किसानों की फसलें उजाड़ रहे आवारा मवेशी

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किसानों की फसलें उजाड़ रहे आवारा मवेशी

अमेठी। उत्तर प्रदेश सरकार ने अवैध बूचड़खाने बंद करवाने के साथ—साथ गोवंश को काटे जाने पर पूरी तरह से पबंदी लगा रखी है। गोकशी और गोवंश को काटे जाने की खिलाफत करने वालों ने सरकार के इस फैसले का जबर्दस्त स्वागत किया था। लेकिन सरकार के उस फैसले के दुष्परिणाम अब सामने आने लगे हैं, क्योंकि आवारा मवेशियों की संख्या तेजी से बढ़ चली है। इनमें मुख्यत: ऐसे जानवर हैं जो उनके मालिकों के लिए किसी काम के नहीं हैं और कृषि कार्यों में उनका प्रयोग चलन से बाहर हो चुका है। जिस वजह से इन मालिकों ने उन्हें छुड़ दिया है।

ऐसे आवार मवेशियों के झुंड शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों में नजर आ रहे हैं। जो शहरों में सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं तो ग्रामीण इलाकों में किसानों की फसलों को बरबाद कर रहे हैं।

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जाम और दुर्घटना का कारण बन रहे आवारा जानवर-

शहरों और कस्बों की सड़कों पर इन छुट्टा जानवरों का आतंक अलग तरह का है। सड़क के किनारे कचरे में मुंह मारते घूमते ये आवारा जानवर कब किस दुर्घटना को अंजाम दे डालें इसका अंदाजा लगाना असंभव है। पेट भरने के बाद आवारा जनवरों का झुंड सड़क पर ही डेरा जमा देता है। जिस वजह से आए दिन यातायात प्रभावित होता है।

सरकारी स्तर पर आवारा जानवरों को लेकर बनाई गई योजना को पूरी तरह से लागू नहीं किया जा सका है। स्थानीय निकाय के अधिकारी आवारा जानवरों की समस्या को लेकर अब तक गंभीर नहीं हुए हैं और ऐसे जानवरों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

शहरी किसानों के लिए बड़ी समस्या बन रहे ये आवारा मवेशी –

मुसाफिरखाना कस्बे के किसान शारदा प्रसाद बताते हैं कि मंहगाई ने पहले ही किसानों की कमर तोड़ रखी है, ऊपर से ये आवारा मवेशी फसलों को तहस नहस करने में लगे हैं। बड़ी उम्मीद और मोटी लागत से इलाके के कई किसानों ने सब्जी की खेती की है, लेकिन आवार जानवर आए दिन नुकसान कर देते हैं। मजबूरी में परिवार को कोई न कोई सदस्य खेतों की रखवाली के लिए तैनात रहता है। जरा सी चूक होने पर जानवर खेत में घुस जाते हैं।

बूचड़खाने बंद होने से खराब हुई स्थिति —

किसानों की माने तो आवारा मवेशियों की समस्या बूचड़खानों पर रोक लगने से खड़ी हुई है। अब तक लोग अपने बछड़ों को बांध कर रखते थे, क्योंकि व्यापारी उन्हें खरीद लेते थे। सरकार की सख्ती के बाद व्यापारियों ने बछड़े खरीदने बंद कर दिए तो लोगों ने अपने बछड़े शहरी इलाकों में छोड़ना शुरू कर दिया है। जिन्हें शहर की गलियों में खाने पीने को मिल जाता है। बीते दो तीन महीनों में ऐसे जानवरों की तादात तेजी से बढ़ी है। जब इनका पेट शहरों में नहीं भरता तो ये शहरों से बाहरी इलाकों की ओर पलायन कर जाते हैं और शहरी आबादी से लगे खेतों में खड़ी फसलों को बर्बाद कर डालते हैं।

रिपोर्ट@राम मिश्रा

अमेठी। उत्तर प्रदेश सरकार ने अवैध बूचड़खाने बंद करवाने के साथ—साथ गोवंश को काटे जाने पर पूरी तरह से पबंदी लगा रखी है। गोकशी और गोवंश को काटे जाने की खिलाफत करने वालों ने सरकार के इस फैसले का जबर्दस्त स्वागत किया था। लेकिन सरकार के उस फैसले के दुष्परिणाम अब सामने आने लगे हैं, क्योंकि आवारा मवेशियों की संख्या तेजी से बढ़ चली है। इनमें मुख्यत: ऐसे जानवर हैं जो उनके मालिकों के लिए किसी काम के नहीं हैं…
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