सोशल मीडिया की अब निगरानी नहीं, SC की सख्ती के बाद सरकार ने पीछे खींचे कदम

सोशल मीडिया की अब निगरानी नहीं, SC की सख्ती के बाद सरकार ने पीछे खींचे कदम
सोशल मीडिया की अब निगरानी नहीं, SC की सख्ती के बाद सरकार ने पीछे खींचे कदम

नई दिल्ली। केंद्र सरकार निगरानी के लिए सोशल मीडिया हब बनाने के फैसले से आज कदम पीछे खीच ली है सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सरकार ने अपने हाथ पीछे खींचने का यह फैसला किया है। पिछली सुनवाई में शीर्ष कोर्ट ने कहा था कि यह ‘निगरानी राज’ बनाने जैसा होगा सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि केंद्र सरकार सोशल मीडिया की निगरानी नहीं करेगी और सरकार पूरे प्रोग्राम पर पुनर्विचार कर रही है।

Social Media Hub After Sc Raps Government Take Back His Decision :

क्या था प्रस्ताव

सरकार का इरादा एक ऐसे प्लेटफॉर्म को बनाने का था जिसके माध्यम से सोशल मीडिया (फेसबुक, गूगल प्लस, ट्विटर, इंस्टाग्राम और लिंक्डइन, न्यूज ब्लॉग और फोरम) पर मौजूद कंटेंट पर नजर रखी जा सके। इससे सरकार जनता का रुख समझ सकती थी। अपनी नीतियों, योजनाओं और घोषणाओं के बारे में जनता के मूड इस माध्यम से समझना सरकार का मकसद था। ये प्लेटफॉर्म सभी भारतीय भाषाओं समेत अंग्रेजी, चीनी, जर्मनी, फ्रेंच और अरबी भाषा में काम करता।

याचिकाकर्ता ने ये दी थी दलील 

यह मामला तृणमूल कांग्रेस की विधायक महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में गया था। उनका कहना था इस सोशल मीडिया टूल के बाद सरकार की लोगों के ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और ईमेल खाते में मौजूद हर डेटा तक पहुंच हो जाएगी। तृणमूल सांसद ने इसे निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया था।

गौरतलब है कि हाल में केंद्रीय मंत्रालय के तहत काम करने वाले पीएसयू ब्रॉडकास्ट कंसल्टेंट इंडिया लि. (बीईसीआइएल) ने एक टेंडर जारी किया था। इसमें एक सॉफ्टवेयर की आपूर्ति के लिए निविदाएं मांगी गई थीं। सरकार इसके तहत सोशल मीडिया के माध्यम से सूचनाओं को एकत्र करती। अनुबंध आधार पर जिला स्तर पर काम करने वाले मीडिया कर्मियों के जरिए सरकार सोशल मीडिया की सूचनाओं को एकत्र करके देखती कि सरकारी योजनाओं पर लोगों का क्या रुख है।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार निगरानी के लिए सोशल मीडिया हब बनाने के फैसले से आज कदम पीछे खीच ली है सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सरकार ने अपने हाथ पीछे खींचने का यह फैसला किया है। पिछली सुनवाई में शीर्ष कोर्ट ने कहा था कि यह 'निगरानी राज' बनाने जैसा होगा सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि केंद्र सरकार सोशल मीडिया की निगरानी नहीं करेगी और सरकार पूरे प्रोग्राम पर पुनर्विचार कर रही है।

क्या था प्रस्ताव

सरकार का इरादा एक ऐसे प्लेटफॉर्म को बनाने का था जिसके माध्यम से सोशल मीडिया (फेसबुक, गूगल प्लस, ट्विटर, इंस्टाग्राम और लिंक्डइन, न्यूज ब्लॉग और फोरम) पर मौजूद कंटेंट पर नजर रखी जा सके। इससे सरकार जनता का रुख समझ सकती थी। अपनी नीतियों, योजनाओं और घोषणाओं के बारे में जनता के मूड इस माध्यम से समझना सरकार का मकसद था। ये प्लेटफॉर्म सभी भारतीय भाषाओं समेत अंग्रेजी, चीनी, जर्मनी, फ्रेंच और अरबी भाषा में काम करता।

याचिकाकर्ता ने ये दी थी दलील 

यह मामला तृणमूल कांग्रेस की विधायक महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में गया था। उनका कहना था इस सोशल मीडिया टूल के बाद सरकार की लोगों के ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और ईमेल खाते में मौजूद हर डेटा तक पहुंच हो जाएगी। तृणमूल सांसद ने इसे निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया था।गौरतलब है कि हाल में केंद्रीय मंत्रालय के तहत काम करने वाले पीएसयू ब्रॉडकास्ट कंसल्टेंट इंडिया लि. (बीईसीआइएल) ने एक टेंडर जारी किया था। इसमें एक सॉफ्टवेयर की आपूर्ति के लिए निविदाएं मांगी गई थीं। सरकार इसके तहत सोशल मीडिया के माध्यम से सूचनाओं को एकत्र करती। अनुबंध आधार पर जिला स्तर पर काम करने वाले मीडिया कर्मियों के जरिए सरकार सोशल मीडिया की सूचनाओं को एकत्र करके देखती कि सरकारी योजनाओं पर लोगों का क्या रुख है।