श्रीनगर: पूर्व IAS अफसर और JKPM के अध्यक्ष शाह फैसल पर लगा PSA, हिरासत में ही रहेंगे

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श्रीनगर: पूर्व IAS अफसर और JKPM के अध्यक्ष शाह फैसल पर लगा PSA, हिरासत में ही रहेंगे

नई दिल्ली। पूर्व आईएएस अफसर फैसल (Shah Faisal) पर पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) लगाया गया है। शाह फैसल पर प्रशासन ने PSA के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। IAS की नौकरी छोड़कर राजनीति में आने वाले शाह फैसल जम्मू एंड कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (JKPM) के अध्यक्ष हैं। फैसल पिछले साल अगस्त में दिल्ली हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था। वह भारत से बाहर जाने का प्रयास कर रहे थे। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद उन्हें श्रीनगर भेज दिया गया था।

Srinagar Psa Imposed On Former Ias Officer And Jkpm President Shah Faisal Will Remain In Custody :

शाह फैसल की नियमानुसार ऐहतियातन हिरासत की 6 महीने की अवधि पूरी होने वाली थी, जिसको देखते हुए अब उन पर पीएसए लगा दिया गया है। इससे पहले जम्मू-कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, उनके बेटे उमर अब्दुल्ला और पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती पर भी पीएसए लग चुका है।

उमर पर पीएसए के खिलाफ बहन सारा पहुचीं सुप्रीम कोर्ट

शुक्रवार को अपने भाई उमर अब्दुल्ला को पीएसए के तहत हिरासत में रखे जाने के खिलाफ उनकी बहन सारा अब्दुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सारा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को नोटिस जारी कर 2 मार्च तक जवाब मांगा है। सारा अब्दुल्ला ने मामले पर तुरंत कोई फैसला देने का अनुरोध किया था जिसे कोर्ट ने नहीं माना। इस तरह उमर अब्दुल्ला फिलहाल 2 मार्च तक हिरासत में ही रहेंगे।

क्या है जन सुरक्षा अधिनियम?

जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) उन लोगों पर लगाया जा सकता है, जिन्हें सुरक्षा और शांति के लिए खतरा माना जाता हो। 1978 में शेख अब्दुल्ला ने इस कानून को लागू किया था। 2010 में इसमें संशोधन किया गया था, जिसके तहत बगैर ट्रायल के ही कम से कम 6 महीने तक जेल में रखा जा सकता है। राज्य सरकार चाहे तो इस अवधि को बढ़ाकर दो साल तक भी किया जा सकता है।  

नई दिल्ली। पूर्व आईएएस अफसर फैसल (Shah Faisal) पर पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) लगाया गया है। शाह फैसल पर प्रशासन ने PSA के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। IAS की नौकरी छोड़कर राजनीति में आने वाले शाह फैसल जम्मू एंड कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (JKPM) के अध्यक्ष हैं। फैसल पिछले साल अगस्त में दिल्ली हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था। वह भारत से बाहर जाने का प्रयास कर रहे थे। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद उन्हें श्रीनगर भेज दिया गया था। शाह फैसल की नियमानुसार ऐहतियातन हिरासत की 6 महीने की अवधि पूरी होने वाली थी, जिसको देखते हुए अब उन पर पीएसए लगा दिया गया है। इससे पहले जम्मू-कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, उनके बेटे उमर अब्दुल्ला और पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती पर भी पीएसए लग चुका है। उमर पर पीएसए के खिलाफ बहन सारा पहुचीं सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को अपने भाई उमर अब्दुल्ला को पीएसए के तहत हिरासत में रखे जाने के खिलाफ उनकी बहन सारा अब्दुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सारा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को नोटिस जारी कर 2 मार्च तक जवाब मांगा है। सारा अब्दुल्ला ने मामले पर तुरंत कोई फैसला देने का अनुरोध किया था जिसे कोर्ट ने नहीं माना। इस तरह उमर अब्दुल्ला फिलहाल 2 मार्च तक हिरासत में ही रहेंगे। क्या है जन सुरक्षा अधिनियम? जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) उन लोगों पर लगाया जा सकता है, जिन्हें सुरक्षा और शांति के लिए खतरा माना जाता हो। 1978 में शेख अब्दुल्ला ने इस कानून को लागू किया था। 2010 में इसमें संशोधन किया गया था, जिसके तहत बगैर ट्रायल के ही कम से कम 6 महीने तक जेल में रखा जा सकता है। राज्य सरकार चाहे तो इस अवधि को बढ़ाकर दो साल तक भी किया जा सकता है।