यहां होली तापने के बाद पान खाने से दूर हो जाती हैं कई मर्ज, ये भी दावा

यहाँ होली तापने के बाद पान खाने से दूर हो जाते है कई मर्ज, ये भी दावा
यहां होली तापने के बाद पान खाने से दूर हो जाती हैं कई मर्ज, ये भी दावा

Special Holi In Barabanki

बाराबंकी। देश में जहां मंदिर-मस्जिद के नाम पर सियासत होती रहती है वहीं उत्तर प्रदेश के एक गांव में एक ही जमीन पर आमने-सामने मजार और लगी होली कौमी एकता की मिसाल पेश कर रहे हैं।

मंदिर, मस्जिद हो या अन्य धार्मिक स्थल, दोनों हाथों उठाकर जहां दुआयें कुबूल होती हैं वहीं अपने आराध्य का एहसास होता है और वह धार्मिक स्थल आस्था का केंद्र बन जाता है जहां फिर लोग मन्नतें मांगने के लिये उस दर पर मत्था है।
यूपी की राजधानी लखनऊ व राम लला की नगरी अयोध्या के बगल बसा जनपद बाराबंकी में होली पर्व मनाने की परंपरा जग जाहिर है बाराबंकी सुबेहा के गाँव गुलामबाद स्थित सूफी संत गुलाम शाह की मजार पर हिंदु व मुस्लिम एक साथ मत्था टेकते हैं ।

‘पर्दाफाश डॉट कॉम’ टीम की एक रिपोर्ट-

सुबेहा के गुलामाबाद में सूफी संत गुलाम शाह के मजार के सामने लगने वाली होली में आसपास के जिलों से ही कई सूबे से भी लोग शामिल होते हैं होलिका दहन की परंपरा को यहां विधि विधान से सम्पन्न किया जाता है होलिका में अग्नि प्रज्ज्वलित होने का लोग दोपहर बाद से ही इंतजार करने लगते हैं शाम होने तक होलिका में आग तापने व पूजन करने के लिए हजारो की संख्या में लोग एकत्र हो जाते हैं।

ये है मान्यता-

किंवदंती के अनुसार इस गाँव में एक प्रसिद्ध फकीर थे जिनका नाम गुलाम शाह था उनकी ख्याति सुदूर अंचलो तक फैली थी वह यहां फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि की रात्रि में होलिका दहन करवाते थे यहां की होलिका की अग्नि की ताप से असाध्य रोगियों को राहत मिलने की बात बतायी जाती है यही वजह है बड़ी संख्या में लोग होलिका तापने आते हैं।

इस मर्ज के रोगी आते है यहाँ-
माना जाता है कि होलिका की आंच से मिरगी, कुष्ठ रोग सफेद दाग के रोगी स्वस्थ्य हो जाते हैं। लोगों का मानना है कि कुम्हार जाति के एक श्रद्धालु की सेवा से प्रसन्न होकर फकीर गुलाम हुसैनी ने उसे एक ऐसी जड़ी-बूटी बतायी थी। जिसको पान में रखकर खाने से कई प्रकार के रोग दूर हो जाते हैं इस दवा को लेने के साथ होली तापना अनिवार्य है गुलाम शाह के नाम पर बसे गुलामाबाद में तभी से होली का महत्व बढ़ गया आज भी उसी परिवार के वंशज फाल्गुन पूर्णिमा को पान में दवा देते है।

पर्दाफाश डॉट कॉम के संवाददाता राम मिश्रा ने ग्राउण्ड रिपोर्टिंग करते हुए यहाँ के निवासियों व अलग अलग सूबे से आये हुए श्रद्धालुओं से बात की –

गाँव के निवासी शत्रोहन प्रसाद मिश्र ने बताया कि यह मजार कई वर्षो से स्थित है यहाँ जनपद ही नही अलग अलग प्रदेशो से भी लोगो आते है हमारी जानकारी में लगभग 500 मरीजो को लाभ पहुँचा है।

इंदौर से आये हुए एक श्रद्धालु बलराम ने बताया कि हमारे एक परिचित की बेटी को भी दौरे की बीमारी थी जो यहाँ आने के बाद पूर्णतया ठीक हो गयी इसी को देखते हुए हम भी अपनी बेटी को यहाँ लेकर आये है।

दिल्ली से आये संजय सिंह ने बताया कि हमारे बच्चे को दौरे की बीमारी है हमारे एक परिचित ने हमे यहाँ भेजा है उनका एक बच्चा यहाँ आने ठीक हो गया मैं भी इसी विश्वास से प्रेरित होकर अपने बीमार बच्चे को लेकर आया हूँ।

बाराबंकी। देश में जहां मंदिर-मस्जिद के नाम पर सियासत होती रहती है वहीं उत्तर प्रदेश के एक गांव में एक ही जमीन पर आमने-सामने मजार और लगी होली कौमी एकता की मिसाल पेश कर रहे हैं। मंदिर, मस्जिद हो या अन्य धार्मिक स्थल, दोनों हाथों उठाकर जहां दुआयें कुबूल होती हैं वहीं अपने आराध्य का एहसास होता है और वह धार्मिक स्थल आस्था का केंद्र बन जाता है जहां फिर लोग मन्नतें मांगने के लिये उस दर पर मत्था है।…