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श्रीलंका के राष्ट्रपति ने अमेरिका के साथ सैन्य समझौते को किया नामंजूर

Sri Lanka President Maithripala Sirisena Vetoes Military Deal With The Us

By रवि तिवारी 
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नई दिल्ली। श्रीलंका के राष्ट्रपति ने शनिवार को घोषणा की है कि वह अपनी सरकार को अमेरिका के साथ प्रस्तावित सैन्य समझौता नहीं करने देंगे। यह समझौता अमेरिकी सैनिकों को द्वीपीय देश के बंदरगाहों तक मुक्त आवाजाही की अनुमति देता है। राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने कहा कि वह ‘स्टेटस ऑफ फोर्सेज एग्रीमेंट'(एसओएफए) के मसौदे के खिलाफ हैं जिसकी बातचीत दो देश अपने सैन्य संबंधों को और प्रगाढ़ करने के लिए कर रहे हैं।

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देश से विश्वासघात के एग्रीमेंट को नहीं दूंगा मंजूरी

राष्ट्रपति ने कहा, ‘मैं ऐसे किसी समझौते को मंजूरी नहीं दूंगा जो हमारी संप्रभुता और स्वतंत्रता को कमतर करता हो। मौजूदा समय में अनेक समझौतों पर बातचीत चल रही है जो श्रीलंका के लिए नुकसान पहुंचा सकते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘मैं स्टेटस ऑफ फोर्सेज एग्रीमेंट को मंजूरी नहीं दूंगा जो देश से विश्वासघात की बात कहता है। कुछ विदेशी ताकतें हमारे देश को अपना अड्डा बनाना चाहती हैं। मैं उन्हें हमारी संप्रभुता को चुनौती देने की मंजूरी नहीं दूंगा।’

गौरतलब है कि भारत के दक्षिण में स्थित श्रीलंका में अमेरिका की दिलचस्पी ऐसे वक्त में बढ़ रही है जब यह द्वीप भारत और चीन के बीच संघर्ष का क्षेत्र बन गया है। चीन संपूर्ण एशिया को अपने व्यापार और यातायात से जोड़ने के लिए यहां के बंदरगाहों, पावरस्टेशनों तथा हाईवेज का वन बेल्ट व रोड पॉलिसी के तहत निर्माण कर रहा है।

‘राष्ट्रीय हित के खिलाफ कोई समझौता नहीं’

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सिरीसेना ने कहा- जब तक वह पद पर हैं, तब तक श्रीलंका के राष्ट्रीय हित के खिलाफ कोई द्विपक्षीय समझौते नहीं होंगे। उनका कार्यकाल जनवरी में समाप्त हो रहा है। हालांकि, उन्होंने किसी देश का के नाम का जिक्र नहीं किया, जो श्रीलंका पर अपनी सैन्य पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे थे।

एक साल पहले अमेरिका ने घोषणा की थी वह श्रीलंका में समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए तीन करोड़ 90 लाख डॉलर का निवेश कर रहा है क्योंकि चीन ने हिंद महासागर द्वीप पर अपनी रणनीतिक पकड़ बना रखी है। श्रीलंका में चीन ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत भारी निवेश किया। 2009 में श्रीलंका में गृहयुद्ध की समाप्ति के बाद अमेरिका ने श्रीलंका को हथियार की बिक्री रोक दी थी। चीन श्रीलंका को लोन सहित वित्तीय मदद करता रहा है। लोन चुकता न किए जाने के कारण श्रीलंका ने अपने बंदरगाह चीन को 99 वर्षों के लिए लीज पर दे दिया है।

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