मुलायम चाहते हैं भाई शिवपाल की वापसी, जल्द ही पुरानी राह पर लौटेगी सपा

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मुलायम चाहते हैं भाई शिवपाल की वापसी, जल्द ही पुरानी राह पर लौटेगी सपा

लखनऊ। लोकसभा चुनाव में सपा—बसपा गठबंधन फेल होने के बाद सपा नई रणनीति बना रही है। वह परिवार के बिछड़े लोगों को जोड़ना चाहती है। हार की समीक्षा के बाद सपा फिर संघर्ष और संवाद के रास्ते पर बढ़ेगी। यूपी में होने वाले उपचुनावों में सपा पूरी ताकत के साथ उतरना चाहती है। इसके लिए वह शिवपाल यादव को पार्टी में वापस लाना चाहती है। बताया जा रहा है कि सपा संरक्षक मुलायम सिंह इस फैसले पर मुहर लगा चुके हैं।

Shivpal Yadavs Return To Sp Will Be Discussed :

भाजपा को रोकने के लिए सपा, बसपा व रालोद ने गठबंधन करके लोकसभा चुनाव लड़ा था। गठबंधन को उम्मीद थी कि वह बीजेपी को यूपी से रोक देगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बल्कि 15 सीटों पर ही ​जीत हासिल की। वहीं मुलायत परिवार के डिम्पल यादव, धर्मेन्द्र यादव और अक्षय यादव को भी चुनाव में करारी हार मिली। यूपी में गठबंधन को मिली करारी हार के बाद सपा अपने बिछड़े कुनबे को जोड़ने में जुट गई है।

इसके साथ ही सपा में युवाओं के साथ ही पुराने नेताओं की राय को तवज्जो दी जाएगी। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव चाहते हैं कि बसपा से गठबंधन, टिकट आवंटन से नाराजगी या पार्टी में उपेक्षा के चलते पार्टी से बाहर जाने वालों या अन्य कारणों से बिछड़े नेताओं को फिर पार्टी से जोड़ा जाए। वे तो शिवपाल की भी सपा में वापसी के पक्षधर हैं। मुलायम सिंह का मानना है कि बाहरी लोगों से ज्यादा अंदर के लोग करते हैं, जिसके कारण वह शिवपाल यादव को पार्टी में वापसी चाहते हैं।

सपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी व गठबंधन की हार के बाद नीचे से ऊपर तक सपा संगठन में कई बदलाव देखने को मिलेंगे। संगठन में जमीनी लोगों को तरजीह देकर क्षेत्रीय व जातीय संतुलन को साधा जाएगा। संगठन के ढांचे को बूथ स्तर ले जाया जाएगा। निचले स्तर पर कार्यकर्ताओं से संवाद का सिलसिला बढ़ेगा। बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच की दूरी कम की जाएगी।

लखनऊ। लोकसभा चुनाव में सपा—बसपा गठबंधन फेल होने के बाद सपा नई रणनीति बना रही है। वह परिवार के बिछड़े लोगों को जोड़ना चाहती है। हार की समीक्षा के बाद सपा फिर संघर्ष और संवाद के रास्ते पर बढ़ेगी। यूपी में होने वाले उपचुनावों में सपा पूरी ताकत के साथ उतरना चाहती है। इसके लिए वह शिवपाल यादव को पार्टी में वापस लाना चाहती है। बताया जा रहा है कि सपा संरक्षक मुलायम सिंह इस फैसले पर मुहर लगा चुके हैं। भाजपा को रोकने के लिए सपा, बसपा व रालोद ने गठबंधन करके लोकसभा चुनाव लड़ा था। गठबंधन को उम्मीद थी कि वह बीजेपी को यूपी से रोक देगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बल्कि 15 सीटों पर ही ​जीत हासिल की। वहीं मुलायत परिवार के डिम्पल यादव, धर्मेन्द्र यादव और अक्षय यादव को भी चुनाव में करारी हार मिली। यूपी में गठबंधन को मिली करारी हार के बाद सपा अपने बिछड़े कुनबे को जोड़ने में जुट गई है। इसके साथ ही सपा में युवाओं के साथ ही पुराने नेताओं की राय को तवज्जो दी जाएगी। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव चाहते हैं कि बसपा से गठबंधन, टिकट आवंटन से नाराजगी या पार्टी में उपेक्षा के चलते पार्टी से बाहर जाने वालों या अन्य कारणों से बिछड़े नेताओं को फिर पार्टी से जोड़ा जाए। वे तो शिवपाल की भी सपा में वापसी के पक्षधर हैं। मुलायम सिंह का मानना है कि बाहरी लोगों से ज्यादा अंदर के लोग करते हैं, जिसके कारण वह शिवपाल यादव को पार्टी में वापसी चाहते हैं। सपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी व गठबंधन की हार के बाद नीचे से ऊपर तक सपा संगठन में कई बदलाव देखने को मिलेंगे। संगठन में जमीनी लोगों को तरजीह देकर क्षेत्रीय व जातीय संतुलन को साधा जाएगा। संगठन के ढांचे को बूथ स्तर ले जाया जाएगा। निचले स्तर पर कार्यकर्ताओं से संवाद का सिलसिला बढ़ेगा। बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच की दूरी कम की जाएगी।