उन्नाव गैंगरेप मामला: एसआईटी करेगी पूरे मामले की नए सिरे से जांच

adg anand kumar
उन्नाव गैंगरेप मामला: एसआईटी करेगी पूरे मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच

उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में गैंगरेप के बाद पीड़िता के पिता की संदिग्ध हालात में मौत के बाद मचे बवाल से आखिरकार प्रशासन की नींद टूट ही गई। उसने माना है कि इस मामले में पीड़ित परिवार के साथ के अन्याय हुआ है। इसी के चलते सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की है।

Spacial Investigation Team Formed For Unnao Gangrape Case :

एडीजी कानून ​व्यवस्था आनंद कुमार ने बताया कि बीजेपी विधायक पर लगे गैंगरेप के कथित आरोप के बाद एडीजी जोन लखनऊ के नेतृत्व में गठित की ये जांच टीम पूरे मामले की नए सिरे से जांच करेंगी और फिर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। उन्होने बताया कि इस मामले में यदि विधायक की भूमिका संदिग्ध मिलती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि उन्नाव में भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर वही रहने वाले एक परिवार ने आरोप लगाया था कि विधायक ने नौकरी देने के बहाने उसके घर की एक युवती को बुलाया और फिर उसके साथ दुराचार किया। यही नही इसके बाद उसके भाई अतुल सिंह ने भी गुर्गों संग युवती के साथ गैंगरेप किया। पीड़िता इसकी शिकायत करने माखी थाने पहुंची, तो वहां उसकी एक बात नही सुनी गई। पीड़ित परिवार का कहना है कि इसकी सूचना विधायक के भाई को मिली तो उसने पुलिस के सामने पीड़िता के पूरे परिवार को पीटा और फिर उसके पिता के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कर उसे जेल में ठूंस दिया।

आपकों बता दें कि विधायक की गुण्डई इसके बाद भी नही रूकी तो पीड़ित परिवार बीते आठ अप्रैल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास के बाहर पहुंचा और आत्मदाह करने का प्रयास किया। हालाकि वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हे बचा लिया और गौतमपल्ली थाने लेकर पहुंची। बाद में उन्नाव पुलिस को बुलाकर सभी को उसके सिपुर्द कर दिया।

बतां दें कि पीड़ित परिवार अपने घर पहुंचा ही था कि तभी देर रात उन्हे सूचना मिली कि जेल में बंद पीड़िता के भाई की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा और प्रशासन ने आनन—फानन में माखी थाना इंचार्ज आनंद सिंह भदौरिया समेत कई पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के साथ ही विधायक के चार गुर्गों के साथ ही उसके भाई अतुल सिंह को जेल भेज दिया।

बतां दें कि इसके बाद कुलदीप सिंह सेंगर मुख्यमंत्री के पास पहुंचा और मामले में सफाई देते हुए इस घटना को उसे बदनाम करने के लिए विरोधियों की साजिश बताई। बाद में कुलदीप सिंह सेंगर को मामले में क्लीन चिट दे दी गई। इसकी जानकारी पीड़ित परिवार को मिली तो उसने हंगामा शुरु कर दिया। सरकार की किरकिरी होती देख तुरन्त एसआईटी का गठन हुआ पूरे मामले की दोबारा जांच कराने का आदेश दिए गए।

पीएम रिपोर्ट में ये बताई गई मौत की वजह

पीड़िता के पिता की मौत के बाद डाक्टरों के पैनल ने उसका पोस्टमार्टम किया। जिसकी रिपोर्ट मंगलवार रात पुलिस को मिल गई। डाक्टरों के मुताबिक मारपीट के दौरान उनकी बड़ी आंत फट गई थी। जिसके चलते श्वाग और सेप्टिशिमिया फैलने से उनकी जान चली गई। अब सोंचने वाली बात ये हैं कि मारपीट के बाद परिजनों ने उनका दो बार अल्ट्रासाउन्ड कराया था, लेकिन उसमें आंत फटने की पुष्टि नही हुई। फिलहाल डाक्टरों ने मृतक की आंच का टुकड़ा और विसरा सुरक्षित कर लिया है।

उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में गैंगरेप के बाद पीड़िता के पिता की संदिग्ध हालात में मौत के बाद मचे बवाल से आखिरकार प्रशासन की नींद टूट ही गई। उसने माना है कि इस मामले में पीड़ित परिवार के साथ के अन्याय हुआ है। इसी के चलते सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की है।एडीजी कानून ​व्यवस्था आनंद कुमार ने बताया कि बीजेपी विधायक पर लगे गैंगरेप के कथित आरोप के बाद एडीजी जोन लखनऊ के नेतृत्व में गठित की ये जांच टीम पूरे मामले की नए सिरे से जांच करेंगी और फिर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। उन्होने बताया कि इस मामले में यदि विधायक की भूमिका संदिग्ध मिलती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।बता दें कि उन्नाव में भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर वही रहने वाले एक परिवार ने आरोप लगाया था कि विधायक ने नौकरी देने के बहाने उसके घर की एक युवती को बुलाया और फिर उसके साथ दुराचार किया। यही नही इसके बाद उसके भाई अतुल सिंह ने भी गुर्गों संग युवती के साथ गैंगरेप किया। पीड़िता इसकी शिकायत करने माखी थाने पहुंची, तो वहां उसकी एक बात नही सुनी गई। पीड़ित परिवार का कहना है कि इसकी सूचना विधायक के भाई को मिली तो उसने पुलिस के सामने पीड़िता के पूरे परिवार को पीटा और फिर उसके पिता के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कर उसे जेल में ठूंस दिया।आपकों बता दें कि विधायक की गुण्डई इसके बाद भी नही रूकी तो पीड़ित परिवार बीते आठ अप्रैल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास के बाहर पहुंचा और आत्मदाह करने का प्रयास किया। हालाकि वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हे बचा लिया और गौतमपल्ली थाने लेकर पहुंची। बाद में उन्नाव पुलिस को बुलाकर सभी को उसके सिपुर्द कर दिया।बतां दें कि पीड़ित परिवार अपने घर पहुंचा ही था कि तभी देर रात उन्हे सूचना मिली कि जेल में बंद पीड़िता के भाई की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा और प्रशासन ने आनन—फानन में माखी थाना इंचार्ज आनंद सिंह भदौरिया समेत कई पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के साथ ही विधायक के चार गुर्गों के साथ ही उसके भाई अतुल सिंह को जेल भेज दिया।बतां दें कि इसके बाद कुलदीप सिंह सेंगर मुख्यमंत्री के पास पहुंचा और मामले में सफाई देते हुए इस घटना को उसे बदनाम करने के लिए विरोधियों की साजिश बताई। बाद में कुलदीप सिंह सेंगर को मामले में क्लीन चिट दे दी गई। इसकी जानकारी पीड़ित परिवार को मिली तो उसने हंगामा शुरु कर दिया। सरकार की किरकिरी होती देख तुरन्त एसआईटी का गठन हुआ पूरे मामले की दोबारा जांच कराने का आदेश दिए गए।

पीएम रिपोर्ट में ये बताई गई मौत की वजह

पीड़िता के पिता की मौत के बाद डाक्टरों के पैनल ने उसका पोस्टमार्टम किया। जिसकी रिपोर्ट मंगलवार रात पुलिस को मिल गई। डाक्टरों के मुताबिक मारपीट के दौरान उनकी बड़ी आंत फट गई थी। जिसके चलते श्वाग और सेप्टिशिमिया फैलने से उनकी जान चली गई। अब सोंचने वाली बात ये हैं कि मारपीट के बाद परिजनों ने उनका दो बार अल्ट्रासाउन्ड कराया था, लेकिन उसमें आंत फटने की पुष्टि नही हुई। फिलहाल डाक्टरों ने मृतक की आंच का टुकड़ा और विसरा सुरक्षित कर लिया है।