व्हाट्सएप से जासूसी: प्रफुल्ल पटेल समेत कई दिग्गज बने शिकार

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व्हाट्सएप से जासूसी: प्रफुल्ल पटेल समेत कई दिग्गज बने शिकार

नई दिल्ली। सोशल मीडिया मैसेजिंग एप व्हाट्सएप की जासूसी को लेकर विवाद थम नहीं रहा है। व्हाट्सएप ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि इसी साल मई में भारतीय के कुछ पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के व्हाट्सएप चैट की जासूसी हुई है। बताया जा रहा है एक इजरायली फर्म ने एक स्पाइवेयर (जासूसी वाले सॉफ्टवेयर) के जरिए भारतीय यूजर्स की जासूसी की है।

Spy On Whatsapp Many Veteran Turned Victim Including Praful Patel :

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस संबंध में व्हाट्सएप से जवाब मांगा है। अभी तक सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक जिन लोगों के व्हाट्सएप की हैकिंग हुई है या जासूसी हुई है उनमें मुख्य रूप से मानवाधिकार कार्यकर्ता, वकील और पत्रकार हैं, जो आदिवासियों और दलितों के लिए अदालत में सरकार से लड़ रहे थे या उनकी बात कर रहे थे।

व्हाट्सएप के एक अधिकारी ने बताया कि भारत में जिन लोगों को निशाना बनाया गया, उनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल, पूर्व लोकसभा सांसद और पत्रकार संतोष भारतीय के नाम भी शामिल हैं। इसके अलावा बेला भाटिया, भीमा कोरेगांव केस में वकील निहाल सिंह राठौड़, जगदलपुर लीगल एड ग्रुप की शालिनी गेरा, दलित एक्टिविस्ट डिग्री प्रसाद चौहान, आनंद तेलतुम्बडे, शुभ्रांशु चौधरी, दिल्ली के आशीष गुप्ता, दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर सरोज गिरी, पत्रकार सिद्धांत सिब्बल और राजीव शर्मा के नाम भी शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि कंपनी ने ऐसे 41 लोगों की पहचान की है, जिनकी जासूसी हुई। इनमें से 21 पत्रकार, वकील और कार्यकर्ता हैं। उन्होंने बताया कि इन लोगों से टोरेंटो स्थित रिसर्च फर्म सिटिजन लैब या फिर खुद व्हाट्सएप ने संपर्क करके जासूसी की जानकारी दी।

बता दें कि व्हाट्सऐप ने गुरुवार को कहा था कि इजराइली स्पाईवेयर ‘पेगासस’ के वैश्विक स्तर पर जासूसी की जा रही है। भारत के कुछ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता भी इस जासूसी का शिकार बने हैं। इसके बाद लोगों की निजता को लेकर नये सिरे से बहस छिड़ गयी थी। इस खुलासे के बाद भारत सरकार ने व्हाट्सऐप से मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है। सरकार ने कंपनी से पूछा है कि उसने करोड़ों भारतीयों की निजता की सुरक्षा के लिये क्या कदम उठाये हैं।

नई दिल्ली। सोशल मीडिया मैसेजिंग एप व्हाट्सएप की जासूसी को लेकर विवाद थम नहीं रहा है। व्हाट्सएप ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि इसी साल मई में भारतीय के कुछ पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के व्हाट्सएप चैट की जासूसी हुई है। बताया जा रहा है एक इजरायली फर्म ने एक स्पाइवेयर (जासूसी वाले सॉफ्टवेयर) के जरिए भारतीय यूजर्स की जासूसी की है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस संबंध में व्हाट्सएप से जवाब मांगा है। अभी तक सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक जिन लोगों के व्हाट्सएप की हैकिंग हुई है या जासूसी हुई है उनमें मुख्य रूप से मानवाधिकार कार्यकर्ता, वकील और पत्रकार हैं, जो आदिवासियों और दलितों के लिए अदालत में सरकार से लड़ रहे थे या उनकी बात कर रहे थे। व्हाट्सएप के एक अधिकारी ने बताया कि भारत में जिन लोगों को निशाना बनाया गया, उनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल, पूर्व लोकसभा सांसद और पत्रकार संतोष भारतीय के नाम भी शामिल हैं। इसके अलावा बेला भाटिया, भीमा कोरेगांव केस में वकील निहाल सिंह राठौड़, जगदलपुर लीगल एड ग्रुप की शालिनी गेरा, दलित एक्टिविस्ट डिग्री प्रसाद चौहान, आनंद तेलतुम्बडे, शुभ्रांशु चौधरी, दिल्ली के आशीष गुप्ता, दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर सरोज गिरी, पत्रकार सिद्धांत सिब्बल और राजीव शर्मा के नाम भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि कंपनी ने ऐसे 41 लोगों की पहचान की है, जिनकी जासूसी हुई। इनमें से 21 पत्रकार, वकील और कार्यकर्ता हैं। उन्होंने बताया कि इन लोगों से टोरेंटो स्थित रिसर्च फर्म सिटिजन लैब या फिर खुद व्हाट्सएप ने संपर्क करके जासूसी की जानकारी दी। बता दें कि व्हाट्सऐप ने गुरुवार को कहा था कि इजराइली स्पाईवेयर 'पेगासस' के वैश्विक स्तर पर जासूसी की जा रही है। भारत के कुछ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता भी इस जासूसी का शिकार बने हैं। इसके बाद लोगों की निजता को लेकर नये सिरे से बहस छिड़ गयी थी। इस खुलासे के बाद भारत सरकार ने व्हाट्सऐप से मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है। सरकार ने कंपनी से पूछा है कि उसने करोड़ों भारतीयों की निजता की सुरक्षा के लिये क्या कदम उठाये हैं।