दिल्ली: महिलाओं की कट रही चोटियां, गांव में दहशत और सन्नाटा

छावला के गांव कांगनहेड़ा में सोमवार दहशत लेकर आया। रविवार की पूरी रात जागने के बाद यहां के युवा, बुजुर्ग और बच्चे सब डरे हुए हैं। सबसे ज्यादा दहशत महिलाओं में है। एक दिन पहले गांव में रहस्यमयी ढंग से तीन महिलाओं की चोटियां कट गईं। सोमवार को गांव में छोटी-छोटी बच्चियों से लेकर बुजुर्ग महिलाएं किसी ने बालों में चोटी नहीं गूथी। इक्का-दुक्का को छोड़कर महिलाएं जूड़ा पहनकर और बालों में कपड़ा बांधकर घरों में कैद हैं। गांववालों में तांत्रिक शक्तियों से लेकर अलग-अलग तरह की आपराधिक गतिविधियों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। हिन्दुस्तान की टीम ने सोमवार को पूरी शाम गांव में गुजारकर इस अजीबोगरीब घटना के बारे में जाना। कुछ झलकियां

जी आप सही जगह आई हैं
छावला से बाईं तरफ जा रही सड़क के आखिरी छोर पर साफ-सुथरा और खूबसूरत घरों वाला कांगनहेड़ी गांव है। तकरीबन 5000 की जनसंख्या वाले गांव की 70 फीसदी महिलाएं एमसीडी में सफाई कर्मचारी हैं, गांव के पुरुष भी सरकारी नौकरियों में लगे हैं। इस गांव में इसी प्रतिशत की तरह ही 70 फीसदी आबादी बाकी से काफी सम्पन्न दिखाई देती है। हरियाणा से जुड़ा होने के कारण यहां की साधारण बोलचाल में हरियाणवी भाषा का पूरा दखल है। गांव में शाम तकरीबन तीन बजे हम दाखिल हुए। तेज बारिश से गांव की पक्की सड़कें धुल गई थीं। कुछ पुरुष सड़क किनारे बैठे थे। पूछा कि क्या यही कांगनहेड़ा गांव है, तो गांव के धरमवीर ने कहा कि जी, आप सही जगह आई हैं। यही वह गांव है जहां औरतों की तीन चोटियां कट गई हैं। गांव में दहशत का माहौल साफ नजर आ रहा है। यहां के बच्चे पूरे दिन स्कूल नहीं गए। सफाई कर्मचारी का काम करने वाली महिलाएं भी बहुत कम संख्या में काम में गईं।

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पुलिस तो उल्टा हमें ही डरा रही
गांववालों ने कहा कि मेरी भाभी मुनेश कल घर पहुंची थीं और उनकी चोटी कट गई। इतना तेज दर्द उन्होंने सहा। काफी देर बेहोश रहीं। और आज पूरा दिन सब दहशत में रहे। फिर आठ बजे और रात साढ़े 11 बजे भी एक महिला की चोटी कट गई। और पुलिस है कि जांच में न जाने क्या-क्या कह रही है। पुलिस तो यह भी कयास लगा रही कि इसमें उनके घरवालों का भी हाथ हो सकता है। कभी केमिकल तो कभी दूसरे कारणों पर बात हो रही है। हां, हम यह मानते हैं कि यह गांव में दहशत फैलाने की साजिश तो है। लेकिन हम लोगों को कुछ सुराग तो मिले।

औरतों ने कर दिए टोटके
गांव के घरों के मुख्य दरवाजों पर सुबह ही हल्दी से हाथों की थापें  लगा दी गई हैं। दहशत में घर की महिलाओं ने नींबू, मिर्च, प्याज और नीम के पत्ते जैसे न जाने कितने टोटके कर दिए हैं। यहां की महिलाओं में सिर्फ चोटी कटने की दहशत नहीं है। उन्हें उस असहनीय सिरदर्द का भी डर है जो उन तीन बुजुर्ग महिलाओं को हुआ। पीड़िता श्रीदेवी कहती हैं कि मैं तो छोटे बेटे के साथ घर लौटी ही थी कि इतना तेज सिरदर्द हुआ कि बाल नोचने लगी। मुझे इतना याद है कि जैसे किसी ने पीछे से मेरी चोटी काट दी हो, जो सोफे के नीचे थी। आसपास कोई नहीं था। तीन मिनट के भीतर यह सब हुआ। बच्चे दौड़ के आए तो वे भी देखकर डर गए। मुझे अस्पताल लेकर गए, तब इलाज के बाद मुझे होश आया।

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