आईपीएल में बड़े पैमाने पर सट्टेबाजी का खुलासा, एसटीएफ ने 8 को किया गिरफ्तार

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लखनऊ। आईपीएल मैचों पर सट्टे के खेल का भंड़ाफोड़ करते हुए यूपी एसटीएफ ने कानपुर और वाराणसी जनपद से 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ ने उनके पास से 30.53 लाख रुपये, 350 विदेशी मुद्रा, दो लग्जरी गाडिय़ां और अन्य सामान बरामद किया है। सट्टे का यह खेल कानपुर, वारणासी, प्रयागराज, फतेहपुर और आगरा तक फैला हुआ था।

Stf Busted Gang Of Ipl Betting :


एसएसपी एसटीएफ अभिषेक सिंह ने बताया कि कुछ दिनों पहले शुरू हुई आईपीएल 2019 में बड़े पैमाने पर सट्टे खेलाने की सूचना मिल रही थी। इस सूचना पर एसटीएफ की एक टीम को छानबीन के लिए लगाया गया था। छानबीन में इस बात का पता चला कि कानपुर और वाराणसी जनपद में सट्टे का एक्सचेंज बनाकर सट्ट का खेल संचालित किया जा रहा है। इस धंधे का लीडर कानपुर निवासी जीतेन्द्र उर्फ जीतू हैं।

इसके बाद एसटीएफ की एक टीम कानपुर पहुंची। छानबीन पर पता चला कि कानपुर में नौबस्ता और गोविंदनगर इलाके मेें दो मकानों से सट्टे का खेल संचालित होता है। इसके बाद एसटीएफ की टीम ने कानपुर पुलिस की मदद से दोनों मकानों पर छापा मारा और वहां से कानपुर निवासी आशीष शिवहरे, कानपुर निवासी सुमित, कानपुर निवासी मोहित,, कानपुर निवासी जितेन्द्र कुमार और कानपुर निवासी हिमांशु को गिरफ्तार किया। मौके से एसटीएफ को 2.78 लाख रुपये, सट्टे के लिए प्रयोग होने वाले दो दो बेटिंग कन्र्वशेेसन बाक्स, पांच लैपटाप, 30 मोबाइल फोन, 3 रिमोट, रजिस्टर और एक मर्सडीज और फाच्र्यूनर गाड़ी बरामद की।


वाराणसी से तीन आरोपी गिरफ्तार
कानपुर में छापेमारी के बाद एसटीएफ की टीम ने वाराणसी में छानबीन की तो पता चला कि लंका इलाके में एक घर से सट्टेबाजी का खेल संचालित होता है। इसके बाद एसटीएफ ने वाराणसी पुलिस की मदद से उस घर पर दबिश देते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने अपना नाम वाराणासी निवासी अशोक सिंह, वाराणसी निवासी सुनील पाल और वाराणसी निवासी विक्की खान बताया। मौके से एसटीएफ को 27.75 लाख रुपये, 6 मोबाइल फोन और हिसाब- किताब से संबंधित डायरी बरामद की है।


लंदन के बने एप से करते हैं कारोबार
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बातया कि मुम्बई में अमन नामक एक बड़े बुकी के माध्मय से औरेन्ज नाम का लाइव एप अपने लैपटाप पर डाउनलोड कर रखा है। यह एप लन्दन की एक कम्पनी ने तैयार किया है। जिसमें बेट आईडी, बुकी,पन्टर का विवरण, रनर टीम का नाम, बेटिंग रेट, बेट प्राइज, डेट व आईपी एड्रेस लाइव दिखता है। लैपटाप में निरन्तर इसका लाग भी मेन्टेन होता रहता है। इस ऐप में जो बेटिंग रेट दिखता है उसे बुकी कन्र्वसेशन बेटिंग बाक्स में लगे माईक से एनाउन्स करता है। इस बाक्स में कई बुकीज के मोबाइल आनलाइन होते हैं जो इस भाव सुनकर अपनी बेट लगाते हैैं। बाक्स में लगे स्पीकर के माध्मम से मुख्य बुकी अन्य बुकी की आवाज को सुनता है और कन्र्वसेशन स्वत: रिकार्ड भी होता रहता है। मुख्य बुकी व उससे जुड़े हुए अन्य बुकी के मध्य पैसे के लेनदेन का े लेकर विवाद की स्थिति में कन्वसेशन बाक्स में रिकार्ड वायस को सुनाकर विवाद का समाधान किया जाता है। यह कारोबार विश्वास की नींव पर टिका होता है इसलिए परिचित बुकी ही बेटिंग में शामिल किये जाते हैं। पैसे का लेनदेन हवाला के माध्यम से किया जाता है। किसी भी जनपद में बुकी/पन्टर से पैसे का लेनदेन उसी जनपद में मुख्य बुकी अपने खास लोगों से करता है।


इस तरह होता है धंधे में लेनदेन
बुकी कमीशन व कटिंग के माध्यम से इस कारोबार में धन कमाता हैं। अगर बुकी एक प्रतिशत कमीशन पर कार्य कर रहा है तो 100 रूपया हारने पर मुख्य बुकी को एक रुपये कमीशन मिलता है। जीतने पर कुछ भी नहीं मिलता है। इसी तरह अगर मुख्य बुकी द्वारा उदाहरण के तौर पर 42/44 भाव एनाउन्स किया गया तो इसका अभिप्राय यह है कि फेवरेट (जिताऊ टीम) टीम को 42 व उसकी अपोजिट टीम को 44 का रेट दिया गया है। यदि किसी ने फवरेट टीम पर एक लाख लगाया तो बेट जीतने पर उसे 42 हजार मिलेंगे और हारने पर एक लाख रुपये अदा करने होंगे। अपोजिट टीम पर एक लाख की बेट लगाये जाने पर यदि कोई हारता है तो उसे 44 हजार रुपये देने पड़ेंगे और जीतता है तो एक लाख मिलता है। छोटे बुकी द्वारा 42/44 रेट पर लगाई गयी बेट के पैसे से ही उसके उपर वाला बुकी यदि 43/45 की बेट लगाता है तो जीतने की दशा पर उसे अपने नीचे वाले व्यक्ति को 42 हजार देने होते हैं ओर उसे 43 हजार रुपये प्राप्त होंगे। इस प्रकार अपने छोटे बुकी के पैसे से ही उसके उपर वाले बुकी द्वारा एक हजार रूपये का लाभ कमाया गया, जिसे कटिंग कहा जाता है।


मर्सडीज गाड़ी से घूमता है लीडर
इस गैंग का सरगना जितेन्द्र उर्फ जीतू वर्ष 1997 से 2006 तक दुबई मे रहकर ट्रेडिंग कम्पनी चलाता था वहीं पर इसने बेटिंग कारोबार में महारथ हासिल की। इस व्यवसाय से अर्जित आय से मुम्बई, लखनऊ, फतेहपुर व कानपुर नगर में महंगे मकान खरीदा। फतेहपुर में आश्रम पेट्रोलियम के नाम से पेट्रोल पम्प स्थापित किया। इसके पास मर्सडीज व वर्ना जैसी मंहगी कारें हैं। मंहगे होटलों में रुकने व देश- विदेश घुमने का शौकीन है। फिलहाल सट्टेबाजी के इस धंधे का लीडर पुलिस के हत्थे नहीं लगा है और उसकी तलाश की जा रही है। जतेन्द्र उर्फ जीतू से दिल्ली, मुम्बई, अजमेर, आगरा, रायपुर, लखनऊ, फतेहपुर, वाराणसी, व कानपुर के बुकी जुड़े हैं।

लखनऊ। आईपीएल मैचों पर सट्टे के खेल का भंड़ाफोड़ करते हुए यूपी एसटीएफ ने कानपुर और वाराणसी जनपद से 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ ने उनके पास से 30.53 लाख रुपये, 350 विदेशी मुद्रा, दो लग्जरी गाडिय़ां और अन्य सामान बरामद किया है। सट्टे का यह खेल कानपुर, वारणासी, प्रयागराज, फतेहपुर और आगरा तक फैला हुआ था।


एसएसपी एसटीएफ अभिषेक सिंह ने बताया कि कुछ दिनों पहले शुरू हुई आईपीएल 2019 में बड़े पैमाने पर सट्टे खेलाने की सूचना मिल रही थी। इस सूचना पर एसटीएफ की एक टीम को छानबीन के लिए लगाया गया था। छानबीन में इस बात का पता चला कि कानपुर और वाराणसी जनपद में सट्टे का एक्सचेंज बनाकर सट्ट का खेल संचालित किया जा रहा है। इस धंधे का लीडर कानपुर निवासी जीतेन्द्र उर्फ जीतू हैं।

इसके बाद एसटीएफ की एक टीम कानपुर पहुंची। छानबीन पर पता चला कि कानपुर में नौबस्ता और गोविंदनगर इलाके मेें दो मकानों से सट्टे का खेल संचालित होता है। इसके बाद एसटीएफ की टीम ने कानपुर पुलिस की मदद से दोनों मकानों पर छापा मारा और वहां से कानपुर निवासी आशीष शिवहरे, कानपुर निवासी सुमित, कानपुर निवासी मोहित,, कानपुर निवासी जितेन्द्र कुमार और कानपुर निवासी हिमांशु को गिरफ्तार किया। मौके से एसटीएफ को 2.78 लाख रुपये, सट्टे के लिए प्रयोग होने वाले दो दो बेटिंग कन्र्वशेेसन बाक्स, पांच लैपटाप, 30 मोबाइल फोन, 3 रिमोट, रजिस्टर और एक मर्सडीज और फाच्र्यूनर गाड़ी बरामद की।


वाराणसी से तीन आरोपी गिरफ्तार
कानपुर में छापेमारी के बाद एसटीएफ की टीम ने वाराणसी में छानबीन की तो पता चला कि लंका इलाके में एक घर से सट्टेबाजी का खेल संचालित होता है। इसके बाद एसटीएफ ने वाराणसी पुलिस की मदद से उस घर पर दबिश देते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने अपना नाम वाराणासी निवासी अशोक सिंह, वाराणसी निवासी सुनील पाल और वाराणसी निवासी विक्की खान बताया। मौके से एसटीएफ को 27.75 लाख रुपये, 6 मोबाइल फोन और हिसाब- किताब से संबंधित डायरी बरामद की है।


लंदन के बने एप से करते हैं कारोबार
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बातया कि मुम्बई में अमन नामक एक बड़े बुकी के माध्मय से औरेन्ज नाम का लाइव एप अपने लैपटाप पर डाउनलोड कर रखा है। यह एप लन्दन की एक कम्पनी ने तैयार किया है। जिसमें बेट आईडी, बुकी,पन्टर का विवरण, रनर टीम का नाम, बेटिंग रेट, बेट प्राइज, डेट व आईपी एड्रेस लाइव दिखता है। लैपटाप में निरन्तर इसका लाग भी मेन्टेन होता रहता है। इस ऐप में जो बेटिंग रेट दिखता है उसे बुकी कन्र्वसेशन बेटिंग बाक्स में लगे माईक से एनाउन्स करता है। इस बाक्स में कई बुकीज के मोबाइल आनलाइन होते हैं जो इस भाव सुनकर अपनी बेट लगाते हैैं। बाक्स में लगे स्पीकर के माध्मम से मुख्य बुकी अन्य बुकी की आवाज को सुनता है और कन्र्वसेशन स्वत: रिकार्ड भी होता रहता है। मुख्य बुकी व उससे जुड़े हुए अन्य बुकी के मध्य पैसे के लेनदेन का े लेकर विवाद की स्थिति में कन्वसेशन बाक्स में रिकार्ड वायस को सुनाकर विवाद का समाधान किया जाता है। यह कारोबार विश्वास की नींव पर टिका होता है इसलिए परिचित बुकी ही बेटिंग में शामिल किये जाते हैं। पैसे का लेनदेन हवाला के माध्यम से किया जाता है। किसी भी जनपद में बुकी/पन्टर से पैसे का लेनदेन उसी जनपद में मुख्य बुकी अपने खास लोगों से करता है।


इस तरह होता है धंधे में लेनदेन
बुकी कमीशन व कटिंग के माध्यम से इस कारोबार में धन कमाता हैं। अगर बुकी एक प्रतिशत कमीशन पर कार्य कर रहा है तो 100 रूपया हारने पर मुख्य बुकी को एक रुपये कमीशन मिलता है। जीतने पर कुछ भी नहीं मिलता है। इसी तरह अगर मुख्य बुकी द्वारा उदाहरण के तौर पर 42/44 भाव एनाउन्स किया गया तो इसका अभिप्राय यह है कि फेवरेट (जिताऊ टीम) टीम को 42 व उसकी अपोजिट टीम को 44 का रेट दिया गया है। यदि किसी ने फवरेट टीम पर एक लाख लगाया तो बेट जीतने पर उसे 42 हजार मिलेंगे और हारने पर एक लाख रुपये अदा करने होंगे। अपोजिट टीम पर एक लाख की बेट लगाये जाने पर यदि कोई हारता है तो उसे 44 हजार रुपये देने पड़ेंगे और जीतता है तो एक लाख मिलता है। छोटे बुकी द्वारा 42/44 रेट पर लगाई गयी बेट के पैसे से ही उसके उपर वाला बुकी यदि 43/45 की बेट लगाता है तो जीतने की दशा पर उसे अपने नीचे वाले व्यक्ति को 42 हजार देने होते हैं ओर उसे 43 हजार रुपये प्राप्त होंगे। इस प्रकार अपने छोटे बुकी के पैसे से ही उसके उपर वाले बुकी द्वारा एक हजार रूपये का लाभ कमाया गया, जिसे कटिंग कहा जाता है।


मर्सडीज गाड़ी से घूमता है लीडर
इस गैंग का सरगना जितेन्द्र उर्फ जीतू वर्ष 1997 से 2006 तक दुबई मे रहकर ट्रेडिंग कम्पनी चलाता था वहीं पर इसने बेटिंग कारोबार में महारथ हासिल की। इस व्यवसाय से अर्जित आय से मुम्बई, लखनऊ, फतेहपुर व कानपुर नगर में महंगे मकान खरीदा। फतेहपुर में आश्रम पेट्रोलियम के नाम से पेट्रोल पम्प स्थापित किया। इसके पास मर्सडीज व वर्ना जैसी मंहगी कारें हैं। मंहगे होटलों में रुकने व देश- विदेश घुमने का शौकीन है। फिलहाल सट्टेबाजी के इस धंधे का लीडर पुलिस के हत्थे नहीं लगा है और उसकी तलाश की जा रही है। जतेन्द्र उर्फ जीतू से दिल्ली, मुम्बई, अजमेर, आगरा, रायपुर, लखनऊ, फतेहपुर, वाराणसी, व कानपुर के बुकी जुड़े हैं।