सोशल मीडिया बनाम एंटी सोशल, दंड जरूरी है?

सोशल मीडिया बनाम एंटी सोशल, दंड जरूरी है?
सोशल मीडिया बनाम एंटी सोशल, दंड जरूरी है?

अमेठी: लगभग एक दशक से सोशल मीडिया का जादू लोगों के सिर चढकर बोल रहा है। सबसे पहले आरकुट के जरिये लोग संवादों का आदान-प्रदान करते थे। उस दौर में मोबाईल पर एसएमएस ही विकल्प हुआ करता था मोबाइल पर सोशल मीडिया ने दस्तक नहीं दी थी।

……..और आ गयी क्रांति-

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मोबाइल पर जबसे इंटरनेट की सुविधा आरंभ हुई है, उसके बाद तो मानो क्रांति ही आ गयी है। लोगों का अधिकांश समय मोबाईल पर संदेश देखने, आदान-प्रदान करने में ही गुजर रहा है। अब तो यूँ लगने लगा है कि आज का युवा मानो इंटरनेट सेवा प्रदाता और सोशल मीडिया के मंच की नौकरी कर रहा हो सोशल मीडिया पर जबसे व्हाट्सएप्प आया है उसके बाद से दुनिया ही बदल गयी है। सेकेन्ड्स में ही आप अपनी बात हजारों लोगों तक पहुँचा सकते हैं। लोग अपने विचारों, सूचनाओं आदि का जमकर आदान-प्रदान करते दिखते हैं सोशल मीडिया के आने से प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया की असलियत भी लोगों के सामने आने लगी है।

सोशल मीडिया पर सभ्य समाज के बीच परोसी जा रही अश्लीलता-

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सोशल मीडिया के सकारात्मक पहलू हैं तो इसके नकारात्मक पहलू भी देखने को मिलते रहे हैं। सोशल मीडिया पर अनेक समूहों में गंदगी और अश्लीलता भी पसरी दिखती है। इनमें से अधिकांश समूह वे होते हैं जिनमें समूह के सदस्यों को इस अश्लीलता से ज्यादा अंतर नहीं पड़ता है। तकलीफ तो तब होती है जब सभ्य समाज के लोगों के बीच कोई अश्लील संदेश को परोस दे।

कड़ी सजा का है प्रावधान-

सोशल मीडिया पर गलतियां लोगो से भी होती हैं। ये गलतियां आपत्तिजनक तस्वीरें लगाने से लेकर अश्लील टिप्पणियां या वीडियो अपलोड करने तक शामिल होती हैं। जिसका खामियाजा कई बार अन्य लोगों को भुगतना पड़ा है। भारत के सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत ये मामले साइबर क्राइम यानि साइबर अपराध के होते हैं, जिसके तहत कड़ी सज़ा का प्रावधान है ।

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ये भी करे पहल-

आज इस बात की जरूरत भी महसूस की जाने लगी है कि सोशल मीडिया व्हाट्सएप्प आदि पर अश्लील सामग्री न परोसी जाये। इस हेतु कुछ प्रयास किये जायें इसके लिये सांसद-विधायकों को चाहिये कि वे उपर्युक्त मंच पर आवाज बुलंद करें ताकि सरकारों के द्वारा इस हेतु कुछ ठोस प्रयास किये जायें जिससे समाज को अश्लीलता से बचाया जा सके।

रिपोर्ट-राम मिश्रा

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