दक्षिण कश्मीर बना आंतकवादियों का भर्ती कैंप, 2017 में 70 युवक को थमाई एके 47

नई दिल्ली। एक रिर्पोट के मुताबिक दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा, शोपिया और कुलगाम के युवाओं में आतंकवादी संगठनों मेंं शामिल होने के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है। एक सीनियर के बयान का हवाला देते हुए इस रिर्पोट में खुलासा किया गया है कि 2017 में अबतक यानी पिछले सात महीनों के भीतर 70 युवा आतंक की राह चुन चुके हैं।

बताया गया है कि आतंकी सगठनों द्वारा दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा, शोपिया और कुलगाम के युवाओं को आतंक के रास्ते पर ले जाना एक सोची समझी रणनीति है। यह इलाका अपने घने जंगलों और बागानों के लिए पहचाना जाता है। इसके साथ ही श्रीनगर और अनंतनाग के बीच स्थित ये शहर दोनों ही अहम शहरों को प्रभावित करते हैं।

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आंकड़ो को देखें तो भारतीय सुरक्षाबलों ने 2017 में 135 आतंकियों को मार गिराया है। पिछले 7 सालों में 2010 में 158 आतंकवादियों के एनकाउंटर के बाद यह आंकड़ा सबसे बड़ा है।

जानकारों की माने तो कश्मीर के पुलवामा, शोपिया और कुलगाम को आतंकवादियों ने अपनी पनाहगाह तो लंबे समय से बना रखा है, लेकिन 2010 में बड़े स्तर पर आतंकवादियों के मारे जाने के बाद इस इलाके में आतंकियों ने युवाओं को जिहाद और आजादी के नाम पर बन्दूकें थमाना शुरू किया था। इस इलाके के युवा शिक्षित और बेरोजगार हैं। इसी बात का फायदा लश्कर—ए—तोएबा और ​हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठन उठाते हैं। युवाओं को धर्म और आजादी का के नाम पर बर्गलाया जाता है। उन्हें आतंक की ट्रेनिंग और कुछ पैसे देकर मौत के रास्ते पर धकेल दिया जाता है।

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गत् वर्ष मारा गया हिजबुल कमांडर बुरहान बानी इसका जीता जागता उदाहरण है। पुलवामा का ही रहने बुरहान ने भी आतंक का रास्ता चुना था। जबकि इसी इलाके में पिछले दिनों मारा गया पाकिस्तानी लश्कर कमांडर अबु दुजाना ऐसे ही रास्ते पर चल रहा था। अबु दुजाना को तो पाकिस्तान में ट्रेनिंग देकर कश्मीर में प्लांट किया गया था।

अब आतंकी संगठन बुरहान बानी और अबु दुजाना जैसे आतंकवादियों को हीरो और कश्मीर की आजादी के लिए शहादत देने वाला बताकर युवाओं की भर्ती कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि अब तक 70 युवा आतंक की राह चुन चुके हैं, जबकि 56 युवाओं को आतंकी कैम्पों में जाने से बचाया जा चुका है। इससे पहले 2016 में 88, 2015 में 66 और 2014 में 53 युवाओं ने आतंकी बन बंदूक उठाई थी।

पुलवामा के घने जंगलों और बागानों में युवाओं को आतंकी बनने की ट्रेनिंग दी जाती है। जिन्हें ट्रेनिंग के लिए पाक ​अधिकृत कश्मीर में भी भेजा जाता है। वर्तमान में सीमा पर कड़े सुरक्षा प्रबंधों के चलते पाकिस्तान से भारत में घुसपैठ की लगातार असफल होते प्रयासों के चलते कश्मीर में नए आतंकियों की भर्ती करना आतंकी संगठनों के लिए मजबूरी बन गया है।

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दक्षिण कश्मीर के युवाओं के बीच सोशल मीडिया का उपयोग भी इस इलाके को आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बनाता है। इस इलाके में आं​तकियों से मुठभेड़ के दौरान ​स्थानीय युवक सुरक्षा बलों पर पथरवा करने लगते हैं। इन पत्थरबाजों को सोशल मीडिया पर जानकारी देकर बुलाया जाता है। सैकड़ों की संख्या में पहुंचने वाले पत्थरबाज आतंकियों के लिए भागने का रास्ता बनाते हैं। सुरक्षा बलों के लिए इस इलाके में आतंकवादियों के खिलाफ आॅपरेशन करने में बेहद परेशानी आती है।

शनिवार को भी पुलवामा में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई एक बड़ी मुठभेड़ में करीब छह आतंकवादियों को पत्थरबाजों की वजह से भागने का मौका मिल गया। हालांकि इस आॅपरेशन में तीन आतंकी मारे गए, जिस आॅपरेशन में दो जवान भी शहीद हुए हैं।

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