ग्राम प्रधानों पर भी मेहरबान हो गयी सरकार, बढ़ा दिया मानदेय

लखनऊ: प्रदेश सरकार दीपावली से पहले सरकारी कर्मचारियों और अध्यापकों पर तोहफों की बारिश करने के बाद ग्राम प्रधानों पर भी मेहरबान हो गयी है। अखिलेश सरकार ने ग्राम प्रधानों का मानदेय एक हजार रुपये बढ़ा दिया है। उनके आकस्मिक खर्च और यात्रा व्यय में भी वृद्धि कर दी गयी है। इसके साथ ही ग्राम पंचायत में होने वाले दो लाख रुपये की लागत तक के कार्य की वित्तीय, तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति भी ग्राम सभा दे सकेगी।बीते दिनों ग्राम प्रधानों ने राजधानी में प्रदर्शन कर मानदेय बढ़ाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनकी कई मांगों को पूरा कर दिया है।




पंचायतीराज विभाग के मंत्री रामगोबिन्द चौधरी ने बताया कि ग्राम प्रधानों को अभी तक 2500 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता था जो अब 3500 रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही प्रदेश सरकार ने ग्राम प्रधानों को आकस्मिक खर्च के रूप में दी जाने वाली एक हजार रुपये की धनराशि को बढ़ाकर पांच हजार रुपये कर दिया है। चौधरी ने बताया कि प्रदेश सरकार ने ग्राम प्रधानों की अन्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उनके अधिकारों में वृद्धि की है। ग्राम प्रधानों की यात्रा एवं आनुसांगिक व्यय खर्च मद की सीमा बढ़ाकर अब 15 हजार रुपये कर दी गयी है।




इसकी सीमा अभी तक मात्र पांच हजार रुपये ही थी। उन्होंने बताया कि चौदहवें वित्त एवं राज्य वित्त आयोग के तहत दो लाख की सीमा तक कराये जाने वाले कायरे की प्रशासनिक, तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृति का अधिकार भी ग्रामसभा को दे दिया गया है। अभी तक यह सीमा 50 हजार रुपये ही थी। इसके साथ ही वार्षिक कार्ययोजना की स्वीकृति पूर्ण रूप से ग्रामसभा की खुली बैठक में दिये जाने का भी निर्णय लिया गया है।