जानिए कौन है सोनम गुप्ता और कैसे हो गई बेवफा…?

नई दिल्ली: आजकल सोशल मीडिया पर एक ही चर्चा चल रही है वह है सोनम गुप्ता बेवफा है। फेसबुक से लेकर ट्विटर तक और तमाम दूसरी सोशल साइट्स के पेज सोनम गुप्ता की वफ़ा और बेवफ़ाई से पटे पड़े हैं।10 के पुराने नोट से लेकर 2000 के नए नोट तक सोनम हर बार बेवफ़ा साबित की जा रही है। हिंदुस्तान से लेकर न्यूज़ीलैंड तक और अमेरिका से लेकर यूरोप तक। हर नोट पे बस एक ही नाम, सोनम गुप्ता बेवफ़ा है। सोशल मीडिया पर ही काफी नहीं रहा है यह मामला। गली-मोहल्लों में भी इसकी चर्चा होने लगी है। हर कोई जानने की कोशिश कर रहा है कि आखिर कौन है सोनम गुप्ता और कैसे हो गई बेवफा?




इस बेवफाई के पीछे एक लंबी कहानी है। गर्ल्स कॉलेज में पढ़ने वाली सोनम गुप्ता जी की एकलौती बेटी है। माँ-बाप की सबसे लाडली और दादी के जिगर का टुकड़ा सोनम ने जब जवानी की दहलीज पर कदम रखा तो उसकी खूबसूरती के आगे पूर्णमासी का चाँद भी शरमा जाए। बला की खूबसूरत सोनम जब मोहल्ले से गुजरती थी तो क्या 14 क्या 16, 84 की उम्र पर कर चुके दादा लोग भी उसकी एक झलक पाने के लिए बेताब रहते थे। सोनम कपड़े सुखाने छत पर चढ़ जाती तो लोग धूप सेंकने के बहाने मुंडेर पर चढ़कर बैठ जाते थे। गली-मोहल्ले में सबकी जबान पर एक ही नाम की रट लगी रहती थी वह थी सोनम की। हर कोई उस पर जान छिड़कता था लेकिन सोनम किसी के आगे घास तक नहीं डालती थी।

समय बदलता गया और सोनम का रूप निखरता गया। लोग सोनम के घर चिट्ठी-चपाती भेजने लगे। लेकिन उसका कोई भी असर नहीं हुआ। वह किसी को भी पलटकर किसी चिट्ठी का जवाब नहीं देती। हाँ पड़ोस में रहने वाले दुबे जी के लड़के पर सोनम की निगाहें थी। वह सोनम से कभी कुछ कहा नहीं बस अपने घर के झरोखे से उसे देखता रहता था। सोनम के सुबह उठने से पहले वह छत पर आकर उसका इन्तजार करता था। दुबे जी के लड़के के इसी अदा पर सोनम गुप्ता मर मिटी। और उसे प्यार करने लगी। एक दिन दुबे जी के लड़के ने सोनम को एक दस के नोट पर आई लव यू लिखकर भेज दिया। उसने मुस्कुराते हुए वह नोट लेकर चली गई। फिर क्या था दुबे का लड़का उसे रोजाना 10 की नोट आई लव यू लिखकर भेजा करता और सोनम उसे अपने गुल्लक में भरती गई।




फिर क्या था लड़के कि हिम्मत बढ़ती गई और वह गली-मोहल्ले कही भी सोनम मिलती बतिया लेता था। इतना ही नहीं धीरे- धीरे दोनों स्कूल में बात करने का सिलसिला शुरू हो गया। लेकिन दिन मास्टर साहब ने दोनों को देख लिया। और दुबे जी को इसकी शिकायत की लड़के की खूब कुटाई हुई और लड़की बच गई। इतना होने के बावजूद दोनों में प्यार बढ़ता गया। और दोनों ने साथ में जीने- मारने की कसमे खाईं। उधर सोनम और दुबे जी के लड़के का रोमांस लोगों से देखा न गया। और इसकी शिकायत गुप्ता जी से कर दी। गुप्ता जी थे बेचारे नेक और सामाजिक आदमी। वह बेटी की इन कारगुजारियों को बर्दाश्त नहीं कर सके और। तुरंत उसके हाथ पीले करने की सोचने लगे। हालांकि कई लोगों ने उन्हें सलाह दी कि वह दुबे जी के लड़के से बेटी का रिश्ता तय कर दे। वह भी बहुत चाहता है। लेकिन गुप्ता जी को यह बर्दाश्त नहीं कि बेटी किसी और कुल व खानदान में जाए इसलिए उन्होंने लड़की की शादी अपने कुल वा खानदान में करने की सोची। उन्होंने फ़ौरन दूर गाँव के एक लड़के से अपनी बेटी का विवाह तय कर दी। तत्काल बेटी की बारात आई सपना शादी के सात बंधन में बंध गई।

सपना को मौका भी नहीं मिला कि वह अपनी मजबूरियों को दुबे जी के लड़के को बता पाए। वह अपनी ससुराल चली गई। उधर सपना की किसी और के साथ शादी हो जाने से दुबे का लड़का भड़क गया और बगावत पे उतर आया। वो कम्बख्त अब नोटों पे लिखने लगा है कि सोनम गुप्ता बेवफ़ा है।