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शिवसेना ने महाराष्ट्र में सीट बंटवारे को भारत-पाक बंटवारे से भी भयंकर बताया

Shiv Sena Termed Seat Sharing In Maharashtra Even More Terrible Than Indo Pak Partition

By बलराम सिंह 
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मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए सत्तारूढ़ भाजपा-शिवसेना के बीच सीट बंटवारे को लेकर तकरार बढ़ती जा रही है। शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र में 288 सीटों का बंटवारा भारत और पाकिस्तान के बंटवारे से भी भयंकर है। सरकार की बजाय अगर हम विपक्ष में होते तो आज की तस्वीर कुछ और होती।

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बता दें कि महाराष्ट्र में चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। 21 अक्टूबर को प्रदेश की 288 विधानसभा सीटों पर होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के बीच सीटों का बंटवारा अभी तक नहीं हो पाया है। दोनों पार्टियों के बीच सीटों के बंटवारे पर पेच फंस गया है। शिवसेना ने आज अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में सीटों और प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा हो सकती है। वहीं शिवसेना की बैठक के साथ ही बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। इस दौरान सीटों के बंटवारे का ऐलान भी आज हो सकता है।

दरअसल महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियां ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, लिहाजा सीट बंटवारे पर अबतक सहमति नहीं हो पाई है। शिवसेना नेता संजय राउत ने सीट बंटवारे से जुड़ी परेशानियों को जाहिर करते हुए कहा कि ये बंटवारा भारत-पाकिस्तान के बंटवारे से भी भयंकर है।

जानकारी के मुताबिक शिवसेना अपने लिए कम से कम 130 सीटें चाहती है, वहीं आरपीआई के प्रमुख रामदास अठावले भी अपनी पार्टी के लिए 10 सीटें चाहते हैं।
मौजूदा समय 288 सदस्यों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में बीजेपी के पास 122 सीटें हैं, वहीं शिवसेना के पास 63 सीटें हैं। महाराष्ट्र बीजेपी दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे के ऐसे सूत्र पर समझौता चाहती है, जिसपर भाजपा के पास 122 सीटें बनी रहें और शिवसेना के पास उसके हिस्से की 63 सीटें रहें। शेष सीटों में से कुछ सीटें रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया व गठबंधन अन्य दलों को देने के बाद आपस में बराबर बांट ली जाएं।

शिवसेना की महात्वाकांक्षा से इतर बीजेपी ज्यादा से ज्यादा सीटों पर खुद चुनाव लड़ना चाहती है. दरअसल बीजेपी राज्य में अपनी पकड़ अब किसी भी हालत में खत्म नहीं करना चाहती है। इसी वजह से सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों में पेच फंसा हुआ है। 2019 लोकसभा चुनाव से पहले भी बीजेपी और शिवसेना के बीच सीटों के बंटवारे पर किचकिच हुई थी। इस वजह से दोनों दलों के बीच गठबंधन में भी देरी हुई थी।

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