सपा की यूथविंग पर शिवपाल का प्रहार, पिक्चर अभी बाकी है दोस्त

लखनऊ। मुलायम सिंह यादव के कुनबे के सदस्यों के बीच खिंची तलवारें भले ही अपनी मयानों में वापस हो गई हों लेकिन एक दूसरे के समर्थकों पर पलटवार करने का नया दौर शुरू हो गया है। रविवार की शाम ​यूपी सपा के अध्यक्ष की हैसियत से शिवपाल यादव ने रामगोपाल यादव के सगे भांजे अरविन्द यादव को पार्टी से बाहर निकाल दिया। यह सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा और उन्होंने अपने पदाधिकार का प्रयोग करते हुए सीएम अखिलेश के करीबी माने जाने वाले सपा यूथ विंग के सात नेताओं को मुलायम सिंह यादव के खिलाफ नारेबाजी करने के आरोप में पार्टी से सात सालों के लिए निष्कासित कर दिया। अभी तक सामने आए घटनाक्रम में शिवपाल यादव एक्शन में नजर आए हैं, लेकिन सिलसिला आगे तक जाने की पूरी उम्मीद है। लेकिन अगला दाव किसका होगा और क्या होगा ये कहना अभी जल्दबाजी साबित होगा, क्योंकि पिक्चर अभी बाकी है दोस्त।



सोमवार के घटनाक्रम के बारे में बताएं तो शिवपाल की घोषणा के बाद बर्खास्त किए गए नेताओं के समर्थन में सपा यूथविंग के प्रदेशस्तरीय कई अन्य पदाधिकारियों व कई जिलों के पदाधिकारियों ने भी अपने इस्तीफे पार्टी हाईकमान को भेज दिए। जिन्हें देर शाम शिवपाल यादव ने स्वीकार कर लिया है। शिवपाल यादव के निर्णय के खिलाफ इस्तीफा देने वाले यूथविंग के पदाधिकारियों का आरोप है कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई पक्षपात पूर्ण है। उन्हें सीएम अखिलेश यादव का समर्थन करने की वजह से बदले की भावना के चलते दंडित किया जा रहा है। वे अखिलेश यादव के साथ खड़े रहने के लिए कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हैं।

वहीं दूसरी ओर सोमवार को ही शिवपाल यादव के खिलाफ परिवार के एक अन्य सदस्य का नाम भी विरोधी स्वर उठाने में सामने आया है। यह नाम है प्रो0 रामगोपाल यादव के बेटे और फिरोजाबाद से सांसद अक्षय यादव का। रिश्ते में अपने फुफेरे भाई अरविन्द यादव को पार्टी से बाहर किए जाने पर अक्षय यादव ने शिवपाल यादव की आलोचना की है। उनका कहना है कि अरविन्द यादव उनके परिवार का हिस्सा हैं और उन पर हुई कार्रवाई से पहले उनका पक्ष जानने की कोशिश नहीं की गई। ऐसी परिस्थितियों में अरविन्द यादव की बर्खास्तगी को जायज नहीं ठहराया जा सकता। इस मामले को पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के सामने उठाया जाएगा। हालांकि अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए अक्षय यादव ने शिवपाल यादव और सीएम अखिलेश यादव के बीच शांत हुए विवाद का भी जिक्र करते हुए कहा कि कुछ ऐसी वजहों से वह विवाद उठा था।



अगर गत दो दिनों में एक्शन में आए शिवपाल यादव के फैसलों का निचोड़ निकाला जाए तो कहना गलत नहीं होगा कि कुनबे की भीतर शांत हुई रार के एकबार फिर भड़कने की पूरी उम्मीद है। लेकिन इस बार शिवपाल यादव ने मझे खिलाड़ी की तरह अपने फैसलों पर नेता जी की सहमति लेने का दावा कर विरोधियों को संदेश दे दिया है कि पार्टी के भीतर और बाहर जो चल रहा है सब कुछ नेताजी की जानकारी में है।

अंदरखाने की खबरों को सही माने तो अपने करीबियों के पार्टी से निकाले जाने का असर सीएम अखिलेश यादव पर भी पड़ा है। भले ही वे अभी प्रतिक्रिया देने से बच रहे हों, लेकिन उन्होंने अपने टीम के लोगों की अहमियत बनाए रखने के लिए राज्यपाल से कैबिनेट विस्तार के लिए पत्र लिखा है। राजभवन की स्वीकृति के साथ ही अखिलेश यादव अपनी कैबिनेट का विस्तार करते हुए पार्टी से बर्खास्त सुनील साजन और आनन्द भदौरिया को प्रमोशन देते हुए कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे सकते हैं। वर्तमान में ये दोनों नेता विधान परिषद के सदस्य होने के साथ ही राज्यमंत्री का दर्जा रखते हैं।