शिवपाल को बनाया गया बलि का बकरा

लखनऊ: बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने समाजवादी परिवार में हुई आपसी तकरार को ड्रामेबाजी बताया है। उन्होंने कहा कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी हार का ठीकरा पुत्र व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सिर पर फूटने से बचाने के लिये सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने शिवपाल सिंह यादव को बलि का बकरा बनाकर प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। मायावती ने कहा कि सपा परिवार में छह दिन तक ड्रामा चला, जिसका खमियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ा। प्रदेश में सारे कामकाज ठप पड़े रहे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शीघ्र होने वाले विधानसभा चुनाव में सपा की होने वाली करारी हार का ठीकरा अपने पुत्र के सर पर फूटने से बचाने के लिये एक सोची-समझी रणनीति के तहत मुलायम ने अपने भाई शिवपाल सिंह यादव को प्रदेश सपा का अध्यक्ष बना दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिये किया गया, ताकि कानून-व्यवस्था के मामले में सपा सरकार के बुरी तरह से विफल साबित होने के बाद अपने पुत्र की इमेज को और भी ज्यादा खराब होने से थोड़ा बचाया जा सके।




उन्होंने कहा कि प्रदेश में सत्तारूढ़ सपा और परिवार में अपने पुत्र मुख्यमंत्री को पूरी तरह से स्थापित करने के लिये पिछले दिनों मुलायम द्वारा एक सोची समझी रणनीति के तहत की गयी नाटकबाजी का पटाक्षेप जनता के सामने हो गया है। इसकी स्क्रिप्ट पहले तैयार की गयी थी। उन्होंने कहा कि सपा परिवार और पार्टी में घमासान काफी लम्बे समय से चल रहा है। इस बार ऐन विधानसभा चुनाव से पहले पुत्र मोह में यह नाटक रचा गया। पुत्र को पार्टी में अपरहैंड दिलाने तथा चुनाव में हार की जिम्मेदारी से बचाने के लिये कवच तैयार किया गया है। सारी नाटकबाजी से प्रदेश की शांति, व्यवस्था और विकास का काम प्रभावित हुआ। प्रदेश में अराजकता व जंगलराज को बढ़ावा मिला।मायावती ने रविवार को यहां जारी बयान में कहा कि सपा परिवार में लगातार चलने वाली पारिवारिक कलह और वर्चस्व की लड़ाई सपा मुखिया मुलायम के पुत्र मोह का ही परिणाम है।

यादव ने अपने पुत्र को प्रश्रय दिया और पार्टी का टिकट बांटने का लगभग एकाधिकार भी सौंप दिया। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने खनन में व्यापक भ्रष्टाचार व उसमें लिप्त बड़े लोगों के मामले की जांच सीबीआई को सौंपी है। इस सीबीआई जांच को रुकवाने के लिये प्रदेश सरकार द्वारा एड़ी-चोटी का जोर लगाया गया। बसपा अध्यक्ष ने कहा कि इससे पहले भी ‘‘अंसारी भाइयों’ की पार्टी कौमी एकता दल के विलय को लेकर भी सपा प्रमुख ने पुत्रमोह का ही परिचय देते हुये पहले उसका बड़े तामझाम के साथ पार्टी में विलय कराया। अपने पुत्र की इमेज को सहारा देने के लिये उनसे एक वरिष्ठ मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करवाकर व पार्टी में दबाव बनवा कर फिर ‘‘अंसारी भाइयों’ को बेइज्जत करते हुये उस विलय को रद्द करवा दिया। मायावती ने कहा कि इसके साथ ही सपा सरकार के मुखिया द्वारा खनन मामले में मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को पहले बर्खास्त किया गया और अब फिर उन्हें मंत्रिमंडल में वापस लिया जा रहा है, इसका क्या मतलब है।




यदि मंत्री ईमानदार हैं, तो उन्हें फिर क्यों हटाया गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव से लोक निर्माण विभाग लेकर अपने पास रख लिया। इसमें कोई बड़ी साजिश है। बसपा अध्यक्ष ने केन्द्र सरकार पर भी हमला बोलते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण में भाजपा चुप्पी साधे रही, इससे बड़ी हैरानी हुई। भाजपा को प्रदेश ने 73 सांसद दिये हैं। यहां की जनता संकट के दौर से गुजर रही है और भाजपा का चुप हो जाना जनता को समझना होगा कि आखिर खेल क्या है।

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