जनप्रतिनिधि है हैरान फिर से आ गया हैवान

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जनप्रतिनिधि है हैरान फिर से आ गया हैवान

रामचंद्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा हंस चुगेगा दाना दुनका कौवा राज चलाएगा। आज यही कहावत चरितार्थ हो रही है। अभी चार दिन पहले टान्डा विधायिका ने सब्र का बांध टूट जाने पर अपनी ही सरकार मे बसखारी थानाध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगा कर उन्हें हटाने की मांग की थी।

Shocked Again The Public Representative Is Shocked :

लेकिन दुर्भाग्य वश जिस सर्पदंश से वो मुक्ति चाह रही थी। वही सर्प उनके गले मे डाल दिया गया अर्थात् उसी थानाध्यछ को उनकी ही विधानसभा के दूसरे थाने सम्मनपुर मे भेज दिया गया एक कहावत है साँप भी मर जाये लाठी भी न टूटे। पुलिस प्रशासन ने कुछ उनके साथ यैसा ही मजाक किया जैसे एक कान को छोड दूसरा कान पकड लिया जाता है। उसी तरह उस थानाध्यक्ष को उनके टान्डा छेत्र के एक थाने बसखारी से हटा दूसरें थाने सम्मन पुर मे ट्रान्सफर कर दिया जाता है।

लोकतंत्र मे जनता का शासन जनता के लिए होता है और जनता द्वारा ही विधायक और सांसद चुने जाते हैं। जब एक विधायक की संस्तुति किसी थानेदार को हटाने के लिए की गई तो इस हटाने की मुहिम पर कौन रोडा बन रहा जिसने सर्प को हटाने का बहाना बना। उसे विधायक के गले मे डाल दिया सवाल यह उठता है कि क्या अम्बेडकर नगर मे भाजपा का कोई बडा नेता टान्डा विधानसभा से अगले चुनावों में टिकट की दावेदारी मे शामिल होना चाहता है। जो वर्तमान विधायिका को उनके छेत्र मे कमजोर करना चाहता हो अगर यैसा नहीं टान्डा विधायिका के साथ जिले के शीर्ष नेता खडे क्यो नहीं नजर आये कही अम्बेडकर भाजपा मे दो गुट तो नहीं बन गये यह सोचने का विषय है।

दूसरी तरफ एक बात और आती है कि जनता के द्वारा चुनी गई लोकप्रिय विधायिका के साथ पुलिस प्रशासन ने यैसी हैरान मनमानी क्यो कर दी जनता का शासन जनता के लिए है। इस पर इतना कोरा मजाक क्यो किया सवाल यह उठता हैकि किस अधिकारी एव नेता का का यह दरोगा कमाऊ पूत है। जो यह थानाध्यक्ष अपनी मर्ज़ी से ट्रान्सफर पोस्टिंग करवा जनता के शासन को धता बताता है। कितनी बेलगाम सरकार है ये जिसके बेलगाम अधिकारी इसी सरकार के जनप्रतिनिधियों की आवाज को मजाक बनाते हुये धता बता देते है। किस गुमान मे है योगी सरकार जो अपने कार्य कर्ताओ और जनप्रतिनिधियो का उपहास करवा रही है। अगर इसी तरह उपहास होता रहा।

और जनता का हाल राम भरोसे रहा तो आने वाले चुनाव में पार्टी का झंडा ढोने वाले कार्य करता नही मिलेगे केवल कागजो मे करोणो कार्यकर्ताओं की फौज मिलेगी अभी देर नहीं हुई है। अगर योगी सरकार जनता के प्रति वास्तव मे ईमानदार है तो प्रदेश के सारे प्रमुख पोस्टो के बडे अधिकारी अपने बडे नेताओ से लेकर थानेदार कोटेदार टेन्डर से लेकर लेखपाल सिक्रटरी तक सीबीआई जांच करवा दे। दूध का दूध पानी का पानी साफ हो जायेगा कई नेता और अधिकारी सलाखों के पीछे होगे राम राज्य लाना नहीं पडेगा खुद ब खुद आ जायेगा। इतिहास के पन्नों में आप का नाम स्वर्ण अच्छरो से लिखा जायेगा लेकिन यैसा नहीं होगा। क्योंकि जनता की सरकार को जनता के ठगने के लिए बनाया जाता है जनता को ठगे जाने की आदत बन गयी है नीले हरे भगवा पंजे झाडू सबने अलग अलग रूप मे जनता को ठगा है ठगते रहेगे इसलिए लोकतंत्र में जनता का शासन जनता के लिए कहना वेमानी सा लगता है।

रिपोर्ट- अजय तिवारी

रामचंद्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा हंस चुगेगा दाना दुनका कौवा राज चलाएगा। आज यही कहावत चरितार्थ हो रही है। अभी चार दिन पहले टान्डा विधायिका ने सब्र का बांध टूट जाने पर अपनी ही सरकार मे बसखारी थानाध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगा कर उन्हें हटाने की मांग की थी। लेकिन दुर्भाग्य वश जिस सर्पदंश से वो मुक्ति चाह रही थी। वही सर्प उनके गले मे डाल दिया गया अर्थात् उसी थानाध्यछ को उनकी ही विधानसभा के दूसरे थाने सम्मनपुर मे भेज दिया गया एक कहावत है साँप भी मर जाये लाठी भी न टूटे। पुलिस प्रशासन ने कुछ उनके साथ यैसा ही मजाक किया जैसे एक कान को छोड दूसरा कान पकड लिया जाता है। उसी तरह उस थानाध्यक्ष को उनके टान्डा छेत्र के एक थाने बसखारी से हटा दूसरें थाने सम्मन पुर मे ट्रान्सफर कर दिया जाता है। लोकतंत्र मे जनता का शासन जनता के लिए होता है और जनता द्वारा ही विधायक और सांसद चुने जाते हैं। जब एक विधायक की संस्तुति किसी थानेदार को हटाने के लिए की गई तो इस हटाने की मुहिम पर कौन रोडा बन रहा जिसने सर्प को हटाने का बहाना बना। उसे विधायक के गले मे डाल दिया सवाल यह उठता है कि क्या अम्बेडकर नगर मे भाजपा का कोई बडा नेता टान्डा विधानसभा से अगले चुनावों में टिकट की दावेदारी मे शामिल होना चाहता है। जो वर्तमान विधायिका को उनके छेत्र मे कमजोर करना चाहता हो अगर यैसा नहीं टान्डा विधायिका के साथ जिले के शीर्ष नेता खडे क्यो नहीं नजर आये कही अम्बेडकर भाजपा मे दो गुट तो नहीं बन गये यह सोचने का विषय है। दूसरी तरफ एक बात और आती है कि जनता के द्वारा चुनी गई लोकप्रिय विधायिका के साथ पुलिस प्रशासन ने यैसी हैरान मनमानी क्यो कर दी जनता का शासन जनता के लिए है। इस पर इतना कोरा मजाक क्यो किया सवाल यह उठता हैकि किस अधिकारी एव नेता का का यह दरोगा कमाऊ पूत है। जो यह थानाध्यक्ष अपनी मर्ज़ी से ट्रान्सफर पोस्टिंग करवा जनता के शासन को धता बताता है। कितनी बेलगाम सरकार है ये जिसके बेलगाम अधिकारी इसी सरकार के जनप्रतिनिधियों की आवाज को मजाक बनाते हुये धता बता देते है। किस गुमान मे है योगी सरकार जो अपने कार्य कर्ताओ और जनप्रतिनिधियो का उपहास करवा रही है। अगर इसी तरह उपहास होता रहा। और जनता का हाल राम भरोसे रहा तो आने वाले चुनाव में पार्टी का झंडा ढोने वाले कार्य करता नही मिलेगे केवल कागजो मे करोणो कार्यकर्ताओं की फौज मिलेगी अभी देर नहीं हुई है। अगर योगी सरकार जनता के प्रति वास्तव मे ईमानदार है तो प्रदेश के सारे प्रमुख पोस्टो के बडे अधिकारी अपने बडे नेताओ से लेकर थानेदार कोटेदार टेन्डर से लेकर लेखपाल सिक्रटरी तक सीबीआई जांच करवा दे। दूध का दूध पानी का पानी साफ हो जायेगा कई नेता और अधिकारी सलाखों के पीछे होगे राम राज्य लाना नहीं पडेगा खुद ब खुद आ जायेगा। इतिहास के पन्नों में आप का नाम स्वर्ण अच्छरो से लिखा जायेगा लेकिन यैसा नहीं होगा। क्योंकि जनता की सरकार को जनता के ठगने के लिए बनाया जाता है जनता को ठगे जाने की आदत बन गयी है नीले हरे भगवा पंजे झाडू सबने अलग अलग रूप मे जनता को ठगा है ठगते रहेगे इसलिए लोकतंत्र में जनता का शासन जनता के लिए कहना वेमानी सा लगता है।

रिपोर्ट- अजय तिवारी