धुंध के शिकंजे में कसा लखनऊ, प्रदूषण के लेवल ने तोड़ा रिकॉर्ड

लखनऊ| देश की राजधानी दिल्ली में अपना कहर बरपाने के बाद जानलेवा धुंध अब यूपी की राजधानी लखनऊ पहुंच गई है| बीते सोमवार को तो नवंबर में ही दिसंबर-जनवरी सा नजारा हो गया| स्मॉग के चलते जहां विजिबिलिटी घटकर एक चौथाई रह गई वहीँ पर्टिकुलेट मैटर (पीएम 10 व 2.5) ने भी रिकार्ड तोड़ दिया|




लखनऊ में इतना प्रदूषण हाल फिलहाल में कभी रिकॉर्ड नहीं किया गया| प्रदूषण का रिकॉर्ड तोड़ते हुए लखनऊ में पर्टिकुलेट मैटर (पीएम10) रविवार को 1200 तक पहुंच गया| सबसे खतरनाक माना जाने वाला पीएम 250, जिसे 60 के नीचे होना चाहिए वह रविवार को सुबह 9:00 बजे 633 तक पहुंच गया| आमतौर पर लखनऊ में पीएम 250 का लेवल 100 के आस-पास होता है लेकिन रविवार को पूरे दिन का औसत 350 के ऊपर था| प्रदूषण का ये स्तर दिवाली के दिन से भी ज्यादा है| दिवाली के दिन यह 300 से नीचे था|

भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान द्वारा जारी छह नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा पीएम 2.5 इंदिरा नगर में 445.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकार्ड किया गया| चौक में 421.3, विकास नगर में 373.6 व आईआईटीआर, एमजी मार्ग पर 372.6 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर रिकार्ड हुआ| यह मानक 60 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर के मुकाबले पांच से छह गुना के स्तर में है| यही स्थिति पीएम10 की है| चौक में पीएम 10 सर्वाधिक 698.6 मापा गया जो मानक से सात गुना अधिक है| इंदिरा नगर में मानक के मुकाबले छह गुना से अधिक 674.9, आईआईटीआर में 594.4, अलीगंज में 576.4, विकास नगर में 568.4 रिकार्ड किया गया|

राज्य प्रदूषण बोर्ड के चीफ एनवायरमेंटल ऑफिसर एस आर सचान का कहना है कि ऐसा मौसम में बदलाव की वजह से हो रहा है| हवा की गति अचानक बेहद कम हो गई है, नमी बढ़ गई है और मौसम भी कुछ ठंडा हो गया है| इन तीनों कारणों के एक साथ हो जाने से शहर में हो रहा प्रदूषण यहीं पर अटका हुआ है| विशेषज्ञ बताते हैं कि इस तरह के प्रदूषण से धरातल पर ओजोन बनने लगता है| वायुमंडल में ओजोन की छतरी हमें अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाती है लेकिन धरातल वही ओजोन सेहत के लिए बेहद खतरनाक है|