नाबालिग रेप पीड़िता से बोली यूपी पुलिस समझौता कर लो

लखनऊ। यूपी सरकार करोड़ों रूपए खर्च कर सूबे की महिलाओं को बता रही है कि यूपी पुलिस उनकी सुरक्षा में सदैव तत्पर है। 1090 डायल करने के बाद प्रदेश के किसी भी कोने में महिलाओं को तुरंत सुरक्षा उपलब्ध करवाई जाएगी। जिसके लिए हजारों करोंड खर्च कर यूपी पुलिस को हाईटेक भी बनाया गया है। लेकिन यूपी सरकार के तमाम प्रचारों को यूपी की मऊ पुलिस ने पलीता लगा दिया है। मामला मऊ जिले के घोसी थाना क्षेत्र का है जहां अपनी शिकायत दर्ज करवाने पहुंची नाबालिग बलात्कार पीड़िता को ही पुलिस का टार्चर झेलना पड़ा। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस ने उस पर समझौता कर मामले को रफा दफा करने का दवाब बनाया।




मिली जानकारी के मुताबिक मऊ जिले के खदरी क्षेत्र के पास के गांव का एक दबंग युवक 10वीं की छात्रा को तमंचे के बल पर जबरन अपनी बाइक पर ​बैठा लिया। जिसके बाद युवक ने गांव के बाहर पोखरे के पास पहुंच कर बलात्कार की वारदात को अंजाम दिया और जानमाल की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गया। परिजनों और खुद को मिली धमकी को नजरंदाज करते हुए पीड़िता ने साहस दिखाया और अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंच गई।

पीड़िता की मां का कहना है कि वह शिकायत लेकर घोसी थाने गई थी। पहले पुलिस ने मामले को नजरंदाज किया लेकिन देखते देखते पुलिस वाले उस पर दवाब बनाने में जुट गई। पुलिस से इंसाफ ना मिलने के बाद पीड़ित परिवार जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में आने के बाद पुलिस हरकत में आई और छानबीन करना शुरू की। पुलिस की कार्यशैली पर नतीजा ये निकला कि आरोपी फरार होने में कामयाब रहा।




एक दिन पहले कन्नौज में रेप




बुधवार को ही सपा के गढ़ कहे जाने वाले कन्‍नौज में ‘बदायूं कांड’ जैसी सनसनीखेज घटना सामने आई। जिस तरह बदायूं में दो बहनों को रेप-हत्‍या कर पेड़ से लटकाया था, ठीक उसी प्रकार यहां भी खेत में पेड़ पर फंदे से लटकी हुई एक लड़की की लाश बरामद हुई। मृतका के परिजनों ने तीन युवकों पर गैंगरेप के बाद हत्‍या करने के आरोप लगाए हैं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के आलाधिकारी मौके पर पहुंचे। शव को भी कब्‍जे में लेकर पोस्‍टमार्टम के लिए भेज दिया गया, लेकिन 24 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं।




हाईटेक होने के बावजूद नहीं कम हुआ क्राइम ग्राफ




जहां एक ओर सरकार और सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी से जुड़े लोग यह कहते नहीं थकते कि सरकार ने अपराध नियंत्रण के लिए 1090 वीमेन हेल्पलाइन, आधुनिक पुलिस कंट्रोल रूम, डायल 100, हाईटेक गाड़ियों जैसी तमाम व्यवस्थाएं की हैं। वहीं विरोधी और विपक्षी दलों का आरोप है कि ये तो मात्र दिखावे हेतु सुविधाएं हैं। जिसके दम पर अखिलेश सरकार टीवी और अखबारों के माध्यम से अपनी सरकार की छवि को सुधारने का अखिरी प्रयास कर रही है। विपक्ष का कहना तो ये तक है कि जब तक जिम्मेदारी निभाने वालों पर सत्तापक्षा का दवाब कम नहीं होगा, थानों की नियुक्तियों में भेदभाव होता रहेगा तब तक स्थिति जस की तस रहेगी। तकनीकि कार्यक्षमता को बढ़ा सकती न कि कार्यशैली को बदल सकती है।