इस विधि से पितरों को करें विदा, जाने पितृ विसर्जन अमावस्या का महत्व

इस विधि से पितरों को करें विदा, जाने पितृ विसर्जन अमावस्या का महत्व
इस विधि से पितरों को करें विदा, जाने पितृ विसर्जन अमावस्या का महत्व

लखनऊ। आज यानी 28 सितंबर को पितृ विसर्जन अमावस्या मनाई जा रही है मान्यता है कि इस दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार दान जरूर करना चाहिए। इस मास की अमावस्या को पितृ विसर्जन अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन पितरों को याद करके उनकी विदाई की जाती है। अगर पूरे पितृ पक्ष में अपने पितरों को याद न किया हो तो केवल अमावस्या को उन्हें याद करके दान करने से और निर्धनों को भोजन कराने से पितरों को शान्ति मिलती है। आइये जानते हैं पितृ विसर्जन अमावस्या के दिन कैसे करते हैं पितरों की विदाई…..

Shradh 2019 Pitra Visarjan Amavasya Importance :

कैसे करें पितृ विसर्जन अमावस्या के दिन पितरों की विदाई

  • जब पितरों की देहावसान तिथि अज्ञात हो, तब पितरों की शांति के लिए पितृ विसर्जन अमावस्या को श्राद्ध करने का नियम है।
  • आप सभी पितरों की तिथि याद नहीं रख सकते, ऐसी दशा में भी पितृ विसर्जन अमावस्या को श्राद्ध करना चाहिए।
  • इस दिन किसी सात्विक और विद्वान् ब्राह्मण को घर पर निमंत्रित करें और उनसे भोजन करने तथा आशीर्वाद देने की प्रार्थना करें।
  • स्नान करके शुद्ध मन से भोजन बनायें, भोजन सात्विक हो और इसमें खीर पूड़ी का होना आवश्यक है।
  • भोजन कराने तथा श्राद्ध करने का समय मध्यान्ह होना चाहिए।
  • ब्राह्मण को भोजन कराने के पूर्व पंचबली दें, हवन करें।
  • श्रद्धा पूर्वक ब्राह्मण को भोजन करायें,उनका तिलक करके, दक्षिणा देकर विदा करें।
लखनऊ। आज यानी 28 सितंबर को पितृ विसर्जन अमावस्या मनाई जा रही है मान्यता है कि इस दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार दान जरूर करना चाहिए। इस मास की अमावस्या को पितृ विसर्जन अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन पितरों को याद करके उनकी विदाई की जाती है। अगर पूरे पितृ पक्ष में अपने पितरों को याद न किया हो तो केवल अमावस्या को उन्हें याद करके दान करने से और निर्धनों को भोजन कराने से पितरों को शान्ति मिलती है। आइये जानते हैं पितृ विसर्जन अमावस्या के दिन कैसे करते हैं पितरों की विदाई..... कैसे करें पितृ विसर्जन अमावस्या के दिन पितरों की विदाई
  • जब पितरों की देहावसान तिथि अज्ञात हो, तब पितरों की शांति के लिए पितृ विसर्जन अमावस्या को श्राद्ध करने का नियम है।
  • आप सभी पितरों की तिथि याद नहीं रख सकते, ऐसी दशा में भी पितृ विसर्जन अमावस्या को श्राद्ध करना चाहिए।
  • इस दिन किसी सात्विक और विद्वान् ब्राह्मण को घर पर निमंत्रित करें और उनसे भोजन करने तथा आशीर्वाद देने की प्रार्थना करें।
  • स्नान करके शुद्ध मन से भोजन बनायें, भोजन सात्विक हो और इसमें खीर पूड़ी का होना आवश्यक है।
  • भोजन कराने तथा श्राद्ध करने का समय मध्यान्ह होना चाहिए।
  • ब्राह्मण को भोजन कराने के पूर्व पंचबली दें, हवन करें।
  • श्रद्धा पूर्वक ब्राह्मण को भोजन करायें,उनका तिलक करके, दक्षिणा देकर विदा करें।