1. हिन्दी समाचार
  2. अयोध्या मामला: सुप्रीम कोर्ट में बोला मुस्लिम पक्ष, श्रद्धा और स्कन्द पुराण से जमीन पर हक नहीं मिलता

अयोध्या मामला: सुप्रीम कोर्ट में बोला मुस्लिम पक्ष, श्रद्धा और स्कन्द पुराण से जमीन पर हक नहीं मिलता

By बलराम सिंह 
Updated Date

Shraddha And Skanda Purana Do Not Entitle Ayodhya To Land

नई दिल्‍ली। अयोध्या के राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में आज यानी 14 अक्‍टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने 38वें दिन सुनवाई की। सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड की तरफ वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता राजीव धवन ने कहा कि मामले में पेश की गई दलीलों से लगता है कि वादी (निर्मोही अखाड़ा एवं अन्य) विवादित भूमि के मालिक हैं। इससे पहले हिंदू पक्ष ने स्कंद पुराण का हवाला देकर कहा था कि राम जन्मस्थान के दर्शन से मोक्ष मिलता है। रामलला के वकील पीएस नरसिम्हा ने कहा था कि स्कंद पुराण बाबर के भारत आने और वहां मस्जिद बनने से बहुत पहले का है जो उस स्थान की महत्ता साबित करता है।

पढ़ें :- सरकारी नौकरी: AIIMS भुवनेश्वर ने 90 पदों पर जारी किए आवेदन, ऐसे करें अप्लाई

मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन ने अदालत में कहा कि श्रद्धा से जमीन नहीं मिलती है, स्कन्द पुराण से अयोध्या की जमीन का हक नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि अगर बेंच मोल्डिंग ऑफ रिलीफ के तहत किसी एक पक्ष को मालिकाना हक देकर दूसरे को विकल्प देती है तो मुस्लिम पक्षकारों का ही दावा बनता है। उन्होंने कहा कि तीन पहलू टाइटल के सवाल पर बंटवारा ही गलत था, इस्लामिक कानून और कुरान बहुत पेचीदा है। हिन्दू पक्षकार इसके एक पक्ष के आधार पर हमारी वक़्फ़ की गई मस्जिद को खारिज नहीं कर सकते हैं, दूसरा लिमिटेशन और तीसरा एडवर्स पजेशन को लेकर है।

राजीव धवन ने कहा कि मैं किसी डायरी, श्रद्धा या विश्वास की बात नहीं करूंगा। हिंदू पक्ष का विवादित स्थल पर कभी कब्जा नहीं रहा था, उन्हें सिर्फ पूजा का अधिकार मिला था। किसी ने आजतक नहीं माना है कि हिंदू पक्ष का आंतरिक अहाते पर कब्जा था। राजीव धवन ने अदालत में कहा कि ब्रिटिश सरकार ने 1854 में बाबरी मस्जिद के लिए ग्रांट दिया था। 1885 से 1989 तक हिंदू पक्ष की ओर से जमीन पर कोई दावा नहीं किया गया।

सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष के राजीव धवन और हिंदू पक्ष के वकील वैद्यनाथन की ओर से लिखित दलीलें पेश की घई। राजीव धवन ने कहा कि गुम्बद के नीचे रामजन्म होने के श्रद्धालुओं के फूल चढ़ाने का दावा सिद्ध नहीं हुआ है, वहां तो ट्रेसपासिंग कर लोग घुस आए थे। राजीव धवन ने कहा कि जब वहां पर पूजा चल रही थी, तो घुसने का क्या था। उन्होंने कहा कि कभी भी मंदिर तोड़कर मस्जिद नहीं बनाई, वहां लगातार नमाज़ होती रही है।

पिछली सुनवाई पर मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वे 14 अक्‍टूबर को अपनी दलीलें पूरी कर लेंगे। फ‍िलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने तय किया है कि आज मुस्लिम पक्ष की दलील खत्म होने के बाद 15 और 16 अक्टूबर को हिंदू पक्षों को जवाबी बहस का मौका दिया जाएगा। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नई डेड लाइन तय करते हुए कहा था कि 17 अक्टूबर तक तीनों पक्षों को अपनी दलीलें पूरी कर लेनी होगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की ओर से 18 अक्‍टूबर की डेडलाइन निश्‍चित की गई थी।

पढ़ें :- यूपी में रेगुलेटरी सरचार्ज बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध शुरू, उपभोक्ता परिषद ने पोल खोलने की दी चेतावनी

इस बीच अयोध्या में धारा-144 लगा दी गई है। अयोध्या के जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने बताया कि अयोध्या भूमि विवाद मामले में फैसले की संभावना और आने वाले त्‍यौहारों को देखते हुए 10 दिसंबर तक जिले में धारा-144 लागू रहेगी। इस केस में 17 नवंबर तक फैसला आने की उम्मीद है। इसी दिन सुप्रीम कोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश रंजन गोगोई भी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। मामले की सुनवाई कर रही संवैधानिक पीठ के सदस्यों में मुख्‍य न्‍यायाधीश के साथ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए नजीर भी शामिल हैं।

बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अपने फैसले में अयोध्‍या केस में जमीन को तीन बराबर हिस्सों में बांटने को कहा था। विवादित जमीन का एक हिस्सा रामलला विराजमान को दूसरा निर्मोही अखाड़ा और तीसरा हिस्सा मुस्लिम पक्ष को दिया गया था। यही नहीं रामलला विराजमान को वही हिस्सा दिया गया था जहां वे विराजमान हैं। फैसले को सभी पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में यथास्थिति कायम रखने का निर्देश जारी किया था। साल 2010 से लंबित इस केस में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने बीते छह अगस्त से रोजाना सुनवाई का फैसला किया था।

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...
X