पुण्यतिथि वि​शेष : बेमिसाल अब्दुल कलाम को सलाम

नई दिल्लीः हर देश और समाज में कुछ ऐसी शख़्सियतें जन्म लेतीं हैं, जिनका जीवन सारी दुनिया के लिए मिसाल बन जाता है। उनकी कहानी को इतिहास सदियों तक दोहराता है और आने वाली पीढ़ियां उन कहानियों से प्रेरणा लेतीं हैं। ऐसी ही एक शख्सियत है इंडियन मिसाइल मैन के नाम से मशहूर होकर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सर्वोच्च नागरिक की कुर्सी तक पहुंचने वाले डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की। आज उन्ही कलाम की दूसरी पुण्यतिथि है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कलाम को समर्पित एक स्मारक का उद्घाटन किया। यह स्मारक तमिलनाडु के पीकारुंबू में कलाम के पैतृक गांव में स्थित है।

पीएम ने पूर्व राष्ट्रपति के गृहनगर में उस जगह पर बने स्मारक को देशवासियों को समर्पति किया जहां मिसाइल मैन के पार्थिव शरीर को दफनाया गया था। प्रधानमंत्री ने इस मौके पर कलाम की वीणा बजाते हुये लकड़ी से बनी एक प्रतिमा का भी अनावरण किया। उन्होने डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन डीआरडीओ द्वारा बनाये गये इस स्मारक के प्रवेश द्वार पर राष्ट्रध्वज भी फहराया। डीआरडीओ के साथ कलाम दशकों तक वैज्ञानिक के तौर पर जुड़े रहे थे।

कलाम क्यों थे खास —

वे एक वैज्ञानिक थे, जिन्हें शिक्षक की भूमिका बेहद पसंद थी। उनकी पूरी जिंदगी शिक्षा को समर्पित रही, और सबसे खास बात रही उनके अंतिम समय की उस समय भी आईआईटी गोवहाटी के छात्रों को संबोधित कर रहे थे। वैज्ञानिक होने के बावजूद कलाम साहित्य में रुचि रखते थे, कविताएं लिखते थे, वीणा बजाते थे और आध्यात्म से भी गहराई से जुड़े थे। कलाम का जन्म 15 अक्टूबर, 1931 को हुआ था। इनके पिता अपनी नावों को मछुआरों को किराए पर देने का कारोबार करते थे। पिता की मृत्यु के बाद कलाम की जिन्दगी में परेशानियों ने घर बनाना शुरू कर दिया था। मजबूरन आरंभिक पढ़ाई पूरी करने के लिए कलाम को घर-घर अखबार बांटने का भी काम करना पड़ा था। कलाम ने अपने पिता से विरासत में मिले ईमान व आत्मानुशासन और माता से मिले ईश्वर-विश्वास तथा करुणा के अशीर्वाद पर हमेशा विश्वास बनाए रखा।

पूरा जीवन देश को किया समर्पित —

डॉ कलाम ने अपना पूरा जीवन देश को समर्पित किया। उन्होंने मुख्य रूप से एक वैज्ञानिक और विज्ञान के व्यवस्थापक के रूप में चार दशकों तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) संभाला व भारत के नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम और सैन्य मिसाइल के विकास के प्रयासों में भी शामिल रहे। इन्हें बैलेस्टिक मिसाइल और प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी के विकास के कार्यों के लिए भारत में मिसाइल मैन के रूप में जाना जाने लगा। उन्होंने 1974 में भारत द्वारा पहले मूल परमाणु परीक्षण के बाद से दूसरी बार 1998 में भारत के पोखरान-द्वितीय परमाणु परीक्षण में एक निर्णायक, संगठनात्मक, तकनीकी और राजनैतिक भूमिका निभाई। अब्दुल कलाम का पूरा नाम अवुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम था।