पैर छूने व माला पहनाने की प्रथा से दूर रहें : मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर

jai-ram-thakur

नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पार्टी कार्यकर्ताओं व उनसे मिलने के लिए आने वाले लोगों से उनके पैर छूने व उन्हें माला पहनाने की प्रथा से दूर रहने को कहा है। जयराम ठाकुर ने शनिवार को पार्टी कार्यकर्ताओं से आगंतुकों को शॉल, माला, गुलदस्ते या स्मृति चिन्ह लाने को हतोत्साहित करने को कहा है, क्योंकि इससे धन बर्बाद होता है।

Stay Away From The Practice Of Touching Feet And Wearing Garlands Chief Minister Jairam Thakur :

मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने कहा कि गुलदस्ता लाने की बजाय आगंतुक उन्हें एक फूल दे सकते हैं। ठाकुर का यह निर्देश हाल में उनसे मिलने आए एक 80 साल के व्यक्ति द्वारा उनके पैर छूने की कोशिश करने के बाद आया है। मुख्यमंत्री ने कहा, “हर व्यक्ति का सम्मान करना राज्य का कर्तव्य है। किसी भी व्यक्ति को मेरे या मेरे मंत्रियों के पैर नहीं छूना चाहिए। हमें अपने दिल में आदर का भाव रखना चाहिए।”

मुख्यमंत्री कार्यालय ने लोगों से गुलदस्ते व मालाएं खरीदने की बजाय दिल खोलकर मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान देने के लिए कहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते साल ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा था कि लोगों को उन्हें गुलदस्ते की बजाय उपयोगी सामग्री जैसे पुस्तकें या रुमाल उपहार में देने चाहिए।

नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पार्टी कार्यकर्ताओं व उनसे मिलने के लिए आने वाले लोगों से उनके पैर छूने व उन्हें माला पहनाने की प्रथा से दूर रहने को कहा है। जयराम ठाकुर ने शनिवार को पार्टी कार्यकर्ताओं से आगंतुकों को शॉल, माला, गुलदस्ते या स्मृति चिन्ह लाने को हतोत्साहित करने को कहा है, क्योंकि इससे धन बर्बाद होता है।मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने कहा कि गुलदस्ता लाने की बजाय आगंतुक उन्हें एक फूल दे सकते हैं। ठाकुर का यह निर्देश हाल में उनसे मिलने आए एक 80 साल के व्यक्ति द्वारा उनके पैर छूने की कोशिश करने के बाद आया है। मुख्यमंत्री ने कहा, "हर व्यक्ति का सम्मान करना राज्य का कर्तव्य है। किसी भी व्यक्ति को मेरे या मेरे मंत्रियों के पैर नहीं छूना चाहिए। हमें अपने दिल में आदर का भाव रखना चाहिए।"मुख्यमंत्री कार्यालय ने लोगों से गुलदस्ते व मालाएं खरीदने की बजाय दिल खोलकर मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान देने के लिए कहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते साल 'मन की बात' कार्यक्रम में कहा था कि लोगों को उन्हें गुलदस्ते की बजाय उपयोगी सामग्री जैसे पुस्तकें या रुमाल उपहार में देने चाहिए।