solar eclipse 2018: 13 जुलाई को लग रहा है सूर्य ग्रहण, इन बातों का रखें ध्यान

solar eclipse 2018 ,सूर्य ग्रहण
Surya Grahan 2018: 11 अगस्त को पड़ेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, जानिए खास बातें

नई दिल्ली। इस वर्ष जुलाई के महीने में दो ग्रहण पड़ रहे हैं, पहला सूर्यग्रहण जो 13 जुलाई को पड़ रहा है और दूसरा चंद्रग्रहण जो 27 जुलाई को पड़ रहा है। सूर्य ग्रहण एक तरह का ग्रहण है जब चन्द्रमा, पृथ्वी और सूर्य के मध्य से होकर गुजरता है तथा पृथ्वी से देखने पर सूर्य पूर्ण अथवा आंशिक रूप से चन्द्रमा द्वारा आच्छादित होता है। भौतिक विज्ञान के अनुसार जब सूर्य व पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा आ जाता है तो चन्द्रमा के पीछे सूर्य का बिम्ब कुछ समय के लिए ढक जाता है, उसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। जिस वक्त सूर्य ग्रहण लगा होता है उस अवधि को सूतक काल कहते हैं।

Solar Eclipse 2018 13 Here Are The Dos And Dont :

सूर्य ग्रहण लगने का समय

भारतीय समयानुसार ग्रहण सुबह 7.18 बजकर 23 सेकेंड से शुरू होगा और 8.13 बजकर 05 सेकेंड तक रहेगा। हालांकि कहा जा रहा है कि यह भारत में दिखाई नहीं देगा लेकिन इसका असर राशियों पर जरूर पड़ेगा।

सूर्यग्रहण के दौरान क्या करें

  • मान्यता है कि सूर्य ग्रहण लगने से पहले दूध-दही जैसी चीजों में तुलसी के पत्ते डालकर रखना चाहिए।
  • ग्रहण से पहले ही भोजन खा लें। साथ ही पके हुए भोजन को बचाए नहीं उसे खाकर खत्मं कर दें।
  • अगर आपको आराम करना है तो ग्रहण से पहले ही कर लें।

क्या न करें

  • गर्भवती महिलाओं को इस दौरान खाना खाने की मनाही होती है। कहा जाता है कि यदि गर्भवती महिला इस दौरान खाना खाती है को उसके खाने पर ग्रहण लग जाता है।
  • सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को कैंची या चाकू भी नहीं छूना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से गर्भ में पल रहे शिशु के अंग कट सकते हैं।
  • सूर्य ग्रहण देखने वाली महिलाओं के लीवर पर भी असर पड़ता है। इससे उसका शिशु विकलांग हो सकता है।
  • सूर्यग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी आदि भी नहीं तोड़ने चाहिए।
  • इस दिन दांत साफ करना, ताला खोलना, मल-मूत्र त्याग करना भी वर्जित है।
  • इस अवधि में पूजा-पाठ और मूर्ति पूजा नहीं की जाती है।
  • ऐसा भी कहा जाता है कि सूर्य ग्रहण के समय सोना और खाना नहीं चाहिए।

सूर्य ग्रहण के बाद करें ये 3 काम

  • मान्यताओं के अनुसार ग्रहण खत्म होने बाद सबसे पहले स्ना न करना चाहिए।
  • तुलसी और शामी के पौधों में गंगाजल का छिड़काव करें।
  • गरीबों और जरूरतमंदों को सामर्थ्यल के अनुसार दान-दक्षिणा दें।
नई दिल्ली। इस वर्ष जुलाई के महीने में दो ग्रहण पड़ रहे हैं, पहला सूर्यग्रहण जो 13 जुलाई को पड़ रहा है और दूसरा चंद्रग्रहण जो 27 जुलाई को पड़ रहा है। सूर्य ग्रहण एक तरह का ग्रहण है जब चन्द्रमा, पृथ्वी और सूर्य के मध्य से होकर गुजरता है तथा पृथ्वी से देखने पर सूर्य पूर्ण अथवा आंशिक रूप से चन्द्रमा द्वारा आच्छादित होता है। भौतिक विज्ञान के अनुसार जब सूर्य व पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा आ जाता है तो चन्द्रमा के पीछे सूर्य का बिम्ब कुछ समय के लिए ढक जाता है, उसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। जिस वक्त सूर्य ग्रहण लगा होता है उस अवधि को सूतक काल कहते हैं।सूर्य ग्रहण लगने का समयभारतीय समयानुसार ग्रहण सुबह 7.18 बजकर 23 सेकेंड से शुरू होगा और 8.13 बजकर 05 सेकेंड तक रहेगा। हालांकि कहा जा रहा है कि यह भारत में दिखाई नहीं देगा लेकिन इसका असर राशियों पर जरूर पड़ेगा।सूर्यग्रहण के दौरान क्या करें
  • मान्यता है कि सूर्य ग्रहण लगने से पहले दूध-दही जैसी चीजों में तुलसी के पत्ते डालकर रखना चाहिए।
  • ग्रहण से पहले ही भोजन खा लें। साथ ही पके हुए भोजन को बचाए नहीं उसे खाकर खत्मं कर दें।
  • अगर आपको आराम करना है तो ग्रहण से पहले ही कर लें।
क्या न करें
  • गर्भवती महिलाओं को इस दौरान खाना खाने की मनाही होती है। कहा जाता है कि यदि गर्भवती महिला इस दौरान खाना खाती है को उसके खाने पर ग्रहण लग जाता है।
  • सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को कैंची या चाकू भी नहीं छूना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से गर्भ में पल रहे शिशु के अंग कट सकते हैं।
  • सूर्य ग्रहण देखने वाली महिलाओं के लीवर पर भी असर पड़ता है। इससे उसका शिशु विकलांग हो सकता है।
  • सूर्यग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी आदि भी नहीं तोड़ने चाहिए।
  • इस दिन दांत साफ करना, ताला खोलना, मल-मूत्र त्याग करना भी वर्जित है।
  • इस अवधि में पूजा-पाठ और मूर्ति पूजा नहीं की जाती है।
  • ऐसा भी कहा जाता है कि सूर्य ग्रहण के समय सोना और खाना नहीं चाहिए।
सूर्य ग्रहण के बाद करें ये 3 काम
  • मान्यताओं के अनुसार ग्रहण खत्म होने बाद सबसे पहले स्ना न करना चाहिए।
  • तुलसी और शामी के पौधों में गंगाजल का छिड़काव करें।
  • गरीबों और जरूरतमंदों को सामर्थ्यल के अनुसार दान-दक्षिणा दें।