दिल्ली के धुंध ने बढ़ाई एयर प्यूरीफायर्स की डिमांड

दिल्ली के धुंध ने बढ़ाई एयर प्यूरीफायर्स की डिमांड

दिल्ली में करीब एक मीहने तक छाई रही धुंध ने दिल्लीवालों के लिए साफ हवा की डिमांड को 10 गुना तक बढ़ा दिया है। अलग-अलग अदालतों ने दूषित हवा को देखते हुए स्कूलों की छुट्टी और प्रदूषण को नियंत्रित करने के निर्देश जारी कर नजरंदाज होते आ रहे जहरीली हवा के खतरे को ज्यादा बड़ा बना दिया। इतना बड़ा कि सरकार और सिस्टम ने हाथ खड़े करके दिल्लीवालों को बता दिया कि समस्या का कद उनकी क्षमता से कहीं बड़ा है। इसी बीच शुरू हुई साफ हवा की मार्केटिंग। लोग इंटरनेट पर दिल्ली की हवा की क्वालिटी चेक करते थे तो गूगल की ओर सामने आने वाले विज्ञापन डिस्काउंट कीमत के साथ समस्या का इलाज करने का दावा करते नजर आते।

टीवी और समाचार पत्रों के माध्यम से भी जो खबरें लोगों के सामने पहुंची, उन खबरों से भी भय माहौल को और तगड़ा बना दिया। परिणाम स्वरूप लोग सुरक्षा की तलाश में उन दुकानों की ओर दौड़ पड़े जहां हवा को साफ करने की गारंटी देने वाली मशीनें बेंची जातीं हैं। जिसकी कीमत 10 हजार से लेकर 1.5 लाख तक की है।

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आंकड़ों की माने तो केवल नवंबर में पिछले वर्ष के मुकाबले एयर प्यूरीफायर्स की बिक्री में 1000 से लेकर 1500 प्रतिशत का उछाल आया है। यानी पिछली साल किसी कंपनी ने 10 मशीनें बेंची थीं उसने इस वर्ष 100 से 150 मशीनें बेचीं हैं। डिमांड में ये उछाल उन परिस्थितियों में आई है जब बाजार में कई नई कंपनियों ने इस कारोबार में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।

कंज्यूमर ड्यूरेबल गुड्स मार्केट पर रिसर्च करने वाले आरके मिश्रा की रॉय माने तो भारत एक विकासशील देश है। जिसने पिछले एक दशक में शहरीकरण के नए स्तर को छुआ है, जिसका 80 फीसदी हिस्सा गैर नियोजित है। शहरी नियोजन की कमी और कमियों को दूर करने के प्रति नीतिगत संवेदहीनता के चलते उपजी परिस्थितियां प्रदूषण के रूप में सिर उठा रहीं हैं। जैसा कि पहले हम पीने योग्य पानी की समस्या के मामले में देख चुके हैं। साफ पानी की डिमांड ने मिनरल वॉटर और वॉटर प्यूरीफायर का बाजार खड़ा कर डाला। अब वैसे ही हालात साफ हवा के मामले में बनते दिख रहे हैं या यूं कहा जाए कि बन चुके हैं। जिस तरह से लोग पानी को लेकर गंभीर हो चले हैं आने वाले समय में साफ हवा के लिए भी लोग कुछ ऐसी ही गंभीरता पैदा होती दिख रही है।

साफ हवा के प्रति गंभीर होते लोगों के सामने सबसे सरल विकल्प के रूप में एयर प्यूरीफायर ही है। आने वाले समय में एयर प्यूरीफायर की डिमांड तेजी से बढ़ेगी। यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले 10 सालों के भीतर हर शहरी घर में कम से कम एक एयर प्यूरीफायर मौजूद होगा। होटलों, दफ्तरों और स्कूलों में एयर प्यूरीफायरर्स जरूरी हो जाएंगे।

एयर प्यूरीफायर की उपयोगिता संदिग्ध —

भारतीय बाजार में आज के समय में करीब दर्जन भर कंपनियां हैं जो अपने एयर प्यूरीफायर बेंच रहीं हैं। जिन पर 50 से 20 प्रतिशत का डिस्काउंट आॅन लाइन वेबसाइट्स के माध्यम से खरीद पर दिया जा रहा है। इस प्रोडक्ट की डिमांड अप्रत्याशित रूप से भले ही बढ़ रही हो लेकिन इसकी उपयोगिता को सत्यापित किया जाना अभी बाकी है। डाक्टरों का भी यही मानना है कि एयर प्यूरीफायर्स से हवा में मौजूद धूल के कणों को ही हटाया जा सकता है। कुछ कंपनियां हवा से कार्बन के कण भी दूर करने का दावा करते हैं लेकिन अभी तक एयर प्यूरीफायर्स की टैक्नॉलजी में विकास की भी बहुत संभावना है।

नीतिगत उपायों को सख्ती से लागू करने की जरूरत —

शुद्ध हवा और शुद्ध पानी हर व्यक्ति की जरूरत है चाहें वह खास हो या आम। हम शुद्ध पानी अपने साथ रख सकते हैं लेकिन हवा के मामले में ऐसा कर पाना संभव नहीं होगा और अगर होता भी है तो बहुत ही पीड़ादायक होगा, जिसकी कल्पना तक अंदर तक हिलाकर रख देता है। इसका एक ही तरीका है कि लोगों में इसके लिए गंभीरता पैदा की जाए। कैसे हम अपने आस पास पौधे लगाकर और उनका संरक्षण करें? अपने आस पास के कूड़े के ढ़ेर को जलाने न दें? पब्लिक ट्रांसपोर्ट के प्रयोग को प्राथमिकता दें? गाड़ियों का प्रयोग समझदारी से और कम से कम करें?

आखिरकार शुद्ध हवा में सांस लेने की जिम्मेदारी हमारी है और हमारी अगली पीढ़ी को उसके हिस्से की सांसें मिल सकें इसके लिए छोटी छोटी बातों को गंभीरता से लेना होगा। नहीं तो वे दिन दूर नहीं जब हम और आप अपने सामाजिक स्तर को दिखाने के लिए अपने आॅक्सीजन सिलेंडर का साइज बड़ा करते नजर आएंगे।

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