फर्जी अकाउंट से नहीं चलेगा सोशल मीडिया, कराना होगा वेरिफिकेशन, सरकार ला रही है विधेयक

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फर्जी अकाउंट से नहीं चलेगा सोशल मीडिया, कराना होगा वेरिफिकेशन, सरकार ला रही है विधेयक

नई दिल्ली। देश में सोशल मीडिया एप का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों को अपना वेरिफिकेशन कराना पड़ सकता है। केन्द्र सरकार इसके लिए ससंद के मौजूदा सत्र में नया विधेयक पेश कर सकती है। इस बिल के पास होने पर व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक जैसे एप का इस्तेमाल करने के लिए लोगों को पहले वेरिफिकेशन कराना होगा।

Social Media Will Not Work With Fake Account Will Have To Be Verified Government Is Bringing Bill :

दरअसल सरकार यह विधेयक इसलिए लेकर आ रही है कि, ताकि फर्जी खबरों के प्रचार प्रसार पर नकेल लग सके। इसके लिए इन कंपनियों को अपने यहां पर एक ऐसा मैकेनिज्म तैयार करना पड़ेगा। वहीं इस वेरिफिकेशन को कंपनियों को पब्लिक में दिखाना भी पड़ेगा, जैसा ट्विटर में होता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक यूजर्स को अपनी केवाईसी करानी होगी। इसके लिए वो पैन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड या फिर पासपोर्ट जैसे सरकारी डॉक्यूमेंट दे सकेंगे। इससे सोशल मीडिया पर चल रहे फर्जी अकाउंट को हटाने में और उनकी जानकारी मिलने में सरकार को मदद मिलेगी।

एक रिपोर्ट के मुताबिक फेक न्यूज के चलते 2017 से 2018 के बीच 30 लोगों की मौत हुई है। वहीं व्हाट्सएप ने इसका प्रसार रोकने के लिए मैसेज फॉरवर्ड करने की अधिकतम सीमा को पांच किया था। वहीं फेसबुक और अन्य कंपनियां ने इसका विरोध किया था, क्योंकि कई लोगों के पास वेरिफिकेशन देने के लिए कोई डॉक्यूमेंट नहीं होता है।

निजी डाटा चुराने पर अब कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों को तीन साल की जेल भी हो सकती है और कंपनी को 15 करोड़ रुपये तक या उसके वैश्विक टर्नओवर का चार फीसदी जुर्माना भी देना पड़ सकता है। कैबिनेट से निजी डाटा संरक्षण विधेयक, 2019 को मंजूरी मिलने के बाद अधिकारियों ने बताया कि इस विधेयक में निजी डाटा की चोरी करने या फिर उसका बेजा इस्तेमाल करने पर रोक लगाने के कई प्रावधान किए गए हैं।

नई दिल्ली। देश में सोशल मीडिया एप का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों को अपना वेरिफिकेशन कराना पड़ सकता है। केन्द्र सरकार इसके लिए ससंद के मौजूदा सत्र में नया विधेयक पेश कर सकती है। इस बिल के पास होने पर व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक जैसे एप का इस्तेमाल करने के लिए लोगों को पहले वेरिफिकेशन कराना होगा। दरअसल सरकार यह विधेयक इसलिए लेकर आ रही है कि, ताकि फर्जी खबरों के प्रचार प्रसार पर नकेल लग सके। इसके लिए इन कंपनियों को अपने यहां पर एक ऐसा मैकेनिज्म तैयार करना पड़ेगा। वहीं इस वेरिफिकेशन को कंपनियों को पब्लिक में दिखाना भी पड़ेगा, जैसा ट्विटर में होता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक यूजर्स को अपनी केवाईसी करानी होगी। इसके लिए वो पैन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड या फिर पासपोर्ट जैसे सरकारी डॉक्यूमेंट दे सकेंगे। इससे सोशल मीडिया पर चल रहे फर्जी अकाउंट को हटाने में और उनकी जानकारी मिलने में सरकार को मदद मिलेगी। एक रिपोर्ट के मुताबिक फेक न्यूज के चलते 2017 से 2018 के बीच 30 लोगों की मौत हुई है। वहीं व्हाट्सएप ने इसका प्रसार रोकने के लिए मैसेज फॉरवर्ड करने की अधिकतम सीमा को पांच किया था। वहीं फेसबुक और अन्य कंपनियां ने इसका विरोध किया था, क्योंकि कई लोगों के पास वेरिफिकेशन देने के लिए कोई डॉक्यूमेंट नहीं होता है। निजी डाटा चुराने पर अब कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों को तीन साल की जेल भी हो सकती है और कंपनी को 15 करोड़ रुपये तक या उसके वैश्विक टर्नओवर का चार फीसदी जुर्माना भी देना पड़ सकता है। कैबिनेट से निजी डाटा संरक्षण विधेयक, 2019 को मंजूरी मिलने के बाद अधिकारियों ने बताया कि इस विधेयक में निजी डाटा की चोरी करने या फिर उसका बेजा इस्तेमाल करने पर रोक लगाने के कई प्रावधान किए गए हैं।