भोपाल में सब इंस्पेक्टर की बेटी बनी गैंगरेप का शिकार, दो दिन तक नहीं दर्ज हुई FIR

भोपाल में सब इंस्पेक्टर की बेटी बनी गैंगरेप का शिकार, दो दिन तक नहीं दर्ज हुई FIR

भोपाल। एक युवती को सड़क से उठाकर बंधक बनाकर चार गुंडों ने घंटों तक उसे नोचता खसोटा और पीटा। दर्द के कारण युवती बेहोश हो गई तो उसके होश में आने का इंतजार किया और दोबारा अपनी हवस का शिकार बनाया। शारित अपराधी अपने मंसूबों को अंजाम देने के बाद युवती को झाड़ियों में फेंक कर भाग गए। एक घटना का इतना सच एक पीड़िता के मुंह से निकलने के बाद किसी को भी अंदर तक झंकझोर देने के लिए काफी है, लेकिन मध्यप्रदेश की भोपाल पुलिस के कान इस सच्चाई को बार बार सुनने के बाद भी नहीं खुले। पीड़िता ने तीन थानों के चक्कर लगाए, लेकिन कानून के रखवालों को उस पर दया नहीं आई। सबसे बड़ी बात यह रही की पीड़िता कोई और नहीं एक सब इंस्पेक्टर पिता और सीआईडी कर्मी मां की बेटी थी।

इस मामले में पीड़िता के पिता ने सक्रियता दिखाते हुए दो आरोपियों को पकड़कर जब पुलिस के हवाले किया, तब जाकर पुलिस ने उस वारदात को गंभीरता से लिया जो 48 घंटे पहले घटी थी। जिसके बाद से यह घटना मध्यप्रदेश की मीडिया की सुर्खियों में छाकर एमपी पुलिस और सरकार के लिए शर्मिन्दगी की वजह बन रही है। शिवराज सिंह सरकार ने खुद को किरकिरी से बचाने के लिए एसएसपी समेंत छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई कर दी है।

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मामला मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल शहर के हबीबगंज रेलवे स्टेशन इलाके का है। जहां रहकर यूपीएससी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही विदिशा निवासी 19 वर्षीय युवती का 31 अक्टूबर की शाम कोचिंग से लौटते वक्त दो गुंड़ों ने अपहरण कर लिया। उसकी इज्जत को कई बार तार तार करके थक जाने के बाद उन्होंने अपने दो अन्य साथियों को बुलाकर बलात्कार करने की दावत दी। चूंकि युवती अपने ऊपर हुए अत्याचार की वजह से बेहोश हो गई इसलिए उन्होंने उसके होश में आने का इंतजार किया और बारी बारी से अपनी हवस की प्यास बुझाई।

बकौल पीड़िता वह स्टेशन के पास से गुजरने वाली सड़क पर बनी पुलिया के ऊपर से गुजर रही थी तभी दो लोग उसे मारते पीटते हुए पुलिया के नीचे खींच ले गए। वह अपने बचाव में चिल्लाती कि इससे पहले उन दरिंदों ने उसके मुंह को अपने हांथों से दबोच लिया और उसके हाथ पांव बांध दिए।

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पीड़िता के मुताबिक दोनों ने उसके साथ दरिन्दगी की सारी हदें पार कर दीं। एक समय ऐसा आया जब वह बेहोश हो गई। लेकिन उसे जब दोबारा होश आया तो वहां चार लोग थे और चारों ने पहले उसकी ​इज्जत लूटी और फिर पर्स, मोबाइल और अंगूठियां ले​कर उसे बंधा छोड़कर भाग गए।

पीड़िता की बताई यहां तक की कहानी में उसके साथ हुए अपराध के दोषी वे बदमाश या गुंड़े थे, जो भाग गए थे। इसके आगे की कहानी के अपराधी पुलिस वाले थे। वे पुलिस वाले जिनके पास वह अपनी गुहार लेकर पहुंची थी।

गैंगरेप का शिकार हो चुकी पीड़िता किसी तरह से निकल कर हबीबगंज जीआरपी थाने तक पहुंची जहां से उसे मदद की उम्मीद थी, लेकिन जीआरपी से मदद के नाम पर केवल एक फोन कॉल करने को मिली। जो पीड़िता ने अपने पिता को किया और आपबीती सुनाई। पीड़िता ने जीआरपी थाने में मामला दर्ज करने की गुहार लगाई लेकिन मामला रेलवे से न जुड़ा होने के कारण उसे पास के थाने में जाने को कहा गया।

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जीआरपी थाने से मिली जानकारी के आधार पीड़िता दो अन्य थानों तक भी गई लेकिन दोनों ही जगह पुलिस वालों ने उसकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने से इंकार कर दिया। पीड़िता ने थानों में बताया भी कि उसके पिता भी पुलिसकर्मी हैं और सब इंस्पेक्टर हैं। इसके बाद भी किसी पुलिसकर्मी की संवेदनाएं नहीं जागी।

भोपाल पुलिस की कार्यशैली देखने के बाद पीड़ित परिवार ने हार नहीं मानी और सब इंस्पेक्टर पिता ने बेटी की बताई जगह पर जाकर दो युवकों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया। जिसके बाद भोपाल पुलिस एक्शन में आई और पीड़िता को आरोपियों के साथ मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा और दो अन्य की गिरफ्तारी के लिए प्रयास शुरू किए।

इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली की खबरें मीडिया की सुर्खियों में आने के बाद जागी मध्यप्रदेश सरकार ने आनन फानन में एक्शन लेते हुए एसएसपी का तबादला करते हुए तीन टीआई और दो एसआई को निलंबित कर दिया है।

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