परिषदीय स्कूलों के स्वेटर टेंडर पर निर्वाचन आयोग की आपत्ति

परिषदीय स्कूलों के स्वेटर टेंडर पर निर्वाचन आयोग की आपत्ति

लखनऊ। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद् की ओर से परिषदीय स्कूलों के करीब 1 लाख 76 हजार बच्चों को स्कूली ड्रेस का स्वेटर देने के लिए जारी किए गए टेंडर पर राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से आपत्ति दर्ज करवाते हुए विभाग से 10 नंवबर तक स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग का कहना है कि जब ​राज्य में निकाय चुनावों के लिए आचार संहिता जारी है तो ऐसे में स्थानिक अधिकारियों द्वारा किए जा रहे लोक उपयोगिता की नैत्यिक प्रक्रिया से जुड़े कार्यों के टेंडरों के अलावा किसी भी टेंडर के लिए आयोग की स्वीकृति आवश्यक है। बेसिक शिक्षा विभाग ने हाल ही में स्वेटर खरीद के लिए जारी किए टेंडरों के लिए किसी तरह की अनुमति नहीं ​ली है। जिसके लिए विभाग को नोटिस कर अपना पक्ष रखने को कहा गया है।

इसके साथ ही आयोग ने बेसिक शिक्षा विभाग की उप निदेशक ललिता प्रदीप द्वारा मीडिया के समक्ष दिए गए उस बयान पर भी स्पष्टीकरण मांगा है जिसमें उन्होंने कहा था कि स्वेटर वितरण की योजना पहले से ही तैयार थी इस लिए निर्वाचन आयोग की मंजूरी लेना आवश्यक नहीं था। आयोग की ओर से कड़े शब्दों में उप निदेशक के बयान पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा गया है कि उन्हें चुनाव आचार संहिता के सुसंगत प्रवाधानों की जानकारी नहीं है या फिर उन्होंने जानबूझ कर आचार संहित के विरुद्ध किए लिए गए फैसले को सही ठहराने का प्रयास किया है।

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आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पहली बार परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले 1.76 लाख छात्रों को स्कूल ड्रेस और किताबों के अलावा स्कूल बैग और सर्दियों को ध्यान में रखते हुए जूते मोजे और स्कूल स्वेटर देने का प्रवाधान किया है। इस प्रक्रिया के तहत स्कूल बैग तो छात्रों को मिल चुका है लेकिन जूते मोजे और स्वेटर अभी तक खरीदे नहीं जा सके। प्रदेश में गिरते पारे को देखते हुए मीडिया द्वारा इस विषय को उठाए जाने के बाद सक्रिय हुए बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को मुख्यालय से निर्देश देकर नवंबर के अंतिम सप्ताह तक स्वेटर वितरण सुनिश्चित करवाने के निर्देश दिए गए थे। जिसके लिए हर जिले की प्रशासनिक वेब पोर्टल के माध्यम से टे​डंर जारी कर निविदा मांगी गई है। इस प्रक्रिया के शुरू होने के साथ ही निर्वाचन आयोग ने आचार संहिता का हवाला देते हुए आपत्ति जता दी है। जिसके बाद टेंडरिंग की प्रक्रिया एक बार फिर लटकती नजर आ रही है।

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