्वीट भी किया जिसमें उन्होने लिखा, ‘नई दिल्ली में आज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधीजी से भेंट कर महाराष्ट्र की राजनीतिक परिस्थितियों के बारे में चर्चा की। आनेवाले समय में महाराष्ट्र की राजनितिक गतीविधियों पर हमारी नजर रहेगी। महागठबंधन के मित्र पक्षों को विश्वास में लेकर हम निर्णय करेंगे।’ उनका साफतौर पर कहना था कि इस बैठक में शिवसेना के साथ सरकार बनाने पर कोई बातचीत ही नही हुई। अब ऐसे में कहीं न कहीं शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस के बीच फंसती नजर आ रही है।

मुम्बई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के आये नतीजों के बाद से सरकार बनाने को लेकर खींचातानी अभी भी जारी है। तय समय तक जब कोई पार्टी बहुमत नही साबित कर पायी तो महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। शिवसेना ने राष्ट्रपति शासन लगने से पहले ही कांग्रेस व एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा किया था लेकिन राष्ट्रपति शासन लगने के इतने दिनो बाद भी अभी तक तीनो पार्टियों के बीच बातचीत चल रही है। जहां संजय राउत का दावा है कि दिसम्बर के पहले हफ्ते तक वो सरकार बना लेंगे वहीं अब एनसीपी और कांग्रेस की तरफ से गोलमोल बयान आ रहे हैं।   कल एनसीपी प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस की अध्यक्षा सोनिया गांधी के बीच एक बैठक होनी थी, बैठक के पहले ये अनुमान लगाया गया था कि बैठक के बाद सरकार गठन को लेकर कोई फैसला लिया जा सकता है। लेकिन बैठक के तुरन्त बाद जब शरद पवार ने ये बयान दिया कि 50 मिनट की बैठक में सरकार गठन को लेकर कोई बातचीत ही नही हुई तो शिवसेना भी सकते में आ गया। शरद पवार ने यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव में उनका अन्य पार्टियों के साथ भी समझौता हुआ था इसलिए अभी उन पार्टियों से भी बात करना है। शरद पवार के बयान के बाद शिवसेना के साथ साथ भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ता भी भ्रम में आ गये कि आखिर सरकार बनाने के दावे के बाद ऐसे बयान क्यों दिये जा रहे हैं। शिवसेना के एक विधायक ने भी एक न्यूज एजेन्सी से कहा ​है कि एनसीपी के साथ जाने से पहले शिवसेना को 10 बार विचार करना चाहिए। वहीं आज इसी मामले में एनसीपी और कांग्रेस के नेताओं की बैठक होनी थी लेकिन वो बैठक भी टाल दी गया। कहीं न कहीं शुरूवात से कांग्रेस अपना खेल परदे के पीछे से खेल रही है, उसने शिवसेना से कोई भी बात खुद से नही की, हर बार एनसीपी को ही आगे लाकर अपना रूख जाहिर किया। एनसीपी और कांग्रेस के रूख के बाद अब यह भी अटकले लगाई जा रही हैं कि बीजेपी और शिवसेना अगर एकबार बातचीत कर ले तो दोनो की ​एक बार फिर से गठबन्धन की सरकार बन सकती है। शिवसेना प्रवक्‍ता संजय राउत ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा, 'अगर जिंदगी में कुछ पाना हो तो तरीके बदलो इरादे नहीं... जय महाराष्‍ट्र।' उनके ट्वीट से ये बात साफ जाहिर हो रही है कि शिवसेना सरकार बनाने के लिए हर तरह के विकल्‍प पर कदम बढ़ाने को तैयार है। इससे पहले भी संजय राउत बोल चुके हैं कि 'सरकार बनाने की जिम्मेदारी शिवसेना की नहीं थी। यह जिनकी जिम्मेदारी थी, वे भाग निकले हैं। लेकिन मुझे भरोसा है कि हम जल्दी ही सरकार बना लेंगे।' बैठक के बाद शरद पवार ने ट्वीट भी किया जिसमें उन्होने लिखा, 'नई दिल्ली में आज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधीजी से भेंट कर महाराष्ट्र की राजनीतिक परिस्थितियों के बारे में चर्चा की। आनेवाले समय में महाराष्ट्र की राजनितिक गतीविधियों पर हमारी नजर रहेगी। महागठबंधन के मित्र पक्षों को विश्वास में लेकर हम निर्णय करेंगे।' उनका साफतौर पर कहना था कि इस बैठक में शिवसेना के साथ सरकार बनाने पर कोई बातचीत ही नही हुई। अब ऐसे में कहीं न कहीं शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस के बीच फंसती नजर आ रही है।