शिवपाल ने रामगोपाल के सगे भांजे अरविन्द यादव को किया पार्टी से बाहर




लखनऊ। यूपी में 6 दिन चले चाचा—भतीजे के पॉलिटिकल ड्रामे के बाद रविवार का दिन भी खास रहा। यूपी सपा के जिस प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर सीएम अ​खिलेश और चाचा शिवपाल के बीच तलवारें खिंची थी, वही पद आज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव के करीबियों पर भारी पड़ गया। पार्टी कार्यालय पहुंचे शिवपाल यादव ने अपने पद की ताकत का प्रयोग करते हुए रामगोपाल यादव ये भांजे और विधान परिषद सदस्य अरविन्द यादव और इटावा के प्रधान चंदगीराम को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

सूत्रों की माने तो पिछले दिनों हुए विवाद की जड़ में अमर सिंह का नाम उछालने वाले रामगोपाल यादव भी कहीं न कहीं पूरे ड्रामे के सूत्रधार थे। वे एक ओर शिवपाल सिंह के करीबी अमर​ सिंह से अपनी पुरानी खुन्नस निकाल रहे थे तो दूसरी ओर शिवपाल और अखिलेश के बीच मौजूद वैचारिक मतभेद को भी हवा दे रहे थे। इस बात की जानकारी शिवपाल यादव को पहले से थी लेकिन वह इस पर कोई मौखिक प्रतिक्रिया देने से बचते आ रहे थे, जिसकी वजह रामगोपाल और शिवपाल के बीच का चचेरे भाई होने का रिश्ता था।



शिवपाल ने रविवार को रामगोपाल यादव के सगे भांजे अ​रविन्द यादव को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाकर यह संदेश दे दिया है कि वे जानते सब है, लेकिन रिश्तों की मर्यादा बनाए रखने के लिए शांत थे। शिवपाल ने अ​रविन्द यादव पर की कार्रवाई को अनुशासनात्मक करार दिया है। जिसमें उन पर जमीनों के अवैध कब्जे और अवैध शराब के करोबार में संलिप्तता को कारण बताया गया है। वहीं चंदगीराम पर भी अनुशासनहीनता और पार्टी लाइन से हटकर आचरण के चलते कार्रवाई हुई है।




फिलहाल इस कार्रवाई पर रामगोपाल यादव की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। सियासी पंडित शिवपाल के एक्शन को अलग नजरिए से देख रहे हैं। उनके मुताबिक मुलायम सिंह यादव ने हाल में तो परिवार की कलह पर मिट्टी डाल दी है लेकिन ये मिट्टी ज्यादा दिनों तक टिकी नहीं रहेगी। परिवार में कहीं न कहीं से विरोध की चिंगारी जरूर फूटेगी। हो सकता है इस बार चहरे बदल जाएं लेकिन पावर सेन्टर वही पुराने रहेंगे। जो चुनावी समय में पार्टी को कमजोर करते नजर आएंगे। परिस्थितियां ऐसी है कि इसका तुरंत हल निकालना किसी के हाथ में नहीं है।