बदलावः जल्द ही 17 अति पिछड़ी जातियां हो जाएंगी अनुसूचित जाति में शामिल, सरकार ने जारी की अधिसूचना

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बदलावः जल्द ही 17 अति पिछड़ी जातियां हो जाएंगी अनुसूचित जाति में शामिल, सरकार ने जारी अधिसूचना

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल कर लिया है। प्रमुख सचिव समाज कल्याण मनोज सिंह ने इस सम्बंध में कमिश्नर और जिलाधिकारियों को जरूरी निर्देश जारी कर दिया है, जिसमें उन्होने कहा कि इन 17 पिछड़ी जातियों को अब हर जिले में अनुसूचित जाति के प्रमाण.पत्र जारी किए जाएं।

Soon 17 Highly Backward Castes Will Be Included In Scheduled Caste Government Issued Notification :

बता दें जिन अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किया गया है, उनमें कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिन्द, भर, राजभर, धीमर, बाथम, तुरहा, गोड़िया, माझी और मछुआ हैं। प्रदेश सरकार ने यह आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा एक जनहित याचिका पर दिए गए आदेश के बाद किया गया है। हालाकि सरकार के प्रवक्ता के मुताबिक यह प्रक्रिया हाईकोर्ट के आदेश के अंतिम फैसले के अधीन होगी। बता दें कि ये अति पिछड़ी जातियां काफी लम्बे समय से मांग कर रही थीं कि उन्हें एससी में शामिल किया जाए।

राज्यपाल ने प्रदेश सरकार के इस फैसले पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा ;अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण, अधिनियम 1994 की धारा .13 के अधीन शक्ति का प्रयोग करते हुए अधिनियम की अनुसूचि एक में जरूरी संशोधन कर दिया गया है। जिसके तहत ओबीसी से इन जातियों को निकाल दिया गया है। उधर समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री ने कहा है कि हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब प्रदेश सरकार केन्द्र सरकार से भी इस बाबत अनुरोध करेगी।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल कर लिया है। प्रमुख सचिव समाज कल्याण मनोज सिंह ने इस सम्बंध में कमिश्नर और जिलाधिकारियों को जरूरी निर्देश जारी कर दिया है, जिसमें उन्होने कहा कि इन 17 पिछड़ी जातियों को अब हर जिले में अनुसूचित जाति के प्रमाण.पत्र जारी किए जाएं। बता दें जिन अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किया गया है, उनमें कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिन्द, भर, राजभर, धीमर, बाथम, तुरहा, गोड़िया, माझी और मछुआ हैं। प्रदेश सरकार ने यह आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा एक जनहित याचिका पर दिए गए आदेश के बाद किया गया है। हालाकि सरकार के प्रवक्ता के मुताबिक यह प्रक्रिया हाईकोर्ट के आदेश के अंतिम फैसले के अधीन होगी। बता दें कि ये अति पिछड़ी जातियां काफी लम्बे समय से मांग कर रही थीं कि उन्हें एससी में शामिल किया जाए। राज्यपाल ने प्रदेश सरकार के इस फैसले पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा ;अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण, अधिनियम 1994 की धारा .13 के अधीन शक्ति का प्रयोग करते हुए अधिनियम की अनुसूचि एक में जरूरी संशोधन कर दिया गया है। जिसके तहत ओबीसी से इन जातियों को निकाल दिया गया है। उधर समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री ने कहा है कि हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब प्रदेश सरकार केन्द्र सरकार से भी इस बाबत अनुरोध करेगी।