बेटे कार्ति ने कहा, कल से राज्यसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे पी चिदम्बरम

p chidambram
कन्हैया कुमार पर देशद्रोह का मुकदमा चलाये जाने का चिदंबरम ने किया विरोध

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बरम गुरुवार से राज्यसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे। चिदम्बरम के बेटे और कांग्रेस के लोकसभा सांसद कार्ति चिदम्बरम ने बुधवार को संसद भवन परिसर में कहा कि अपने पिता को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने पर वह बहुत खुश हैं। उन्होंने कहा कि मेरे लिए यह बहुत बड़ा दिन है। मेरे पिता 106 दिन तक जेल में रहने के बाद आज बाहर आ रहे हैं। वह राज्यसभा के सदस्य हैं और गुरुवार से सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे।

Son Karti Said P Chidambaram Will Participate In The Proceedings Of Rajya Sabha From Tomorrow :

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आईएनएक्स मीडिया में धनशोधन से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज मामले में तिहाड़ जेल में बंद पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिंदबरम को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही 106 दिन तक जेल में रहने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया। न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की पीठ ने चिदंबरम को सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। न्यायालय ने दो लाख रुपये की जमानत राशि और इतनी ही राशि के दो मुचलकों पर जमानत मंजूर करने का निर्णय लिया।

न्यायमूर्ति बोपन्ना ने पीठ की ओर से फैसला पढ़ते हुए कहा कि कांग्रेस नेता अदालत की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे, साथ ही वह न तो किसी गवाह से बात करेंगे, न ही इस मामले में कोई सार्वजनिक टिप्पणी करेंगे और न कोई साक्षात्कार देंगे। आईएनएक्स मीडिया में विदेशी निवेश में भ्रष्टाचार से जुड़े केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के मामले में सुप्रीम कोर्ट से ही चिदंबरम को पहले जमानत मिल चुकी है। पीठ ने दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि उसे मेरिट पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट की कुछ टिप्पणियों से वह सहमत नहीं है।

प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आर्थिक अपराध गंभीर प्रकृति के होते हैं, क्योंकि वे न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं, बल्कि व्यवस्था में लोगों के यकीन को भी ठेस पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा था कि जांच के दौरान ईडी को बैंक के 12 ऐसे खातों के बारे में पता चला, जिनमें अपराध से जुटाया गया धन जमा किया गया। एजेंसी के पास अलग-अलग देशों में खरीदी गयी 12 संपत्तियों के ब्यौरे भी हैं। उन्होंने दलील दी थी कि जेल में अभियुक्तों की समयावधि को जमानत मंजूर करने का आधार नहीं बनना चाहिए।

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बरम गुरुवार से राज्यसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे। चिदम्बरम के बेटे और कांग्रेस के लोकसभा सांसद कार्ति चिदम्बरम ने बुधवार को संसद भवन परिसर में कहा कि अपने पिता को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने पर वह बहुत खुश हैं। उन्होंने कहा कि मेरे लिए यह बहुत बड़ा दिन है। मेरे पिता 106 दिन तक जेल में रहने के बाद आज बाहर आ रहे हैं। वह राज्यसभा के सदस्य हैं और गुरुवार से सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आईएनएक्स मीडिया में धनशोधन से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज मामले में तिहाड़ जेल में बंद पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिंदबरम को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही 106 दिन तक जेल में रहने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया। न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की पीठ ने चिदंबरम को सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। न्यायालय ने दो लाख रुपये की जमानत राशि और इतनी ही राशि के दो मुचलकों पर जमानत मंजूर करने का निर्णय लिया। न्यायमूर्ति बोपन्ना ने पीठ की ओर से फैसला पढ़ते हुए कहा कि कांग्रेस नेता अदालत की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे, साथ ही वह न तो किसी गवाह से बात करेंगे, न ही इस मामले में कोई सार्वजनिक टिप्पणी करेंगे और न कोई साक्षात्कार देंगे। आईएनएक्स मीडिया में विदेशी निवेश में भ्रष्टाचार से जुड़े केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के मामले में सुप्रीम कोर्ट से ही चिदंबरम को पहले जमानत मिल चुकी है। पीठ ने दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि उसे मेरिट पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट की कुछ टिप्पणियों से वह सहमत नहीं है। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आर्थिक अपराध गंभीर प्रकृति के होते हैं, क्योंकि वे न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं, बल्कि व्यवस्था में लोगों के यकीन को भी ठेस पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा था कि जांच के दौरान ईडी को बैंक के 12 ऐसे खातों के बारे में पता चला, जिनमें अपराध से जुटाया गया धन जमा किया गया। एजेंसी के पास अलग-अलग देशों में खरीदी गयी 12 संपत्तियों के ब्यौरे भी हैं। उन्होंने दलील दी थी कि जेल में अभियुक्तों की समयावधि को जमानत मंजूर करने का आधार नहीं बनना चाहिए।