7th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों की 17 फीसदी तक और बढ़ सकती है सैलरी

मोदी सरकार केंद्रीय कर्माचरियों को एक और तोहफा देने की कोशिश में लगी है। सातवें वेतन आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर 18,000 रुपये करने की सिफारिश की थी। इस सिफारिश को कैबिनेट ने पिछले साल ही मंजूरी भी दे दी थी, लेकिन केंद्रीय कर्मचारी सिर्फ इतना वेतन बढ़ाए जाने से  खुश नहीं हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब केंद्र सरकार उनकी सैलरी को 17 फीसदी और बढ़ाने पर विचार कर रही है। वह न्यूनतम सैलरी को अब 18,000 रुपए से बढ़ाकर 21,000 रुपए करने पर विचार कर रही है। केंद्रीय कर्मचारी न्यूनतम सैलरी को 26,000 रुपए महीने करने की मांग कर रहे हैं।

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कैबिनेट ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक न्यूनतम वेतन को 7,000 रुपए से बढ़ाकर 18,000 रुपए महीने करने को पहले ही मंजूरी दे दी है। इसके अलावा फिटमेंट फेक्टर को भी 2.57 गुना बढ़ा दिया गया है। इसके बावजूद केंद्रीय कर्मचारियों की मांग है कि न्यूनतम वेतन 18,000 रुपए महीने से बढ़ाकर 26,000 रुपए महीने किया जाए और फिटमेंट फेक्टर को 2.57 गुना बढ़ाने के बजाए 3.68 गुना बढ़ाया जाए।

7 वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर विचार करने के लिए सरकार ने नेशनल एनोमली कमेटी (एनएसी) का गठन किया, जो अब न्यूनतम वेतन पर अपनी सिफारिशें देगी। फाइनैंस मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने सेन टाइम्स को बताया था कि सरकार न्यूनतम वेतन को 21,000 रुपए करने की प्लानिंग कर रही है। यह सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद 17 फीसदी और इजाफा होगा।

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लीड करने वाली नेशनल जॉइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (NJCA) का कहना है कि पहले हम सरकार द्वारा दिए जाने वाले पैकेज को देखेंगे उसके बाद ही सैलरी बढ़ाए जाने को लेकर कोई स्टेटमेंट देंगे। गौरतलब है कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद राजनयिकों और विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) के अधिकारियों को मिलने वाले ड्रेस भत्ते को बढ़ा दिया गया है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिवारों की सुरक्षा में तैनात रहते हैं।

आधिकारिक आदेश के मुताबिक ऑपरेशनल ड्यूटी पर रहने वाले एसपीजी ऑफिसर्स को 27,800 रुपये सालाना और नॉन ऑपरेशनल ड्यूटी करने वालों को सालाना 21,225 रुपये का ड्रेस भत्ता मिलेगा। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से पहले इन सभी को 9,000 रुपये सालाना ड्रेस का भत्ता मिलता था।