ममता सरकार और राज्यपाल के बीच तनातनी, कैलाश विजयवर्गीय ने कहा-संविधान का पालन नहीं करती है सरकार

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ममता सरकार और राज्यपाल के बीच तनातनी, कैलाश विजयवर्गीय ने कहा-संविधान का पालन नहीं करती है सरकार

कोलकता। पश्चिम बंगाल में ममता सरकार और राज्यपाल जगदीप धनखड़ के बीच तनातनी जारी है। इस बार राज्यपाल का उत्तर 24 परगना का दौरा विवाद का कारण बना है। राज्यपाल आज उत्तर 24 परगना के दौरे पर जायेंगे। वहीं, इसको लेकर उत्तर 24 परगना के ​डीएम ने एक चिठ्ठी लिखी है, जिसमें लिखा है कि जब तक राज्य सरकार से अनुमति नहीं मिलती तब तक वह किसी को निमंत्रण नहीं भेजेंगे।

Struggle Between Mamtas Government And The Governor :

इसके साथ ही चिठ्ठी में लिखा है ​कि बैठक में कोई अधिकारी भी नहीं शामिल होंगे क्योंकि सभी वरिष्ठ अफसर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उत्तर बंगाल दौरे पर साथ गए हुए है। वहीं, इसको लेकर राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा है कि ऐसा लगता है कि​ पश्चिम बंगाल में किसी प्रकार की सेंसरशिप है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह असंवैधानिक है। मैं राज्य सरकार के अंतर्गत नहीं हूं।

उन्होंने अधिकारियों के इस रवैए को लेकर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि, क्या वह सरकार के अधीन है? अगर उन्हें किसी के साथ बातचीत करनी है तो राज्य सरकार की अनुमति की जरूरत क्यों लेनी है? राज्यपाल ने कहा कि मेरी यात्रा के बारे में 17 अक्टूबर को जिला प्रशासन को सूचित कर दिया गया था। जिलाधिकारी ने इस पर जवाब दिया कि सरकार की अनुमति के बाद अनुमति दी जायेगी। यह पूरी तरह असंवैधानिक है।

राज्यपाल ने सवाल पूछा कि क्या मैं राज्य सरकार के अंतर्गत नहीं हूं। वहीं, इस मामले को लेकर भाजपा के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ममता बनर्जी की सरकार है, यह संविधान का पालन नहीं करती है। अगर राज्य के राज्यपाल को अनुमति लेनी है तो इसका मतलब है कि ममता जी का कानून पश्चिम बंगाल में काम करता है, ना कि देश का कानून।

कोलकता। पश्चिम बंगाल में ममता सरकार और राज्यपाल जगदीप धनखड़ के बीच तनातनी जारी है। इस बार राज्यपाल का उत्तर 24 परगना का दौरा विवाद का कारण बना है। राज्यपाल आज उत्तर 24 परगना के दौरे पर जायेंगे। वहीं, इसको लेकर उत्तर 24 परगना के ​डीएम ने एक चिठ्ठी लिखी है, जिसमें लिखा है कि जब तक राज्य सरकार से अनुमति नहीं मिलती तब तक वह किसी को निमंत्रण नहीं भेजेंगे। इसके साथ ही चिठ्ठी में लिखा है ​कि बैठक में कोई अधिकारी भी नहीं शामिल होंगे क्योंकि सभी वरिष्ठ अफसर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उत्तर बंगाल दौरे पर साथ गए हुए है। वहीं, इसको लेकर राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा है कि ऐसा लगता है कि​ पश्चिम बंगाल में किसी प्रकार की सेंसरशिप है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह असंवैधानिक है। मैं राज्य सरकार के अंतर्गत नहीं हूं। उन्होंने अधिकारियों के इस रवैए को लेकर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि, क्या वह सरकार के अधीन है? अगर उन्हें किसी के साथ बातचीत करनी है तो राज्य सरकार की अनुमति की जरूरत क्यों लेनी है? राज्यपाल ने कहा कि मेरी यात्रा के बारे में 17 अक्टूबर को जिला प्रशासन को सूचित कर दिया गया था। जिलाधिकारी ने इस पर जवाब दिया कि सरकार की अनुमति के बाद अनुमति दी जायेगी। यह पूरी तरह असंवैधानिक है। राज्यपाल ने सवाल पूछा कि क्या मैं राज्य सरकार के अंतर्गत नहीं हूं। वहीं, इस मामले को लेकर भाजपा के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ममता बनर्जी की सरकार है, यह संविधान का पालन नहीं करती है। अगर राज्य के राज्यपाल को अनुमति लेनी है तो इसका मतलब है कि ममता जी का कानून पश्चिम बंगाल में काम करता है, ना कि देश का कानून।